Hormonal Health: 8 साल में प्यूबर्टी और 15 में डायबिटीज! भारतीय लड़कियों में क्यों बढ़ रहा है हार्मोनल संकट?
Early Puberty: बदलती लाइफ स्टाइल के कारण महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन, लड़कियों में समय से पहले यौवन, महिलाओं में पीसीओएस की समस्या आम हो गई है। क्या हैं इसके कारण और उपाय।
- Written By: रीता राय सागर
हार्मोनल बदलाव (फोटो.सोशल मीडिया)
Early Puberty in Girls: मानव शरीर की मेकेनिज्म एक जटिल प्रक्रिया है, जिसमें हार्मोन एक केमिकल मैसेंजर की तह काम करता है। हालांकि यह बहुत कम मात्रा में बनते हैं, लेकिन हमारे शरीर में खून के जरिए शरीर के विभिन्न अंगों तक पहुंचकर लगभग हर शारीरिक गतिविधि को नियंत्रित करते हैं।
इन हार्मोन की शक्ति जितनी अधिक होती है, उतनी ही संवेदनशील भी होती है। हार्मोन के स्तर में बहुत छोटा-सा बदलाव भी हार्मोनल असंतुलन का कारण बन सकता है, जिसका असर शारीरिक विकास से लेकर मेंटल और इमोशनल हेल्थ तक पर पड़ता है।
एंडोक्राइन सिस्टम की कार्यप्रणाली और आधुनिक समय में हार्मोन से संबंधित समस्याएं तेजी से बढ़ रही है, आइए जानते हैं इसके कारण और इससे बचने के उपाय।
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जीवन के हर चरण में हार्मोन की भूमिका
जन्म से लेकर वयस्क होने तक हार्मोन हमारे शरीर के विकास का मार्गदर्शन करते हैं। बचपन, टीनएज और फर्टिलिटी की उम्र तक शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिनकी भूमिका हर चरण में अलग-अलग होते हैं।
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बचपन
इस दौरान हार्मोन शारीरिक वृद्धि और मस्तिष्क के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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किशोरावस्था
हार्मोन ही प्यूबर्टी की शुरुआत करते हैं और बच्चों को वयस्कता की ओर ले जाते हैं।
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प्रजनन आयु
इस उम्र में हार्मोन केवल प्रजनन क्षमता ही नहीं, बल्कि हड्डियों की मजबूती, मांसपेशियों के विकास और त्वचा व बालों के स्वास्थ्य को भी बनाए रखते हैं।
हार्मोनल बदलाव (फोटो.सोशल मीडिया)
आधुनिक जीवनशैली और बढ़ता हार्मोनल असंतुलन
आज की बदलती जीवनशैली के कारण हार्मोनल समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। एंडोक्राइन विशेषज्ञों के अनुसार, अब लड़कियों में पहले की तुलना में बहुत कम उम्र में यौवन की शुरुआत हो रही है। आज 8 साल की उम्र में ही कई लड़कियों में स्तन का विकास और पीरियड्स शुरू होने लगे हैं। दूसरी ओर, कुछ बच्चों में यौवन देर से आने की समस्या भी देखी जा रही है। इन दोनों स्थितियों के पीछे कई कारण हो सकते हैं।
इसके प्रमुख कारण
- शारीरिक गतिविधियों की कमी: सुस्त जीवनशैली शरीर के मेटाबॉलिज्म और हार्मोनल संतुलन को प्रभावित करती है। एक्टिव लाइफ स्टाइल से कई बीमारियों से बचा जा सकता है।
- मोटापा: शरीर में अतिरिक्त चर्बी हार्मोन के संतुलन को बिगाड़ सकती है, जिससे समय से पहले यौवन शुरू हो सकता है।
- खानपान: जंक फूड और अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड में मौजूद प्रिजर्वेटिव्स शरीर की नेचुरल हार्मोनल प्रक्रिया में बाधा डाल सकते हैं। इसलिए प्री टीनएज की उम्र की बच्चियों के खानपान में आयरन रिच फूड के साथ पोषण युक्त थाली शामिल होनी चाहिए।
हर उम्र में बढ़ रही हैं हार्मोनल समस्याएं
अब हार्मोन असंतुलन केवल मध्यम आयु की समस्या नहीं रह गया है। यह किसी भी उम्र में हो सकता है। प्रजनन हार्मोन के अलावा इंसुलिन, जो ब्लड शुगर को नियंत्रित करता है और स्ट्रेस हार्मोन- कॉर्टिसोल, में भी कम उम्र में असंतुलन देखा जा रहा है।
तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्याएं
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PCOS और पीरियड्स से जुड़ी समस्याएं
पीरियड्स किसी महिला का स्वास्थ्य संबंधी रिपोर्ट कार्ड होता है, जो प्रत्येक माह बताता है कि महिला का इंटरनल सिस्टम कैसे फंक्शन कर रहा है। किशोरियों और 20-30 वर्ष की महिलाओं में पीसीओएस और दर्दनाक पीरियड्स की समस्या तेजी से बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका बड़ा कारण खराब जीवनशैली है।
हार्मोनल बदलाव (फोटो.सोशल मीडिया)
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टाइप-2 डायबिटीज
पहले 40 साल से अधिक उम्र के लोगों में टाइप-2 डायबिटीज के मामले पाए जाते थे, लेकिन अब यह 15 साल के बच्चों में भी देखने को मिल रही है। इसके पीछे मोटापा और जेनेटिक कारण हो सकते हैं।
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थायरॉयड की समस्या
आजकल छोटे बच्चों में भी थायरॉयड संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं, जिससे उनकी ऊर्जा, शारीरिक विकास और वृद्धि प्रभावित हो सकती है।
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हार्मोनल असंतुलन के संकेत
चूंकि हार्मोन शरीर के कई अंगों को प्रभावित करते हैं, इसलिए इसके लक्षण भी अलग-अलग हो सकते हैं। यदि आपको नीचे दिए गए लक्षण दिखाई दें, तो एंडोक्राइन विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।
- बिना किसी कारण वजन बढ़ना या घटना
- बार-बार मूड बदलना
- लगातार थकान और कमजोरी महसूस होना
- मासिक धर्म का अनियमित होना
- नींद न आना
- फर्टिलिटी से जुड़ी समस्या
