'हमें सर्टिफिकेट देने वाले खुद पाक में घुसे', जयशंकर ने बिन लादेन का जिक्र कर ट्रंप की ले डाली क्लास

S Jaishankar: ऑपरेशन सिंदूर पर ट्रंप के दावों को खारिज करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि युद्ध की स्थिति में हर एक देश एक-दूसरे से बात करता है। उन्होंने ट्रंप को पाक की दोस्ती पर लादेन की याद दिलाई।
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विदेश मंत्री एस जयशंकर अमेरिका याद दिलाया इतिहास
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S Jaishankar on Trump-Pakistan: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को अमेरिका और पाकिस्तान के बीच बढ़ती नजदीकियों को लेकर अमेरिका को कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने ओसामा बिन लादेन का जिक्र करते हुए कहा कि जो लोग आतंकवाद पर हमें 'सर्टिफिकेट' दे रहे हैं, वही एक समय पाकिस्तान के एबटाबाद में घुसकर दुनिया के सबसे वांछित आतंकवादी को मार आए थे। जयशंकर ने ट्रंप के उस दावे को भी खारिज किया जिसमें उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत-पाकिस्तान के बीच युद्धविराम कराने का दावा किया था। उन्होंने साफ कहा कि अमेरिका ने सिर्फ मध्यस्थता की थी, लेकिन फैसला भारत-पाकिस्तान ने लिया था।

जयशंकर ने इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम 2025 में एक सवाल के जवाब में अमेरिका के पाकिस्तान के साथ इतिहास को नजरअंदाज करने की टेंडेंसी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब अमेरिका ने पाकिस्तान के साथ अपने इतिहास को भुलाया है। उन्होंने याद दिलाया कि 2011 में ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान के एबटाबाद में मिला था, जिसे अमेरिकी सेना ने एक ऑपरेशन में मार गिराया था। ऐसे में जो अमेरिका आज पाकिस्तान के साथ करीबी बढ़ा रहा है, उसे अपना इतिहास याद रखना चाहिए।

युद्धविराम पर ट्रंप के दावे को खारिज

विदेश मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान युद्धविराम कराने के ट्रंप के दावे को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि युद्ध के समय सभी देश एक-दूसरे से बात करते हैं, लेकिन युद्धविराम का फैसला भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ था। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों पर भारतीय सेना द्वारा सटीक निशाना लगाने के बाद पाकिस्तान ने खुद युद्धविराम की गुजारिश की थी। इस दौरान अमेरिका समेत कई देशों से फोन कॉल आए थे, लेकिन अंतिम फैसला भारत का था।

'युद्ध में फोन कॉल सामान्य बात'

जयशंकर ने कहा कि जब इजरायल-ईरान और रूस-यूक्रेन के बीच जंग शुरू हुई थी, तब भी उन्होंने कई देशों को फोन किए थे। ऐसे में ट्रंप का यह दावा करना कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच युद्धविराम कराया, पूरी तरह से गलत है। जयशंकर ने साफ कहा कि इस तरह के फोन कॉल युद्ध के समय सामान्य होते हैं और इनका मतलब यह नहीं होता कि कोई देश युद्ध का फैसला किसी दूसरे के कहने पर ले रहा है। उन्होंने कहा कि भारत अपने फैसले खुद लेता है और किसी के दबाव में नहीं आता।

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