रोजाना आदत में शामिल करें ‘अर्द्धचक्रासन’ का अभ्यास, रीढ़ की हड्डी बनेगी लचीली और मजबूत
Ardha Chakrasana Benefits: आजकल ऑफिस में घंटों बैठकर काम करने की आदत से रीढ़ की हड्डी और कमर दर्द की समस्या बढ़ी है। इस समस्याओं के लिए आज हम 'अर्द्धचक्रासन' योगासन के बारे में जानकारी दे रहे है।
- Written By: दीपिका पाल
अर्धचक्रासन (सौ.सोशल मीडिया)
Benefits of Ardhachakrasan: शरीर की मजबूती के लिए सही खानपान और भरपूर नींद के साथ एक्सरसाइज का फॉर्मूला अपनाना भी जरूरी होता है। व्यस्त जिंदगी से हर कोई एक्सरसाइज के लिए वक्त नहीं निकाल पाते है और कई गंभीर बीमारियों के शिकार हो जाते है। इन सभी स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज के लिए योग सबसे जरूरी एक्सरसाइज में से एक है। यहां पर योग हमारे भारतीय परंपरा का अभिन्न अंग है, जो शरीर, मन और आत्मा को संतुलित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। आजकल ऑफिस में घंटों बैठकर काम करने की आदत से रीढ़ की हड्डी और कमर दर्द की समस्या बढ़ी है। इस समस्याओं के लिए आज हम ‘अर्द्धचक्रासन’ योगासन के बारे में जानकारी दे रहे है जिसे नियमित करने से फायदे मिलते है।
जानिए क्यों कहते है ‘अर्द्धचक्रासन’
योगासन में शामिल ‘अर्द्धचक्रासन’ एक प्रभावी योगासन में से एक है जो शरीर को पूरी तरह से मजबूती प्रदान करने का काम करता है। यहां पर बात करें तो, ‘अर्द्धचक्रासन’ का अर्थ है ‘आधा चक्र’। यानि इस आसन को करने के दौरान शरीर की आकृति पीछे की ओर झुकते हुए अर्धचंद्र या अर्धचक्र के समान बन जाती है। यही कारण है कि इसे ‘अर्द्धचक्रासन’ कहा जाता है। इस आसन का आप अगर नियमित अभ्यास करते है तो, शरीर की पोजिशन आधे पहिए की तरह बन जाती है। इसमें यह तरीका रीढ़ को लचीला बनाती है, पेट और जांघों की चर्बी कम करती है, फेफड़ों की क्षमता बढ़ाती है और सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस जैसी शारीरिक समस्याओं से निजात दिलाने में मदद करती है। इसके अलावा जो व्यक्ति हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियों से जूझ रहे है तो वे इस योगासन को नहीं करें।
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जानिए इस योगासन को करने का तरीका
इसको करने के लिए सबसे पहले योगा मैट पर सीधे खड़े हो जाएं, पैरों में थोड़ा गैप रखते हुए हाथों को कमर पर रखें। फिर सांस लें, धीरे-धीरे गहरी सांस लेते हुए दोनों हाथों को कमर पर रखें। सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे कमर से पीछे की ओर झुकें। ध्यान रखें कि घुटने सीधे रहें और सिर पीछे की ओर झुके। इस स्थिति में 10-15 सेकंड तक रुकें, सामान्य सांस लेते रहें। फिर धीरे-धीरे सांस लेते हुए प्रारंभिक स्थिति में लौट आएं। इसे 3-5 बार दोहराना चाहिए।इस योग को करते समय कुछ सावधानी बरतनी चाहिए या फिर शुरुआत में किसी एक्सपर्ट की सलाह में ही करें। वहीं पर यह योगासन गर्भवती महिलाओं को नहीं करना चाहिए। ध्यान रखें कि, योगासन ने पहले हल्का-फुल्का वार्म अप अच्छा रहता है।
आईएएनएस के अनुसार
