दिल्ली NCR में GRAP-3 लागू, स्कूल से लेकर ऑफिस तक, जानें क्या रहेगा खुला और क्या बंद

Air Pollution in Delhi: दिल्ली नोएडा और गाजियाबाद में GRAP-3 लागू कर दिया गया है। वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति के बाद ये फैसला लिया गया है।
दिल्ली की हवा से फेफड़ों में संक्रमण
दिल्ली की हवा से फेफड़ों में संक्रमण (सौ. डिजाइन फोटो)
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GRAP 3 Air Pollution in Delhi: दिल्ली-NCR में बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच GRAP 3 लागू कर दिया गया है। इसके तहत कक्षा 5 तक के स्कूलों को बंद किया जा सकता है। साथ ही कंपनियों को वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था अपनाने की सलाह दी गई है। दिल्ली में आनंद विहार, पालम, लाल किला और चांदनी चौक जैसे इलाकों में AQI स्तर 400 के पार पहुंच गया। इसके बाद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने ग्रैप-3 लागू करने का निर्णय लिया।

ग्रैप-3 में क्या-क्या बंद रहेगा

  • ध्वस्तीकरण, गैर-जरूरी निर्माण कार्य और पुराने डीजल वाहनों पर रोक लगेगी।
  • सीमेंट, बालू जैसे निर्माण सामग्रियों की ट्रकों से आवाजाही पर रोक होगी।
  • बाहरी राज्यों और दिल्ली के भीतर चलने वाली डीजल बसों के संचालन पर भी रोक लगेगी।
  • कक्षा 5 तक के स्कूल बंद रहेंगे, ऑनलाइन कक्षाओं की अनुमति दी जाएगी।
  • स्टोन क्रशर और खनन से जुड़ी गतिविधियां बंद रहेंगी।
  • आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर डीजल जनरेटरों का उपयोग प्रतिबंधित रहेगा।
  • दफ्तरों को वर्क फ्रॉम होम या हाइब्रिड मोड में काम करने की सलाह दी गई है।

बेहद खराब श्रेणी में पहुंचा वायु प्रदूषण

दिल्ली-NCR में एयर क्वालिटी गंभीर स्तर पर पहुंचने के बाद केंद्र सरकार ने यह कदम उठाया। सोमवार को दिल्ली का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 362 था, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है, जबकि मंगलवार को यह बढ़कर 425 तक पहुंच गया। CAQM ने हवा की धीमी गति और वायुमंडलीय परिस्थितियों को देखते हुए यह सिफारिश की, जिसके बाद यह फैसला लागू किया गया। पिछले वर्ष 14 नवंबर को भी इसी तरह ग्रैप-3 की पाबंदियां लगाई गई थीं।

कृत्रिम बारिश भी बेअसर

हाल ही में कृत्रिम बारिश की कोशिश पर कुल 3.21 करोड़ रुपये खर्च हुए, जिसका औसत खर्च 64 लाख रुपये प्रति ट्रायल था।इतना पैसा खर्च करने के बावजूद, दिल्ली के बड़े हिस्से में पर्याप्त कृत्रिम बारिश नहीं हो पाई और यह प्रयास बेअसर रहा।

यह साफ है कि जब तक इस समस्या के जड़ पर काम करने वाला और साल भर चलने वाला स्थायी समाधान नहीं खोजा जाता, तब तक दिल्ली-एनसीआर की हवा, लोगों का स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था, तीनों का दम घुटता रहेगा।

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