CWG 2026: दिलीप गावित का गोल्डन रन, रिकॉर्ड टाइम के साथ भारत को पैरा एथलेटिक्स में दिलाया स्वर्ण पदक

Dilip Gavit Record: भारतीय रनर दिलीप महादु गावित ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पुरुषों की 100 मीटर T47 स्पर्धा में 10.71 सेकंड का नया गेम्स रिकॉर्ड बनाते हुए ऐतिहासिक स्वर्ण पदक हासिल किया है।
CWG 2026: Dilip Gavit's golden run; wins gold for India in para-athletics with a record time.
दिलीप महादु गावित (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Dilip Gavit Wins Gold Medal At Commonwealth Games 2026: दिलीप महादु गावित ने ग्लासगो 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में पुरुषों की 100 मीटर T47 पैरा-एथलेटिक्स इवेंट में शानदार गोल्ड मेडल जीतकर खेल के इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया है। 23 साल के इस स्प्रिंटर ने 10.71 सेकंड का रिकॉर्ड-तोड़ समय निकालते हुए न सिर्फ नया कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड बनाया, बल्कि गेम्स के इतिहास में एथलेटिक्स में गोल्ड मेडल जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष पैरा-एथलीट भी बने।

स्कॉटस्टन स्टेडियम में हुए फाइनल में शुरुआती बढ़त मोहम्मद बेसिल और इंग्लैंड के केविन सैंटोस के पास थी। शुरुआत में दिलीप गावित पांचवें स्थान पर चल रहे थे, लेकिन आखिरी 30 मीटर में उन्होंने जबरदस्त रफ्तार पकड़ी और सभी धावकों को पीछे छोड़ते हुए 10.71 सेकेंड के समय के साथ फिनिश लाइन पार की। यह प्रदर्शन न सिर्फ उन्हें गोल्ड दिलाने वाला साबित हुआ, बल्कि इस स्पर्धा का नया कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड भी बन गया।

दिलीप गावित ने क्या कहा?

स्वर्ण पदक जीतने के बाद दिलीप गावित ने कहा कि उनकी शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही थी, लेकिन उन्होंने धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ी और अंत में जीत हासिल की। उन्होंने कहा, 'मेरी शुरुआत थोड़ी धीमी थी, लेकिन बाद में मैंने गति बढ़ाई और गोल्ड जीतकर बहुत अच्छा महसूस हो रहा है।' ये फाइनल बारिश से भीगे ट्रैक पर खेला गया, जिससे खिलाड़ियों के लिए चुनौती और बढ़ गई थी।

दिलीप ने साफ किया कि उनका लक्ष्य सिर्फ कॉमनवेल्थ गेम्स तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा, 'मैं अभी नौकरी के बारे में नहीं सोच रहा हूं, मेरा लक्ष्य सिर्फ पदक जीतना है। मुझे भरोसा है कि जापान में होने वाले पैरा एशियन गेम्स और फिर लॉस एंजेलिस पैरालंपिक में मैं और बेहतर प्रदर्शन करूंगा।'

कैसा रहा दिलीप गावित का जीवन?

महाराष्ट्र के नासिक के रहने वाले 23 वर्षीय दिलीप गावित की सफलता संघर्ष और जज्बे की मिसाल है। बचपन में पेड़ से गिरने के बाद गंभीर चोट के कारण उनका दायां हाथ काटना पड़ा था। शारीरिक चुनौती के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और स्थानीय कोच के मार्गदर्शन में एथलेटिक्स की शुरुआत की। 2019 में उन्होंने खेलो इंडिया गेम्स में महाराष्ट्र का प्रतिनिधित्व किया और यहीं से उनके करियर को नई दिशा मिली।

सीमित संसाधनों के बीच उनके लिए एथलेटिक्स तक पहुंचना आसान नहीं था। उनके कोच वैजयंथ काले ने स्कूल में उनकी प्रतिभा को पहचाना और उनके माता-पिता को प्रशिक्षण के लिए तैयार किया। कोच काले ने बताया, 'दिलीप को पैरा प्रतियोगिताओं के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। वो सामान्य एथलीटों के साथ प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते थे और वहां भी अच्छा प्रदर्शन करते थे। ग्रामीण क्षेत्रों में सुविधाओं की कमी सबसे बड़ी चुनौती थी।'

कब दिया था अंतरराष्ट्रीय डेब्यू

दिलीप ने पहली बड़ी अंतरराष्ट्रीय सफलता 2023 के हांगझोउ पैरा एशियन गेम्स में हासिल की थी, जहां उन्होंने 400 मीटर T47 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर सबका ध्यान खींचा। इसके बाद उन्होंने 400 मीटर छोड़कर 100 मीटर स्प्रिंट पर फोकस करने का फैसला किया। उनका यह फैसला सही साबित हुआ और अब कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने अपने करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में एक और अध्याय जोड़ दिया।

खेलो इंडिया यूथ गेम्स में भी दिखाया दम

पैरा एथलेटिक्स में आने से पहले दिलीप ने पुणे में आयोजित खेलो इंडिया यूथ गेम्स और अंडर-18 स्तर की प्रतियोगिताओं में भी पदक जीते थे। बाद में नासिक में बेहतर प्रशिक्षण मिलने के बाद उन्होंने अपने खेल को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और अब कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर भारतीय पैरा एथलेटिक्स के इतिहास में अपना नाम दर्ज करा दिया।

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