कांग्रेस आलाकमान ने चुनाव लड़ने की रणनीति में किया बड़ा बदलाव, बागी नेताओं के लिए बनाया 'चक्रव्यूह'

Congress ने एक टिकट पर अनेक दावेदारी वाले नेताओं के लिए एक खास पॉलिसी तैयार करके इसका काट निकाला है, आलाकमान अपने हिसाब से उम्मीदवार का चयन करता तो अब नाराजगी मुमकिन नहीं होगी।
Congress's Anti-Rebellion Plan: Rebellious leaders are in for trouble! Congress has created such a 'strategic trap' for the Assam elections
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे व राहुल गांधी (फोटो- सोशल मीडिया)
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Congress Candidate Selection New Strategy: असम विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने एक ऐसी धांसू रणनीति तैयार की है, जिसे जानकर हर कोई हैरान है। अक्सर देखा जाता है कि चुनाव के समय टिकट न मिलने पर नेता अपनी ही पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल देते हैं, लेकिन अब ऐसा करना मुमकिन नहीं होगा। कांग्रेस आलाकमान ने बगावत को जड़ से खत्म करने के लिए एक विशेष 'अंडरटेकिंग' का नियम बनाया है। इस नई व्यवस्था के तहत टिकट की दावेदारी पेश करने से पहले नेताओं को एक कसम खानी होगी।

पार्टी ने टिकट चाहने वालों के लिए एक खास एप्लीकेशन फॉर्म जारी किया है, जिसे भरना हर दावेदार के लिए अनिवार्य है। लेकिन यह फॉर्म सिर्फ एक कागज का टुकड़ा नहीं है, बल्कि इसमें कड़े नियम और शर्तें शामिल हैं। फॉर्म भरने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि टिकट पक्का हो गया। पार्टी सभी आवेदनों की बारीकी से जांच करेगी और जो उम्मीदवार सबसे मजबूत लगेगा, उसी पर भरोसा जताएगी। खास बात यह है कि फॉर्म भरते समय ही नेता को लिखित में वादा करना होगा।

50 हजार रुपये और वफादारी का टेस्ट

अगर किसी नेता को लगता है कि वह आसानी से दावेदारी जता देगा, तो उसे अपनी जेब भी ढीली करनी पड़ेगी। यह आवेदन फॉर्म मुफ्त में उपलब्ध नहीं है। इसके साथ दावेदार को 50 हजार रुपये का डिमांड ड्राफ्ट लगाना होगा। जो भी नेता इन सख्त शर्तों को मानने के लिए तैयार है, उसे 20 जनवरी तक हर हाल में अपना आवेदन जमा करना होगा। कांग्रेस ने यह साफ संदेश दे दिया है कि अनुशासन और पार्टी के प्रति वफादारी ही टिकट पाने की सबसे बड़ी योग्यता मानी जाएगी।

100 सीटों पर वार, बाकी पर यार

असम की कुल 126 विधानसभा सीटों के गणित को लेकर भी स्थिति साफ हो चुकी है। कांग्रेस पार्टी ने तय किया है कि वह करीब 100 सीटों पर खुद अपने उम्मीदवार उतारेगी और बाकी सीटें गठबंधन के छोटे दलों के लिए छोड़ी जाएंगी। अक्सर एक सीट पर कई दावेदार होने से नाराजगी बढ़ती है और खेल बिगड़ता है। इसलिए, आलाकमान ने यह सुनिश्चित किया है कि जो नेता टिकट से वंचित रह जाएं, वे 'अंडरटेकिंग' के कारण बगावत न कर सकें और पार्टी एकजुट होकर चुनाव लड़ सके।

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