संजय दत्त को लगी थी ड्रग की लत, हुई थी 5 साल की जेल, लंग कैंसर पर जीत की हासिल

Sanjay Dutt Birthday Special: युवा उम्र में ड्रग्स की लत और 1993 के बम धमाकों में गिरफ्तारी ने संजय दत्त का जीवन कठिन बना दिया। उन्हें पांच साल की जेल हुई, लेकिन उन्होंने वापसी की।
संजय दत्त को लगी थी ड्रग की लत, हुई थी 5 साल की जेल, लंग कैंसर पर जीत की हासिल
संजय दत्त (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Sanjay Dutt Birthday: बॉलीवुड के मशहूरा एक्टर संजय दत्त का जीवन किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रहा। संजय दत्त आज अपना 66वां जन्मदिन मना रहे हैं। 29 जुलाई 1959 को फिल्म इंडस्ट्री के दिग्गज सितारों, सुनील दत्त और नरगिस के घर जन्मे संजय दत्त ने न सिर्फ पर्दे पर बल्कि असल जिंदगी में भी उतार-चढ़ावों से भरी एक लंबी लड़ाई लड़ी है।

संजय दत्त ने अपने करियर की शुरुआत 1981 में 'रॉकी' फिल्म की थी। इसके बाद संजय ने समय के साथ 'साजन', 'खलनायक', 'वास्तव', 'मुन्ना भाई MBBS' जैसी यादगार फिल्में दीं। लेकिन उनके व्यक्तिगत जीवन में संघर्ष लगातार बना रहा। कम उम्र में ड्रग्स की लत लग जाना उनके जीवन का सबसे कठिन दौर था। उन्होंने खुद बताया था कि वे लगभग पांच साल तक रिहैब में रहे और इस नशे से बाहर आने की कड़ी मेहनत की। ड्रग्स छोड़ने के बाद संजय ने दोबारा अपने करियर को संवारना शुरू किया।

पांच साल की जेल की सजा

लेकिन 1993 के मुंबई बम धमाकों के केस में जब संजय दत्त का नाम आया, तो पूरे देश में सनसनी फैल गई। उन्हें अवैध हथियार रखने के मामले में गिरफ्तार किया गया और बाद में पांच साल की सजा भी हुई। इस समय को उनके लिए, और खासकर उनके पिता सुनील दत्त के लिए, बेहद मुश्किल और शर्मिंदगी भरा बताया गया। हालांकि, कोर्ट ने उन्हें आतंकवादी गतिविधियों से बरी कर दिया था। इस कठिन वक्त में भी उन्होंने हार नहीं मानी और सजा पूरी कर बॉलीवुड में दोबारा वापसी की।

लंग कैंसर पर जीत की हासिल

2020 में संजय दत्त को चौथी स्टेज के लंग कैंसर की खबर मिली। कैंसर का नाम सुनते ही वे टूट गए। लेकिन अपनी मां और पहली पत्नी की कैंसर से मौत याद कर उन्होंने भी लड़ने का फैसला किया। उन्होंने कहा था कि इलाज के बजाय मौत को चुनना चाहता था, लेकिन परिवार और बच्चों के लिए उन्होंने कीमोथेरेपी का सामना किया और अंत में इस बीमारी से भी जीत हासिल की। संजय दत्त का जीवन एक मिसाल है कि चाहे कितने भी अंधेरे समय आएं, आत्मबल, परिवार का साथ और इच्छा शक्ति से कोई भी बाधा पार की जा सकती है।

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