
ग्रीन स्टील हब (AI generated image)
Wadsa-Gadchiroli Rail Line: विदर्भ के नक्सल प्रभावित गड़चिरोली जिले के लिए आने वाले वर्ष ऐतिहासिक बदलाव के संकेत दे रहे हैं। एडवांटेज विदर्भ में मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस स्पष्ट कर चुके हैं कि गड़चिरोली को ‘ग्रीन स्टील हब ऑफ इंडिया’ के रूप में विकसित किया जाएगा। उनके इस विजन को पूरा करने के लिए दक्षिण-पूर्व-मध्य रेल नागपुर मंडल के तहत बनाई जा रही वड़सा-गड़चिरोली ब्राडगेज लाइन ट्रम्प कार्ड साबित होगी।
इस रेल परियोजना की घोषणा वर्ष 2011-12 में की गई थी लेकिन जमीनी स्तर पर काम शुरू नहीं हो सका। वर्ष 2014 में मोदी सरकार बनते ही काम ने गति पकड़ी। हालांकि वन भूमि, टाइगर कॉरिडोर और पर्यावरणीय मंजूरियों के कारण परियोजना में देरी होती रही। अड़चनें कायम रहीं और वर्ष 2025 समाप्त होने के बाद भी केवल 52 किमी का यह ब्राडगेज रूट पूरा नहीं हो सका।
हालांकि रेल अधिकारियों की मानें तो दिसंबर 2026 तक प्रोजेक्ट पूरा हो जाएगा। यह रेल लाइन ताडोबा, नागझीरा-नवेगांव, कान्हा और इंद्रावती टाइगर रिजर्व को जोड़ने वाले संवेदनशील टाइगर कॉरिडोर से होकर गुजरती है। उल्लेखनीय है कि इस रेल रूट का करीब 22 किमी हिस्सा सघन वन्य क्षेत्र (टाइगर जोन) से होकर गुजर रहा है जो सबसे बड़ी अड़चन है।
वह स्टील जिसके उत्पादन में कार्बन उत्सर्जन न्यूनतम या शून्य होता है। इसमें कोयले की जगह स्वच्छ ऊर्जा और आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाता है।
| पारंपरिक स्टील | ग्रीन स्टील |
|---|---|
| कोयला आधारित | हाईड्रोजन, ग्रीन एनर्जी |
| अधिक प्रदूषण | कम प्रदूषण |
| ज्यादा कार्बन उत्सर्जन | कार्बन न्यूट्रल लक्ष्य |
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दक्षिण-पूर्व-मध्य रेल जोन के जेडआरयूसीसी सदस्य ब्रजभूषण शुक्ला ने कहा कि गड़चिरोली की पहचान बदलने वाली है। जल्द ही ये देश के सबसे कमाऊ जिले में शामिल होने वाला है और उसकी इस पहचान में मुख्य भूमिका वड़सा-गड़चिरोली ब्राडगेज रेल लाइन परियोजना की भी रहेगी।
वास्तव में केवल 52 किमी की यह रेल लाइन एक तीर से कई निशाने साधने वाली साबित होगी। ग्रीन स्टील उत्पादन, परिवहन, क्षेत्र में उद्योगों का विकास के साथ स्थानीय लोगों का पलायन भी रोकेगी क्योंकि अपने ही घर में रोजगार मिलेगा।






