ईरान-इजरायल युद्ध से भारत में गहराएगा तेल संकट? जानें सरकार की 'कवच' योजना और बैकअप प्लान

Israel-Iran Conflict: ईरान-इजरायल तनाव के बीच भारत की तेल आपूर्ति पर बड़ा अपडेट। जानें कैसे 74 दिनों का बैकअप और नए रूट देश को ऊर्जा संकट से बचाएंगे।
India crude oil stock 2026
ईरान-इजरायल जंग से भारत में गहराया सकता है तेल संकट (सोर्स- सोशल मीडिया)
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India crude oil stock 2026: पश्चिम एशिया में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल पैदा कर दी है। इस बीच, भारत के केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने देश को आश्वस्त किया है कि भारत किसी भी संभावित आपूर्ति व्यवधान से निपटने के लिए "पूरी तरह तैयार" और "पर्याप्त स्टॉक" से लैस है। वैश्विक स्तर पर भारत कच्चे तेल का तीसरा सबसे बड़ा आयातक और पेट्रोलियम उत्पादों का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर है, जिसे देखते हुए सरकार ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।

74 दिनों का तेल बैकअप: आंकड़ों में समझें

भारत की ताकत भारत सरकार के शीर्ष अधिकारियों के अनुसार, देश के पास वर्तमान में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का एक मजबूत भंडार मौजूद है। भारत के पास लगभग 25 दिनों का कच्चा तेल और 25 दिनों का ही पेट्रोलियम उत्पादों (पेट्रोल, डीजल और एटीएफ) का इन्वेंट्री स्टॉक है। इसके अलावा, देश में लगभग 25-30 दिनों का एलपीजी (LPG) स्टॉक भी सुरक्षित रखा गया है। यदि हम तेल विपणन कंपनियों (OMCs) की 64.5 दिनों की भंडारण क्षमता और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) को मिला दें, तो भारत के पास कुल 74 दिनों का राष्ट्रीय कवरेज उपलब्ध है। यह भंडार अल्पावधि में किसी भी बड़े झटके को झेलने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है।

होर्मुज जलडमरूमध्य का संकट से तलाशा वैकल्पिक मार्ग

वैश्विक कच्चे तेल के समुद्री व्यापार का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (होर्मुज जलडमरूमध्य) से होकर गुजरता है। भारत की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि देश के कच्चे तेल के आयात का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से आता है। आंकड़ों के अनुसार, भारत की 83% एलपीजी आपूर्ति, 56% एलएनजी और 51% कच्चा तेल आयात होर्मुज से जुड़ी समुद्री सीमाओं पर निर्भर है। मंत्री पुरी ने स्पष्ट किया कि यदि तनाव के कारण यह मार्ग लंबे समय तक बंद रहता है, तो भारतीय ऊर्जा कंपनियां अपनी खरीद में विविधता लाएंगी। ऐसी स्थिति में तेल के जहाजों को 'केप ऑफ गुड होप' (Cape of Good Hope) के लंबे रास्ते से भारत लाया जाएगा। इसके साथ ही, भारत अब पश्चिम अफ्रीका और अमेरिका जैसे भौगोलिक क्षेत्रों से कच्चे तेल के आयात पर ध्यान केंद्रित कर रहा है जो होर्मुज के रास्ते पर निर्भर नहीं हैं।

रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) की भूमिका

भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को भविष्य में और मजबूत करने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों में रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) विकसित किए हैं। वर्तमान में विशाखापत्तनम (1.33 मिलियन टन), मंगलुरु (1.5 मिलियन टन) और पादुर (2.5 मिलियन टन) में कुल 5.33 मिलियन टन की क्षमता मौजूद है। सरकार ने ओडिशा के चांदीखोल और कर्नाटक के पादुर में दो और अतिरिक्त व्यावसायिक-सह-रणनीतिक भंडार बनाने को मंजूरी दी है, जिससे भंडारण क्षमता में 6.5 मिलियन टन की और वृद्धि होगी।

सरकार की है 24x7 निगरानी

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय ने एक 24×7 कंट्रोल रूम स्थापित किया है, जो देश भर में पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति और स्टॉक की स्थिति की निरंतर निगरानी कर रहा है। मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि सरकार "सावधानीपूर्वक आशावादी" है और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। कतर और सऊदी अरब जैसे प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं के बुनियादी ढांचे पर हमलों के बावजूद, भारत वर्तमान में पेट्रोलियम निर्यात में कटौती या एलपीजी के उपयोग को युक्तिसंगत बनाने की कोई योजना नहीं बना रहा है। सरकार का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा की उपलब्धता और सामर्थ्य (Affordability) दोनों को सुनिश्चित करना है।

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