
स्लिप डिस्क (सौ.सोशल मीडिया)
Slip Disc Ayurveda: आजकल भागदौड़ भरी जिंदगी में सेहत का सही तरह से ख्याल रख पाना आसान नहीं होता है। जहां पर बदलते समय के साथ लोगों को एक ही जीवनशैली रहने की वजह से पीठ दर्द की शिकायत हो जाती है। इस पीठ दर्द की शिकायत इतनी ज्यादा बढ़ती है कि, स्लिप डिस्क की समस्या भी हो जाती है। स्लिप डिस्क की समस्या से तुरंत इलाज करना आवश्यक होता है वहीं पर आयुर्वेद में इसके पीछे के कारण और उपायों के बारे में विस्तार से बताया गया है।
यहां पर स्लिप डिस्क की समस्या में शरीर की हड्डियों को नुकसान पहुंचता है और हमारी रीढ़ की हड्डियों के बीच की इंटरवर्टिब्रल डिस्क कभी-कभी अपनी जगह से खिसक जाती है या दब जाती है, जिससे नसों पर दबाव पड़ता है। इसका असर पीठ और पैरों में दर्द, झनझनाहट या कमजोरी के रूप में दिखता है। इसे लेकर आयुर्वेद में बताया गया है इसके अनुसार कटिग्रह या कटिशूल जैसी अवस्थाओं से जोड़ता है और इसके कारणों को शरीर की दोष संरचना से समझता है।
उम्र बढ़ने के साथ डिस्क का प्राकृतिक रूप से कमजोर होना, मोटापा और शरीर पर अतिरिक्त भार, चोट या झटका और मांसपेशियों की कमजोरी जैसी बातें इसे और बढ़ा देती हैं।
यहां पर आयुर्वेद में स्लिप डिस्क की समस्या तो वात दोष की समस्या से जोड़कर देखा गया है। इसमें जब शरीर में वात दोष का स्तर बढ़ जाता है, तो शरीर की लचक और सहनशीलता कम हो जाती है। इसी वजह से रीढ़ की हड्डियां और डिस्क कमजोर हो जाती हैं। इसके अन्य कहा गया है कि, वात दोष को सुधारने के लिए केवल दर्द कम करना ही नहीं, बल्कि शरीर की लचीलापन और मांसपेशियों को मजबूत करना भी जरूरी है।
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यहां पर स्लिप डिस्क की समस्या से बचाव के लिए आपको कुछ उपाय अपनाने चाहिए, जो इस प्रकार है…
लंबे समय तक बैठने से बचें और हर 30-40 मिनट पर थोड़ा चलें। नियमित हल्का व्यायाम, स्ट्रेचिंग, योग और प्राणायाम जैसे भुजंगासन, मकरासन और शवासन रीढ़ को मजबूत और स्थिर रखते हैं। आयुर्वेदिक तेल मालिश और गर्म सिकाई भी मांसपेशियों को आराम देती हैं और नसों पर दबाव कम करती हैं।
आईएएनएस के अनुसार






