नागपुर में विकास के दावों की खुली पोल: 108 मिमी बारिश ने उजागर की बुनियादी ढांचे की नाकामी

Nagpur Rain Crisis: नागपुर में 108 मिमी बारिश ने विकास और ड्रेनेज व्यवस्था के दावों की पोल खोल दी। जलभराव, नुकसान और जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति से नागरिकों में भारी नाराजगी है।
Claims of development in Nagpur exposed: 108 mm of rain reveals infrastructure failure.
नागपुर बारिश, जलभराव(सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो)
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Nagpur Infrastructure Failure Rain: नागपुर शहर में नेता का दावा है, शहर में 1 लाख करोड़ रुपये का विकास कार्य हुआ है। अधिकारी का यह दावा होता है कि इंफ्रास्ट्रक्चर शानदार बन गया है। सिंटी देश के अव्वल स्थान पर काबिज हो चुका है। बारिश की तैयारी पूर्ण कर ली गई हैं। दौरे, समीक्षा बैठक, आदेश-निर्देश के फोटो खिंचवाये जाते हैं।

वाहवाही लूटी जाती है परंतु एक सच्च्चाई भी है। जी हां, सच्चाई यह है कि नागपुर 108 एमएम बारिश भी नहीं सह सकता। 200, 300 एमएम बारिश में हस्र क्या होगा, इसका अंदाज सिर्फ और सिर्फ भुक्तभोगी ही लगा सकते हैं।

दर्द इन्हें होता है और दर्द झलकता भी है। नेताओं का क्या, दावा करते हैं और भूल जाते हैं। बुनियादी ढांचे की पोल खुल जाती है लेकिन अधिकारी और नेता कोई भी बोलने को तैयार नहीं होता।

बारिश में डूबा शहर, जनप्रतिनिधि रहे 'आउट ऑफ कवरेज'

लाखों का नुकसान होने के बाद हजारों का 'झुनझुना' थमा दिया जाता है। सरकारी आदेश पानी में 'बह' जाते हैं। करोड़ों खर्च केवल कागजों तक सिमट जाता है लेकिन किसी भी ठेकेदार पर 'गाज' नहीं गिरती है क्योंकि सभी उनके 'अपने' होते हैं।

जनता को पानी के बीच लाचार छोड़ दिया जाता है। इस बार दुख ज्यादा इसलिए है कि हर क्षेत्र में नगरसेवक हैं। सत्ता पक्ष के हों या फिर विपक्ष के, अधिकांश नगरसेवक 'आउट ऑफ कवरेज' दिखाई दिए।

जनता घरों में पानी प्रवेश देखते रह गई और आंसू बहाते रह गई लेकिन किसी के कानों में जूं तक नहीं रेंगी, स्टैंडिंग कमेटी चेयरमैन का क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ लेकिन उन्हें भी शायद अफसोस नहीं होगा क्योंकि ऐसा पहली बार उनके 'राज' में हुआ है। आने वाले वर्षों में और भी भयावह स्थिति बनेगी क्योंकि निर्माण कार्य बेतरतीब तरीके से अब भी जारी हैं लेकिन आकाओं के आगे सभी 'मौन' साधे हुए हैं।

शहर जलमग्न, नगरसेवक 'लापता'

दुख तब ज्यादा बढ़ गया जब नगरसेवक अपने-अपने क्षेत्रों में नहीं दिखे। शहर के विभिन्न क्षेत्रों के लोगों का कहना है कि ये संपर्क करने का प्रयास करते रहे लेकिन नगरसेवक 'संपर्क में नहीं आ पा रहे थे।

कोई कह रहा था कि दूसरे क्षेत्र में है तो कोई कह रहा था निकल पाने में दिक्कत है क्योंकि उसके आपसास ही पानी का बहाव काफी तेज है। महापौर और आयुक्त एक-दो क्षेत्रों का दौरा करते हुए देखे गए लेकिन इससे कोई स्थायी समाधान निकलने वाला नहीं है। अब पब्लिक को उम्मीद करना भी बेमानी लगने लगा है क्योंकि हर वर्ष उन्हीं स्थानों पर वही पुरानी कहानी दोहराई जा रही है।

फिर होगी बैठक, नतीजा सिफर

पब्लिक का कहना है कि बाढ़ आई और चली गई, भगवान न करें, इस वर्ष फिर दोबारा ऐसी नौबत आए। उनका कहना है कि बाढ़ के बहाने पुनः ठेके निकाले जाएंगे और फिर ठेकेदार काम करेगा, जनता के करोड़ों डूब जाएंगे लेकिन राहत किसी को नहीं मिलेगी। ऑफिसर और नेता अपनी 'रणनीति' में मशगूल रहेंगे। दिखावे की मीटिंग खूब होंगी और नतीजा सिफर' होगा,

खुले गड्ढे, सीवर के पाइप बने खलनायक

मंगलवार की बारिश के दौरान जलजमाव के लिए कई स्थानों पर अधूरे कार्य खलनायक बने। पानी निकासी का कोई मार्ग नहीं रहने से छत्रपति चौक से लेकर प्रतापनगर, स्वावलंबीनगर तक जलजमाव देखने को मिला।

लोग काफी पहले से मांग कर रहे थे कि कार्य जल्दी खत्म करो लेकिन नागपुर मनपा प्रशासन की कानों पर जू तक नहीं रेंगी, इसलिए अब लोगों की उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है।

आरयूबी पर करोड़ों खर्च, राहत नहीं

इस बार दावा किया गया था कि नरेंद्रनगर सहित कई आरयूबी में बड़े फ्माने पर सुधार कार्य किए गए हैं। पंप लगाए गए है। मार्ग बनाया गया है। इससे पानी का जमाव नहीं होगा लेकिन 180 एमएम पानी ने ही पोल खोल दी।

यह भी संकेत दे दिया कि पैसे बर्बाद हो गए। आने वाले दिन इससे भी खतरनाक हालत बन सकते हैं। नरेंद्रनगर में ही मनपा ने 8 करोड़ बहा दिए। उप्पलवाडी, नरेंद्रनगर, गड्डीगोदाम, लोहापुल, मनीषनगर और बिनाकी मंगलवारी कोई भी आरयूबी सुरक्षित नहीं है।

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