समय पर वाहन मिलता तो बच जाती जान: परिजनों का आरोप-सरकारी लापरवाही की भेंट चढ़ी गर्भवती अनीता और उसका बच्चा
Tribal Healthcare Crisis: अकोला के आदिवासी क्षेत्र में समय पर एंबुलेंस और इलाज नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए परिजनों ने गर्भवती महिला और उसके गर्भस्थ शिशु की मौत पर स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाए।
- Written By: अंकिता पटेल
अकोला के आदिवासी क्षेत्र में एंबुलेंस (सोर्स- सोशल मीडिया)
Akola Pregnant Woman Healthcare Negligence: अकोला जिले के सतपुड़ा के आदिवासी क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाल स्थिति एक बार फिर सामने आई है। अकोट तहसील के धारगढ़-धारूल आदिवासी गांव की 21 वर्षीय गर्भवती महिला अनीता बेठेकर और उसके गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई। गर्भावस्था के सातवें महीने में गुरुवार सुबह अनीता को प्रसव पीड़ा शुरू हुई।
परिजनों ने निजी वाहन से उन्हें अकोट के ग्रामीण अस्पताल पहुंचाया, लेकिन तब तक गर्भ में ही शिशु की मौत हो चुकी थी। उपचार के दौरान महिला ने भी दम तोड़ दिया। घटना के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यदि समय पर एंबुलेंस उपलब्ध हो जाती और उचित चिकित्सा सुविधा मिलती, तो मां और बच्चे दोनों की जान बचाई जा सकती थी।
पीएचसी में वर्षों से रिक्त हैं पद
ग्रामीणों के अनुसार, पोपटखेड स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र 26 आदिवासी गांवों सहित 33 गांवों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करता है। इस केंद्र के अंतर्गत चार उपकेंद्र हैं, लेकिन पूरे क्षेत्र के लिए केवल एक ही एंबुलेंस उपलब्ध है। वहीं, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कई महत्वपूर्ण पद वर्षों से रिक्त पड़े हैं. इस संबंध में पहले भी शिकायत प्राप्त हो चुकी हैं, लेकिन अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
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रिक्त पद तत्काल भरे जाएं
आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पोपटखेड प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के रिक्त पद तत्काल भरे जाएं। साथ ही ग्रामीण एवं आदिवासी इलाकों में समय पर उपचार और एंबुलेंस की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
– पोपटखेड अध्यक्ष, वीर एकलव्य आपत्कालीन बचाव पथक, पांडुरंग तायडे
अचानक बिगड़ी तबीयत
घटना की जानकारी मिलते ही मैंने धारूल गांव की आशा कार्यकर्ता से संपर्क किया। गर्भवती महिला सुबह 9 बजे तक पूरी तरह सामान्य थी। उन्होंने चाय-नाश्ता भी किया था। अचानक तबीयत बिगड़ने पर परिजन उन्हें निजी वाहन से अकोट ग्रामीण अस्पताल लेकर गए. इस दौरान 108 या 102 एंबुलेस सेवा पर कोई कॉल नहीं किया गया।
– पोपटखेड प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी, डा. अब्दुल शैबाज
