The Raja Saab Review: बिना सिर-पैर की है प्रभास की 'राजा साब', रोमांच के चक्कर में कहानी से भटके मेकर्स

Movie Review: प्रभास की 'द राजा साब' रिलीज़ हो गई है, लेकिन कहानी बिना सिर-पैर की है। हॉरर-कॉमेडी में मसालों के ओवरडोज ने फिल्म को उलझा दिया है। प्रभास का प्रयास कमजोर स्क्रिप्ट के सामने विफल रहा।
The Raja Saab Movie Review
The Raja Saab Movie Review (फोटो क्रेडिट-इंस्टाग्राम)
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The Raja Saab Movie Review:  साउथ सुपरस्टार प्रभास की मोस्ट अवेटेड हॉरर-कॉमेडी फिल्म 'द राजा साब' आखिरकार सिनेमाघरों में रिलीज़ हो चुकी है। इस फिल्म से दर्शकों की काफी उम्मीदें जुड़ी थीं, खासकर 'बाहुबली' स्टार प्रभास को एक हल्के-फुल्के हॉरर-कॉमेडी अवतार में देखने की। हालांकि, फिल्म समीक्षकों की मानें तो 'द राजा साब' की कहानी का न तो कोई हाथ-पैर है और न ही फिल्म का एक भी गाना दर्शकों को याद रहने लायक है। रिलीज़ के बाद सामने आए रिव्यूज बताते हैं कि रोमांच के ओवरडोज के चक्कर में मेकर्स फिल्म की मूल कहानी से पूरी तरह भटक गए हैं।

अगर इसके बावजूद आपका दिल ये फिल्म देखने का कर रहा है, तो सिर्फ एक ही कारण है जिसकी वजह से आप थिएटर जा सकते हैं: प्रभास की स्टार पावर। लगातार कई असफल फिल्मों के बाद, प्रभास को अपनी फिल्में चुनते वक्त अब और भी ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है।

'द राजा साब' की कहानी

फिल्म की कहानी राजू उर्फ राजा साब (प्रभास) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी दादी गंगा मां (जरीना वहाब) के साथ गांव में रहता है। राजू के दादा कनकराजू (संजय दत्त) एक चोर की तलाश में लापता हो गए थे। कहानी में मोड़ तब आता है जब राजू को अपने दादा के हैदराबाद में होने की खबर मिलती है।

खौफनाक हकीकत: हैदराबाद पहुंचने पर राजू का सामना अपने दादा से जुड़ी खौफनाक और हैरतअंगेज हकीकत से होता है।

राजकुमारी का रहस्य: उसे यह भी पता चलता है कि उसकी दादी देवनगर साम्राज्य की राजकुमारी हैं।

भूतिया हवेली: दादी और दादा से जुड़ी पहेलियों को सुलझाने के लिए राजू अपने दादा की भूतिया हवेली में पहुँचता है, जहाँ उसका मुकाबला भूत बन चुके अपने दादा से होता है। दादा और पोते की इस जंग में कौन जीतता है, यही जानने के लिए आपको सिनेमाघर जाना होगा।

उलझा हुआ स्क्रीनप्ले और ओवरडोज मसाला

फिल्म के निर्देशक मारुति ने इसकी कहानी और स्क्रीनप्ले भी खुद ही लिखा है। फिल्म की शुरुआत भले ही एक बेहतर फिल्म की उम्मीद जगाती है, लेकिन धीरे-धीरे कहानी बोझिल होने लगती है।

इंटरवल के बाद कहानी: इंटरवल के बाद तो कहानी इतनी ज्यादा उलझ जाती है कि दर्शक क्लाईमैक्स तक भी उससे उबर नहीं पाते हैं।

जॉनर में भटकाव: फिल्म 'द राजा साब' को हॉरर कॉमेडी के तौर पर प्रचारित किया गया है, लेकिन इसका हॉरर आपको बमुश्किल ही डराता है, वहीं कॉमेडी कुछ दृश्यों में हंसाती जरूर है। निर्देशक ने फिल्म में इतने ज्यादा मसाले डाले हैं कि उनकी ओवरडोज के चलते दर्शकों का मजा किरकिरा हो जाता है।

हॉलीवुड से प्रेरित: फिल्म कभी हॉलीवुड की किसी फैंटेसी फिल्म की याद दिलाती है, तो कभी पीरियड फिल्म या फिर साइंस एडवेंचर फिल्म की। कई सीन सीधे तौर पर हॉलिवुड से प्रेरित लगते हैं।

कलाकारों का कमजोर प्रदर्शन

प्रभास जैसे बड़े सितारे का भरपूर इस्तेमाल करने की चाहत में मारुति ने फिल्म में इतना सबकुछ परोस दिया, जिसके चलते फिल्म की लंबाई तीन घंटे हो गई, जिसे आसानी से दो-सवा दो घंटे में एडिट किया जा सकता था।

प्रभास: प्रभास ने अपनी ओर से पूरी कोशिश की है, लेकिन कमजोर व उलझी हुई स्क्रिप्ट के चलते वह कुछ खास नहीं कर पाए।

संजय दत्त: संजय दत्त के पास हेवी वीएफएक्स वाले सींस के चलते करने के लिए कुछ खास नहीं था।

अभिनेत्रियाँ: फिल्म की तीनों हीरोइनों के पास भी कुछ सीन्‍स व गानों के अलावा कुछ खास काम नहीं है।

तकनीकी पहलू: जरीना वहाब और बोमन ईरानी अपने रोल में ठीकठाक लगे। फिल्म की सिनेमटोग्रफी व वीएफएक्स का काम अच्छा है, लेकिन फिल्म का म्यूजिक कुछ खास नहीं है और कहानी की रफ्तार को कमजोर करता है। डायरेक्टर ने आखिर में इसके सीक्वल की भी घोषणा की है।

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