Republic Day 2026: रोम-रोम में राष्ट्रप्रेम जगा देंगी ये दमदार फिल्में, आजादी के साथ समझाएंगी संविधान का मतलब

Republic Day Movies: गणतंत्र दिवस सिर्फ छुट्टी नहीं, बल्कि संविधान, अधिकारों और कर्तव्यों को समझने का अवसर है। इस मौके पर वो फिल्में जरूर देखें, जो लोकतंत्र की असली तस्वीर दिखाती हैं।
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रिपब्लिक डे मूवी लिस्ट (फोटो-सोर्स,सोशल मीडिया)
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Best Indian Films On Social Justice: अक्सर स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर एक जैसी देशभक्ति फिल्मों की चर्चा होती है, लेकिन इन दोनों ऐतिहासिक दिनों का अर्थ अलग है। 15 अगस्त हमें औपनिवेशिक शासन से मुक्ति की याद दिलाता है, जबकि 26 जनवरी उस दिन का प्रतीक है जब भारत ने अपना संविधान अपनाया और एक लोकतांत्रिक राष्ट्र के रूप में नई पहचान बनाई। इसलिए गणतंत्र दिवस पर उन फिल्मों को देखना ज्यादा प्रासंगिक है जो हमारे मौलिक अधिकारों, कर्तव्यों और संवैधानिक मूल्यों पर रोशनी डालती हैं।

संविधान और सामाजिक न्याय की बात करें तो फिल्म ‘आर्टिकल 15’ बेहद अहम है, जिसकी कहानी सीधे संविधान के एक महत्वपूर्ण अनुच्छेद से जुड़ी है और यह जाति, धर्म और लिंग के आधार पर होने वाले भेदभाव के खिलाफ मजबूत संदेश देती है। वहीं ‘जय भीम’ न्याय, मानवाधिकार और दलित उत्पीड़न जैसे मुद्दों को संवेदनशीलता से उठाती है, जबकि ‘आरक्षण’ अवसर की समानता और आर्टिकल 16 के महत्व को समझाती है। इसी कड़ी में ‘पिंक’ महिलाओं की सहमति और गरिमा को केंद्र में रखती है और ‘अलीगढ़’ LGBTQ समुदाय के अधिकारों और संवैधानिक स्वतंत्रता पर गहरी छाप छोड़ती है।

संविधान और नागरिक अधिकारों पर देखें ये आधारित फिल्में

लोकतंत्र और न्याय व्यवस्था को समझने के लिए ‘न्यूटन’ एक बेहतरीन उदाहरण है, जो यह दिखाती है कि वोटिंग का अधिकार कितना कीमती है और इसे निभाना कितनी चुनौतियों से भरा हो सकता है। ‘जॉली एलएलबी’ न्याय प्रणाली में समानता और सच्चाई की लड़ाई को हल्के-फुल्के अंदाज में लेकिन असरदार तरीके से पेश करती है, जबकि ‘नायक’ सत्ता, जवाबदेही और नेताओं की संवैधानिक जिम्मेदारियों पर तीखे सवाल खड़े करती है।

‘स्वदेस’ सिखाती है कर्तव्यों का मतलब

समाज और देश के प्रति नागरिक कर्तव्यों की बात करें तो ‘स्वदेस’ यह सिखाती है कि बदलाव सरकार से पहले व्यक्ति के स्तर से शुरू होता है और डॉ. बी.आर. अंबेडकर के आदर्शों को जीवन में उतारना कितना जरूरी है। वहीं ‘रंग दे बसंती’ युवाओं को जागरूक नागरिक बनने और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने की प्रेरणा देती है। इसके अलावा ‘मुल्क’ धर्मनिरपेक्षता और संविधान की आत्मा को सामने लाती है, जबकि ‘ओह माय गॉड’ धार्मिक स्वतंत्रता और आस्था से जुड़े संवैधानिक अधिकारों को नए नजरिए से दिखाती है।

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