
नवभारत मनोरंजन डेस्क: आजादी के बाद से मुंबई सिनेमा जगत का मुख्य केंद्र बन गया, लेकिन इससे पहले लाहौर और कोलकाता ही सिनेमा के मुख्य केंद्र थे। भले ही भारत की पहली फिल्म ‘राजा हरिश्चंद्र’ का निर्माण मुंबई में हुआ, लेकिन इसका सबसे पहला प्रदर्शन कोलकाता के चैपलिन सिनेमा में किया गया। जिसे पहले एलफिंस्टन पिक्चर पैलेस के नाम से जाना जाता था। यह भारत का पहला थियेटर था जिसका निर्माण कोलकाता के व्यापारी जमशेदजी रामजी मदन ने 1907 किया था। चैपलिन सिनेमा के अलावा उन्होंने ‘चौरंगी प्लेस’ नाम से एक और सिनेमा घर कोलकाता में बनाया था। हालांकि, बाद में इसका नाम बदलकर ‘मिनर्वा सिनेमा’ कर दिया गया।
इस तरह सिनेमाघरों का हुआ निर्माण
साल 1913 में ‘राजा हरिश्चंद्र’ के प्रदर्शन के बाद भारत में सिनेमा को लेकर काफी जागरूकता फैली और कई शहरों में सिनेमाघरों का निर्माण हुआ। इन सिनेमाघरों में मुंबई का ‘रॉयल थिएटर’, दिल्ली में ‘रीगल सिनेमा’ और चेन्नई में ‘गेयटी’ की स्थापना की गई थी। इसमें ‘2 आंखें 12 हाथ’, ‘मुगल-ए-आजम’, ‘दो बीघा जमीन’ और ‘मदर इंडिया’ जैसी क्लासिक हिंदी फिल्में देखी गईं।
सिनेमाघरों में दिखाते थे हॉलीवुड की फिल्में
कोलकाता के ‘चैपलिन सिनेमा’ का ऐतिहासिक महत्त्व होने के साथ-साथ सिनेमा के विकास में भी अहम स्थान रहा। थियेटर का ये नाम हॉलीवुड कलाकार चार्ली चैपलिन के नाम पर रखा गया था। उस जमाने में मूक फिल्में बना करती थी। इसलिए इस थियेटर में गिनी-चुनी फिल्में ही दिखाई जाती थी। इस सिनेमा हॉल में बंगाली सिनेमा के मेगास्टार उत्तम कुमार के पिता प्रोजेक्टर चलाते थे और दर्शकों को आकर्षित करने के लिए इसमें हॉलीवुड की फिल्में दिखाई जाने लगी।
‘मल्टीप्लेक्स’ से प्रभावित हुए ‘सिंगल स्क्रीन थिएटर’
आजादी के बाद इस सिनेमा हॉल में हिंदी के अलावा ‘पाथेर पांचाली’ से लेकर ‘अपराजितो’ तक कई बंगाली फिल्में भी दिखाई गईं। भारत में ‘मल्टीप्लेक्स’ ने ‘सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों’ के दिन और खराब कर दिए। चैपलिन सिनेमा भी इससे प्रभावित हुआ। इस सिनेमा हॉल के मालिकों को भारी नुकसान हुआ। ऐसे में भारत के पहले सिनेमा हॉल चैपलिन सिनेमा को 2013 में कोलकाता नगर निगम ने ध्वस्त कर दिया।






