छिंदवाड़ा में जंतर-मंतर जैसे हालात; एसएके नर्सिंग कॉलेज की 60 छात्राएं न्याय की लड़ाई में सड़क पर उतरीं

Students Protest Chhindwara: छिंदवाड़ा में 4 साल से परीक्षा न होने पर भड़कीं एसएके नर्सिंग कॉलेज की छात्राएं, धरना देने के बाद कोतवाली थाने पहुंचीं, फीस और मूल दस्तावेज वापस दिलाने की मांग।
Around 60 students of SAK Memorial Institute of Nursing staged a protest on the streets of Chhindwara, demanding justice and alleging serious irregularities by the college management
छिंदवाड़ा में छात्रों ने किया प्रदर्शन (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Chhindwara Nursing Students Protest: राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर की तर्ज पर अब मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में भी छात्राओं का आक्रोश सड़क पर नजर आया। एसएके मेमोरियल इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग की करीब 60 छात्राओं ने सोमवार को कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए संचालक के परिवार द्वारा संचालित निजी अस्पताल के सामने धरना दिया।

छात्राओं का आरोप है कि कॉलेज प्रबंधन की लापरवाही के कारण उनका शैक्षणिक भविष्य अधर में लटक गया है। उनका कहना है कि प्रशासन और पुलिस से कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिसके चलते उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।

प्रवेश के समय जमा कराए दस्तावेज, चार साल बाद भी नहीं हुई परीक्षा

प्रदर्शन कर रही छात्राओं ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2022-23 में कॉलेज में प्रवेश लिया था। उस दौरान कॉलेज प्रबंधन ने उनसे निर्धारित फीस, ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी), माइग्रेशन सर्टिफिकेट सहित सभी जरूरी दस्तावेज जमा करा लिए थे। छात्राओं का आरोप है कि चार वर्ष बीत जाने के बाद भी उनकी परीक्षा आयोजित नहीं कराई गई और न ही पाठ्यक्रम को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी दी गई। उनका कहना है कि कॉलेज प्रबंधन लगातार केवल आश्वासन देता रहा, जिससे उनका करियर और भविष्य दोनों संकट में पड़ गए हैं।

कोतवाली थाने पहुंचीं छात्राएं, कार्रवाई की उठाई मांग

धरना-प्रदर्शन के बाद सभी छात्राएं कोतवाली थाने पहुंचीं और कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई। छात्राओं ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही उन्होंने कॉलेज में जमा कराई गई फीस और मूल दस्तावेज वापस दिलाने की मांग की है। छात्राओं का कहना है कि चार वर्षों के शैक्षणिक और आर्थिक नुकसान की भी भरपाई कराई जानी चाहिए, ताकि उनके भविष्य को सुरक्षित किया जा सके।

कॉलेज संचालक का पक्ष नहीं आया सामने

इस पूरे मामले में कॉलेज संचालक रिजवान खान का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। फिलहाल उनकी ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, छात्राओं का कहना है कि जब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होगा, तब तक वे अपना आंदोलन जारी रखेंगी। अब सभी की निगाहें प्रशासन और संबंधित विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं कि छात्राओं के आरोपों की जांच किस तरह की जाती है और उनके भविष्य को लेकर क्या निर्णय लिया जाता है।

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