ग्रीन स्टील हब नहीं..रेलवे का ट्रंप कार्ड कहो: वड़सा-गड़चिरोली रेल रूट होगा गेमचेंजर, एक तीर से होंगे कई शिकार

Green Steel Hub Gadchiroli: गड़चिरोली बनेगा भारत का ‘ग्रीन स्टील हब’। 52 किमी की वड़सा-गड़चिरोली रेल लाइन दिसंबर 2026 तक होगी पूरी। नक्सलवाद पर विकास का प्रहार।
Gadchiroli to become India's Green Steel Hub. The 52km Wadsa-Gadchiroli rail line to be completed by Dec 2026.
ग्रीन स्टील हब (AI generated image)
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Wadsa-Gadchiroli Rail Line: विदर्भ के नक्सल प्रभावित गड़चिरोली जिले के लिए आने वाले वर्ष ऐतिहासिक बदलाव के संकेत दे रहे हैं। एडवांटेज विदर्भ में मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस स्पष्ट कर चुके हैं कि गड़चिरोली को ‘ग्रीन स्टील हब ऑफ इंडिया’ के रूप में विकसित किया जाएगा। उनके इस विजन को पूरा करने के लिए दक्षिण-पूर्व-मध्य रेल नागपुर मंडल के तहत बनाई जा रही वड़सा-गड़चिरोली ब्राडगेज लाइन ट्रम्प कार्ड साबित होगी।

इस रेल परियोजना की घोषणा वर्ष 2011-12 में की गई थी लेकिन जमीनी स्तर पर काम शुरू नहीं हो सका। वर्ष 2014 में मोदी सरकार बनते ही काम ने गति पकड़ी। हालांकि वन भूमि, टाइगर कॉरिडोर और पर्यावरणीय मंजूरियों के कारण परियोजना में देरी होती रही। अड़चनें कायम रहीं और वर्ष 2025 समाप्त होने के बाद भी केवल 52 किमी का यह ब्राडगेज रूट पूरा नहीं हो सका।

  • 2011-12 में घोषणा
  • 2015-16 में काम शुरू
  • 2025-26 में काम जारी

हालांकि रेल अधिकारियों की मानें तो दिसंबर 2026 तक प्रोजेक्ट पूरा हो जाएगा। यह रेल लाइन ताडोबा, नागझीरा-नवेगांव, कान्हा और इंद्रावती टाइगर रिजर्व को जोड़ने वाले संवेदनशील टाइगर कॉरिडोर से होकर गुजरती है। उल्लेखनीय है कि इस रेल रूट का करीब 22 किमी हिस्सा सघन वन्य क्षेत्र (टाइगर जोन) से होकर गुजर रहा है जो सबसे बड़ी अड़चन है।

वड़सा-गड़चिरोली रेल परियोजना

  • लंबाई : 52.36 किमी
  • रूट : वड़सा-आरमोरी-गड़चिरोली
  • घोषणा : वर्ष 2011-12
  • विशेष रेलवे परियोजना घोषित : दिसंबर 2015
  • प्रारंभिक लागत : 450-575 करोड़
  • वर्तमान अनुमानित लागत : 1,886 करोड़ (फरवरी 2025 तक) (वर्तमान में संभावित 2000 करोड़ के पार)
  • लागत वृद्धि : लगभग 350 प्रतिशत
  • साझेदारी : केंद्र व महाराष्ट्र सरकार (50:50)
  • कुल भूमि आवश्यकता : 220 हेक्टेयर
  • वन भूमि उपयोग : 84 हेक्टेयर
  • पेड़ों की संख्या (ताजा सर्वे): 9,450
  • टाइगर रिजर्व कॉरिडोर : ताडोबा, नवेगांव, कान्हा, इंद्रावती
  • स्थिति : भूमि अधिग्रहण पूर्ण, निर्माण कार्य प्रगति पर

ग्रीन स्टील क्या है?

वह स्टील जिसके उत्पादन में कार्बन उत्सर्जन न्यूनतम या शून्य होता है। इसमें कोयले की जगह स्वच्छ ऊर्जा और आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाता है।

पारंपरिक और ग्रीन स्टील में अंतर

पारंपरिक स्टील ग्रीन स्टील
कोयला आधारित हाईड्रोजन, ग्रीन एनर्जी
अधिक प्रदूषण कम प्रदूषण
ज्यादा कार्बन उत्सर्जन कार्बन न्यूट्रल लक्ष्य

गड़चिरोली ही क्यों?

  • उच्च गुणवत्ता का लौह अयस्क
  • उपलब्ध भूमि, नियोजित औद्योगीकरण
  • पिछड़ा व नक्सल प्रभावित क्षेत्र
  • रोजगार सृजन की बड़ी संभावना

रेल कनेक्टिविटी क्यों अहम?

  • वड़सा-गड़चिरोली रेलवे लाइन
  • कच्चे माल की सस्ती ढुलाई
  • तैयार स्टील का निर्यात आसान
  • लॉजिस्टिक लागत में कटौती

चीन से सस्ता स्टील कैसे?

  • स्थानीय कच्चा माल
  • कम परिवहन खर्च
  • ग्रीन एनर्जी
  • बड़े पैमाने पर उत्पादन

स्थानीय लोगों को क्या मिलेगा?

  • रोजगार और स्किल ट्रेनिंग
  • बेहतर सड़क, रेल, बिजली
  • शिक्षा व स्वास्थ्य सुविधाएं
  • पलायन में कमी

पर्यावरण सुरक्षा कैसे?

  • कड़े पर्यावरण मानक
  • वन्यजीव शमन संरचनाएं
  • कार्बन न्यूट्रल लक्ष्य

गड़चिरोली को देश की मुख्यधारा से जोड़ेगी रेल

  • यह ब्राडगेज रेल लाइन केवल एक परियोजना नहीं है बल्कि गड़चिरोली जैसे नक्सली जिले को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का माध्यम बनेगी।
  • वड़सा स्टेशन पहले ही नागपुर-हावड़ा रूट पर स्थित गोंदिया स्टेशन से जुड़ा हुआ है। यहां से गड़चिरोली के लिए मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़, ओडिशा, बिहार, बंगाल, असम समेत पूर्वोत्तर राज्यों के लिए ट्रेन रूट मिलेगा।
  • वड़सा से नागभीड़, चंद्रपुर होते हुए बल्लारशाह से दक्षिण भारत के लिए रेल रूट तैयार है। वहीं नागपुर-नागभीड़ ब्राडगेज रेल परियोजना के तहत उमरेड का काम पूरा करके लाइन शुरू की जा चुकी है।
  • रेल अधिकारियों के अनुसार, दिसंबर 2026 तक उमरेड से नागभीड़ तक काम भी पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद  वड़सा भी नागभीड़ होते हुए नागपुर के माध्यम से दिल्ली, मुंबई, पुणे, सूरत जैसे प्रमुख रेल रूट से सीधा जुड़ जायेगा।
  • साफ है कि केवल एक वड़सा-गड़चिरोली ब्राडगेज रूट पूरा होते ही अलग-थलग पड़ा ‘हरे सोने’ यानी ‘ग्रीन स्टील’ की खान यानी गड़चिरोली पूरे देश से जुड़े जाएगा।

एक रेल लाइन बदल देगी सारा नजारा : शुक्ला

दक्षिण-पूर्व-मध्य रेल जोन के जेडआरयूसीसी सदस्य ब्रजभूषण शुक्ला ने कहा कि गड़चिरोली की पहचान बदलने वाली है। जल्द ही ये देश के सबसे कमाऊ जिले में शामिल होने वाला है और उसकी इस पहचान में मुख्य भूमिका वड़सा-गड़चिरोली ब्राडगेज रेल लाइन परियोजना की भी रहेगी। वास्तव में केवल 52 किमी की यह रेल लाइन एक तीर से कई निशाने साधने वाली साबित होगी। ग्रीन स्टील उत्पादन, परिवहन, क्षेत्र में उद्योगों का विकास के साथ स्थानीय लोगों का पलायन भी रोकेगी क्योंकि अपने ही घर में रोजगार मिलेगा।

  • नवभारत लाइव पर नागपुर से सतीश दंडारे की रिपोर्ट
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