दूध और छुहारे का सेवन करता हुआ व्यक्ति (सौ. एआई)
Milk with Dates Benefits: भागदौड़ भरी जिंदगी, अधूरा खानपान और तनाव शरीर को अंदर से खोखला कर रहा है। अगर आप भी हर वक्त थका हुआ महसूस करते हैं तो आयुर्वेद का दूध-छुहारा नुस्खा आपके लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है। यह न सिर्फ स्टेमिना बढ़ाता है बल्कि आपकी इम्यूनिटी को भी नई ताकत देता है।
आज की आधुनिक जीवनशैली में सही समय पर खाना न खाना और नींद की कमी एक आम समस्या बन गई है। इसका सीधा असर हमारे शरीर पर पड़ता है जिससे कम उम्र में ही लोग थकान, कमजोरी और कम इम्यूनिटी का शिकार हो रहे हैं। बाजार में मिलने वाले महंगे एनर्जी ड्रिंक्स के बजाय आयुर्वेद एक ऐसा समाधान देता है जो सस्ता भी है और सदियों से आजमाया हुआ भी।
आयुर्वेद का बल्य मंत्र आयुर्वेद में दूध और छुहारे के मिश्रण को बल्य कहा गया है। इसका अर्थ है ऐसा आहार जो शरीर को बल प्रदान करे और ओज बढ़ाए। छुहारा स्वाद में मीठा और तासीर में गर्म होता है जबकि दूध शीतल और पोषक तत्वों का भंडार है। जब इन दोनों को साथ उबाला जाता है तो यह शरीर की सातों धातुओं को गहराई से पोषण देता है।
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दूध और छुहारे (सौ. फ्रीपिक)
स्टैमिना और वजन: यह मिश्रण दुबले-पतले लोगों के लिए वरदान है। यह स्वस्थ तरीके से वजन बढ़ाने और शारीरिक स्टेमिना को दोगुना करने में मदद करता है।
पुरुषों और महिलाओं के लिए खास: पुरुषों में यह शक्ति और पौरुष क्षमता बढ़ाता है वहीं महिलाओं में एनीमिया (खून की कमी) और शारीरिक कमजोरी को दूर करने में सहायक है।
सर्दियों का सुरक्षा कवच: ठंड के मौसम में यह जोड़ों के दर्द, जकड़न और सूखी खांसी से बचाव करता है। यह शरीर को अंदरूनी गर्मी प्रदान करता है।
मानसिक शांति और त्वचा: नियमित सेवन से तनाव कम होता है और नींद गहरी आती है। साथ ही यह त्वचा के रूखेपन को खत्म कर चेहरे पर प्राकृतिक चमक लाता है।
इस्तेमाल का सही तरीका: इसे तैयार करना बेहद सरल है। 3 से 4 छुहारे के बीज निकालकर उन्हें एक गिलास दूध में डालें। धीमी आंच पर तब तक उबालें जब तक दूध थोड़ा गाढ़ा न हो जाए और छुहारे नरम न हो जाएं। रात को सोने से पहले इस गुनगुने दूध को पिएं और छुहारे को चबाकर खाएं।
छुहारे में प्राकृतिक शर्करा अधिक होती है इसलिए डायबिटीज के रोगियों को इसका सेवन करने से पहले अपने डॉक्टर या आयुर्वेदिक विशेषज्ञ से सलाह जरूर लेनी चाहिए।