
जुबली हिल्स उपचुनाव, फोटो- सोशल मीडिया
Jubilee Hills By Election: यह घटना तब सामने आई जब मतदान सुचारू रूप से चल रहा था, लेकिन कुछ कांग्रेस कार्यकर्ता कथित तौर पर पोलिंग बूथों के आसपास सक्रिय हो गए और मतदाताओं को अपने पक्ष में वोट देने के लिए प्रेरित करने लगे। चुनाव आचार संहिता के तहत, किसी भी पार्टी के कार्यकर्ताओं को मतदान केंद्र के एक निश्चित दायरे में प्रचार करने या मतदाताओं की स्वतंत्रता को बाधित करने की अनुमति नहीं होती है। इस नियम का उल्लंघन करना निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया के लिए एक गंभीर चुनौती है।
सूत्रों के अनुसार, यह आरोप लगाया गया है कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इस कोड ऑफ कंडक्ट को ताक पर रख दिया और मतदान की गोपनीयता और निष्पक्षता को खतरे में डालते हुए अपनी गतिविधियां जारी रखीं। मतदाताओं को प्रभावित करने का प्रयास चुनाव नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जाता है। ऐसे कृत्यों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि परिणाम किसी विशेष राजनीतिक दल के पक्ष में झुकाव दिखाए, जिससे लोकतंत्र की मूल भावना आहत होती है।
जुबली हिल्स के कई मतदान केंद्रों के पास कांग्रेस के कार्यकर्ता सीरियल नंबर 2 लिखे हुए टी-शर्ट पहनकर हंगामा करते हुए दिखाई दिए। आपको बता दें कि ये टी-शर्ट कांग्रेस पार्टी के स्टाइल मिलती जुलती है। मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि ये कृत्य चुनावी प्रक्रिया की शुचिता पर सवाल खड़े करते हैं। यह घटना राजनीतिक माहौल को तनावपूर्ण बना सकती है और अन्य प्रतिस्पर्धी दलों को इस मामले पर शिकायत करने के लिए प्रेरित कर सकती है। चुनाव आयोग इन आरोपों का संज्ञान ले और जल्द से जल्द जांच करे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जिन मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश की गई थी, उनके मत की गोपनीयता बनी रहे और मतदान प्रक्रिया निष्पक्षता के साथ पूरी हो।
यह भी पढ़ें: Bypoll Election 2025 : 7 राज्यों 8 विधानसभा सीटों पर वोटिंग जारी, अब तक …
चुनावों के दौरान सभी राजनीतिक दलों और उनके कार्यकर्ताओं को चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित नियमों का कड़ाई से पालन करना चाहिए। आचार संहिता का उल्लंघन सीधे तौर पर यह दर्शाता है कि कुछ दल चुनावी लाभ के लिए नियमों को तोड़ने को तैयार हैं। फिलहाल, जुबली हिल्स उपचुनाव में कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर लगे इन गंभीर आरोपों के बाद, सभी की निगाहें चुनाव अधिकारियों की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। इन आरोपों के चलते, इस उपचुनाव के अंतिम परिणाम पर भी इन विवादों का साया पड़ सकता है।






