होली का त्योहार खुशियों के साथ-साथ ढेर सारे पकवान और रंगों का मेल है। लेकिन अधिक तला-भुना खाना और केमिकल युक्त रंग शरीर में विरुद्ध आहार और टॉक्सिन्स की मात्रा बढ़ा देते हैं। आयुर्वेद के अनुसार होली के अगले दिन शरीर को डिटॉक्स करना बेहद जरूरी है ताकि आप दोबारा ऊर्जावान महसूस कर सकें।
नीम से करें रक्त और पेट की सफाई: होली के बाद शरीर की अंदरूनी सफाई के लिए नीम सबसे बेहतरीन औषधि है। सुबह की शुरुआत नीम की दातुन से करें। दातुन करते समय जो रस अंदर जाता है वह आंतों के हानिकारक बैक्टीरिया को खत्म करता है और रक्त को शुद्ध करता है। यदि दातुन उपलब्ध न हो तो गुनगुने पानी में आधा चम्मच नीम पाउडर मिलाकर पिएं। यह पेट को पूरी तरह साफ करने की क्षमता रखता है।
घास पर पैदल चलें और सुस्ती भगाएं: ज्यादा मीठा और तैलीय भोजन करने के बाद शरीर में भारीपन और नींद आने लगती है। इस सुस्ती को दूर करने के लिए सुबह की ओस वाली घास पर नंगे पैर कम से कम 15-20 मिनट टहलें। यह अर्थिंग प्रक्रिया शरीर में नई ऊर्जा का संचार करती है और तनाव कम करती है। होली के बाद की सैर आपके मेटाबॉलिज्म को दोबारा सक्रिय कर देगी।
हल्दी और नारियल पानी का डिटॉक्स ड्रिंक: होली खेलते समय अक्सर सूक्ष्म मात्रा में रंग मुंह या नाक के जरिए शरीर के अंदर चले जाते हैं। ये केमिकल अंगों के लिए घातक हो सकते हैं। इससे बचने के लिए दिनभर में कम से कम एक बार हल्दी वाला पानी और दो बार नारियल पानी जरूर पिएं। हल्दी एक नेचुरल एंटीबायोटिक है जो अंदरूनी सूजन कम करती है जबकि नारियल पानी शरीर को हाइड्रेट कर अंगों की गंदगी बाहर निकालने में मदद करता है।
हल्का आहार और तेल मालिश: पाचन तंत्र को आराम देने के लिए होली के अगले दिन अनाज के बजाय फलों का सेवन करें। नाश्ते में मौसमी फल खाने से शरीर को पोषण मिलता है और अंगों पर दबाव नहीं पड़ता। अंत में, रात को सोने से पहले पूरे शरीर पर नारियल तेल से मालिश (अभ्यंग) करें। रंगों से आई त्वचा की खुजली और रूखापन दूर होगा रक्त संचार बढ़ेगा और आपको गहरी नींद आएगी जिससे शरीर खुद को तेजी से रिकवर कर पाएगा।