जैश-ए-मोहम्मद में तख्तापलट की तैयारी! मसूद अजहर की तबीयत बिगड़ी, उत्तराधिकार को लेकर आतंकी संगठन में छिड़ी जंग

जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख Masood Azhar की खराब सेहत और कमजोर पड़ती पकड़ के बीच संगठन में नेतृत्व परिवर्तन की सुगबुगाहट तेज हो गई है। भारतीय एजेंसियां उत्तराधिकार की इस जंग पर कड़ी नजर रख रही हैं।
Coup in the Making within Jaish-e-Mohammed! Masood Azhar's Health Deteriorates; Battle for Succession Erupts within the Terrorist Organization.
मसूद अजहर, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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Masood Azhar News:  आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। लंबे समय से कश्मीर और भारत के अन्य हिस्सों में आतंकी गतिविधियों का चेहरा रहा मसूद अजहर अब अपने ही संगठन में हाशिए पर जाता दिख रहा है। भारतीय खुफिया एजेंसियों की ताजा रिपोर्टों के अनुसार, संगठन के भीतर नेतृत्व को लेकर खींचतान शुरू हो गई है और कई गुट मसूद अजहर की जगह नया कमांडर नियुक्त करने की मांग कर रहे हैं।

कमजोर पड़ती मसूद अजहर की आवाज

इस विवाद की शुरुआत मसूद अजहर द्वारा ईद-उल-फितर के अवसर पर जारी एक ऑडियो क्लिप से हुई। आमतौर पर अजहर अपने संदेशों में भारत के खिलाफ अत्यधिक जहर उगलता था लेकिन इस बार के संदेश ने सुरक्षा एजेंसियों को चौंका दिया है। एजेंसियों के अनुसार, इस ऑडियो में अजहर की आवाज काफी कमजोर और 'टूटी हुई' लग रही थी। उसकी बातों में वह पुराना जोश और गुस्सा गायब हो गया जिससे यह संकेत मिलता है कि वह गंभीर रूप से बीमार है। शुरुआत में इसे एजेंसियों को गुमराह करने का नाटक माना गया था लेकिन अब इंटेलिजेंस ने पुष्टि की है कि अजहर की सेहत वाकई चिंताजनक है।

संगठन में विद्रोह और लश्कर की बढ़ती चुनौती

जैश के भीतर एक बड़ा धड़ा इस बात से नाराज है कि संगठन पिछले कुछ समय से शांत है और कोई बड़ी गतिविधि नहीं कर रहा है। इसकी तुलना में लश्कर-ए-तैयबा (LeT) अधिक सक्रिय नजर आ रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, लश्कर के नेतृत्व को हमास के सदस्यों के साथ मेलजोल बढ़ाते देखा गया है, जबकि जैश बड़े अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों से गायब है। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में मौजूद लॉन्चपैड्स पर भी लश्कर के आतंकी जैश के मुकाबले ज्यादा सक्रिय दिख रहे हैं, जिससे जैश के कैडर का मनोबल गिर रहा है।

उत्तराधिकार की जंग

मसूद अजहर की गिरती सेहत ने उत्तराधिकार की बहस को तेज कर दिया है। संगठन के सामने सबसे बड़ी दुविधा यह है कि नेतृत्व किसी पारिवारिक सदस्य को सौंपा जाए या किसी अनुभवी ऑपरेशनल कमांडर को। कैडर को एकजुट रखने के लिए परिवार का सदस्य पहली पसंद हो सकता है लेकिन जमीनी स्तर पर पकड़ बनाने के लिए एक मजबूत रणनीतिकार की जरूरत है।

रेस में सामने आए ये दो बड़े नाम

अब्दुल जब्बार: यह मिलिट्री मामलों का इंचार्ज है और ऑन-ग्राउंड ऑपरेशंस, लॉजिस्टिक्स और प्लानिंग का व्यापक अनुभव रखता है।

तल्हा अल सैफ: यह मसूद अजहर का भाई है। हालांकि, इसकी दावेदारी कमजोर मानी जा रही है क्योंकि इसका अनुभव केवल फंडिंग और डिजिटल वॉलेट मैनेज करने तक ही सीमित रहा है।

भारतीय एजेंसियां इस पूरी स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए हैं क्योंकि नेतृत्व में किसी भी बदलाव का सीधा असर सीमा पार से होने वाली घुसपैठ और आतंकी गतिविधियों पर पड़ सकता है।

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