नींद की कमी (सौ.सोशल मीडिया)
Lake of Sleep Problem: आजकल हर किसी की जिंदगी व्यस्त सी हो गई है। इस बीच सेहत के लिए समय निकाल पाना हर किसी के लिए आसान नहीं होता है। मौजूदा समय में सेहत अच्छी रखने के लिए जिस कारक की आवश्यकता होती है वह भरपूर नींद। जो आज के समय में कोई भी व्यक्ति 8 घंटे की भरपूर नींद पूरी नहीं ले पाता है। नींद की कमी का सीधा असर हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। हाल ही में एक स्टडी में खुलासा हुआ है कि, नींद की कमी अब धीरे-धीरे एक “साइलेंट हेल्थ क्राइसिस” का कारण बनती जा रही है।
नींद को आराम की आदत माना जाता है लेकिन आज यह कारक ही लोगों को पूरी तरह नहीं मिल पाता है। दिल की सेहत, इम्यूनिटी सिस्टम और मानसिक स्वास्थ्य के लिए नींद जिम्मेदार होती है। विस्तृत रूप से जानिए स्टडी।
नींद की कमी को लेकर अमेरिका के सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल (सीडीसी) ने इस समस्या को एक सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या करार दिया है। रिपोर्ट की मानें तो, लगभग हर तीन में से एक वयस्क रोजाना पर्याप्त नींद नहीं ले पा रहा। भारत में किए गए एक बड़े सर्वे में पाया गया कि युवा वर्ग में यह समस्या सबसे अधिक बढ़ी है, जहां रात देर तक फोन का इस्तेमाल, ओवरवर्क, तनाव और अनियमित दिनचर्या नींद का सबसे बड़ा दुश्मन बन चुके हैं। नींद की कमी के लिए इन कारकों का होना जिम्मेदार होता है। कम नींद की वजह से दिमाग पर इसका बुरा असर पड़ता है।
एक अन्य कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी, बर्कले की स्टडी में बताया गया है कि, अगर रात की नींद पूरी नहीं हो पाती है तो खराब नींद की वजह से याददाश्त, निर्णय लेने की क्षमता और सीखने की गति को 40 प्रतिशत तक कम हो जाती है। वैज्ञानिक यह भी बताते हैं कि कम नींद में मस्तिष्क के वह हिस्से सक्रिय हो जाते हैं जो चिंता और डर को बढ़ाते हैं, जिससे व्यक्ति छोटी बातों में भी तनाव महसूस करने लगता है। यही वजह है कि नींद की कमी वाले लोगों में एंग्जाइटी और डिप्रेशन की आशंका दुगनी पाई गई है।
नींद की कमी से दिल और शरीर पर इसके गंभीर परिणाम देखने के लिए मिलते है। इसे लेकर हार्वर्ड मेडिकल स्कूल की रिसर्च कहती है कि जो लोग 5 घंटे से कम सोते है उन्हें दिल की बीमारी का खतरा सताता है। नींद की कमी की वजह से हार्च अटैक और स्ट्रोक का खतरा अनुमानों के मुताबिक, 30–40 फीसदी बढ़ जाता है। अगर आप नींद की कमी से जूझ रहे है तो, शरीर में सूजन की समस्या बढ़ जाती है। इसके अलावा ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल गड़बड़ा सकते हैं। कई डॉक्टर बताते हैं कि नींद की कमी मोटापे को भी बढ़ाती है, क्योंकि देर से सोने पर भूख बढ़ाने वाला हार्मोन “घ्रेलिन” बढ़ जाता है और शरीर को गलती से कैलोरी की जरूरत महसूस होने लगती है। यही कारण है कि कम सोने वाले लोग रात में जंक फूड ज्यादा खाते हैं।
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नींद की कमी की समस्या अधिकतर युवाओं और टीनएजर्स में देखने के लिए मिलती है। इस बीच द लैंसेट में प्रकाशित एक अध्ययन ने बताया कि किशोरों में सोशल मीडिया, रात देर तक सक्रिय रहना और स्क्रीन की नीली रोशनी नींद को 60–90 मिनट तक कम कर देती है। भारत में किए गए एक हालिया अध्ययन में पाया गया कि 70 प्रतिशत से ज्यादा छात्र देर रात तक मोबाइल का उपयोग करते हैं, जिससे उनके नींद चक्र पर गंभीर असर पड़ता है। यह आदत आगे चलकर मानसिक थकान, चिड़चिड़ेपन, कम एकाग्रता और अकादमिक प्रदर्शन में गिरावट का कारण बनती है।
आईएएनएस के अनुसार