
भाजपा और कांग्रेस के समीकरण (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Chandrapur Municipal Corporation: चंद्रपुर शहर महानगर पालिका में मंगलवार को महापौर उपमहापौर पद के चुनाव हो रहे है। इस चुनाव की सरगर्मियां जहां चरम पर है वहीं इसका सस्पेंस भी उतना ही हाई होता जा रहा है। दोनों कांग्रेस गुटों के पार्षद अज्ञात स्थल पर होने की जानकारी मिली है।
सूत्रों के अनुसार ये मंगलवार को सुबह दस बजे के दौरान चंद्रपुर में दाखिल होंगे। जिसमें कुछ पार्षदों के मौजूद न रहने की भी प्रबल संभावना जताई जा रही है। कुल मिला कर चंद्रपुर शहर मनपा की इस बार की सत्ता बेमेल युति की ओर अग्रसर होने की चर्चा है। सत्ता कोई भी बनाए परंतु फिलहाल पार्षद होटलों में पर्यटन का आनंद ले रहे है।
चंद्रपुर महानगर पालिका चुनाव के बाद से ही कांग्रेस भाजपा में सियासी घमासान शुरु है। कांग्रेस के दो गुटों में सत्ता स्थापना से लेकर महापौर व अन्य पदों को लेकर रस्साकशी हुई। उसके बाद भी नेता एकमत नहीं हुए। भाजपा में भी इससे अलग हालात नहीं है। मजबूर सरकार के मद्देनजर हम भी सत्ता बना सकते है, इस उम्मीद को लेकर भाजपा ने शिवसेना (यूबीटी) व अन्य दलों को लेकर सियासी दांवपेच शुरु किये है।
भाजपा एक कदम पीछे आकर भी सत्ता बनाने को तैयार है। भाजपा के नेताओं ने यह बात स्वीकार की है। वहीं कांग्रेस शिवसेना (यूबीटी) के लिए अहम पद छोडने को राजी हो गयी है। बावजूद सत्ता की पूरी मलाई से वंचित रहने का दर्द झेलने को शिवसेना तैयार नजर नहीं आ रही है।
भाजपा आघाडी के पास 24 तो कांग्रेस आघाडी के पास 30 पार्षदों का बल है। किसी एक दल के पास पूर्ण बहुमत नहीं है। वहीं यूबीटी के 6, वंचित 2, निर्दलीय 2 ऐसे कुल 10 पार्षद है। बहुमत के लिए जो जादुई आंकडा है वह 34 का है।
एक ओर कांग्रेस के सत्ता बनाने का दावा किया जा रहा तो दूसरी ओर भाजपा के दावे के बाद आपसी फूट की राजनीति गरमा गई है। बताया जाता है कि भाजपा के पार्षद शहर में ही है। परंतु निर्दलीयों के साथ अन्य दलों के पार्षद अज्ञात स्थल पर है।
यह भी पढ़ें – महापौर के पदग्रहण में गडकरी-फडणवीस नहीं होंगे शामिल, पदों के बंटवारे पर छिड़ा संग्राम, BJP में मची उथल-पुथल!
इनमें से कुछ पार्षद मंगलवार को गायब रह सकते है। यह भी है कि कम संख्याबल में महापौर और उपमहापौर को अपनी योजना से बनाना रणनीतिकारों को आसान होगा। अब इस रहस्य से मंगलवार को ही पर्दा उठेगा। बहरहाल इस रहस्य को लेकर शहर में चर्चाओं का बाजार गर्म है।
चुनाव में लोगों से वोट के लिए गुहार लगानेवाले लोग अब पार्षद बन कर अज्ञात स्थलों पर आलीशान होटलों में मजे कर रहे है। इस बात को लेकर शहर के मतदाताओं में तीव्र नाराजगी है। एक तो मनपा के चुनाव करीब सवा दो साल के बाद हुए।
इन दिनों में विकास का बंटाढार हुआ। लोगों के सार्वजनिक विकास के काम नहीं हो पाए। आज भी हालात कुछ बदले नहीं है। ऐसे में जल्द जनसेवा की बजाए इधर उधर दौडते भागते पार्षदों की मौज पर मतदाताओं ने कडी नाराजगी व्यक्त की है।






