Om Prakash Death Anniversary: शादी की दावत में मिला फिल्म का ऑफर, जानें ओम प्रकाश के अनसुने किस्से

ओम प्रकाश ने ऑल इंडिया रेडियो में काम करना शुरू कर दिया। एक दिन वह अपने दोस्त की शादी में गए। वहां वह हंसी-मजाक कर रहे थे, तभी प्रोड्यूसर दलसुख पंचोली की नजर उन पर पड़ी। इसके बाद एक्टर की लाइफ बदल गई।
Omprakash Death Anniversary: शादी की दावत में मिला फिल्म का ऑफर, जानें ओम प्रकाश के अनसुने किस्से
ओम प्रकाश के अनसुने किस्से
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मुंबई: बॉलीवुड एक्टर ओम प्रकाश का जन्म 19 दिसंबर 1919 को जम्मू में हुआ था। ओम प्रकाश करीब 12 साल की उम्र में शास्त्रीय संगीत सीखने के अलावा थिएटर और फिल्मों में रुचि रखते थे। ओम प्रकाश न सिर्फ फिल्मों में चमके बल्कि अपनी काबिलियत का लोहा भी मनवाया। ओम प्रकाश ने 21 फरवरी 1998 को लीलावती अस्पताल में अंतिम सांस ली।

ओम प्रकाश महज 14 साल की उम्र में एक्टिंग के लिए मुंबई पहुंच गए। हालांकि, वहां बात नहीं बनी और उन्हें वापस जम्मू लौटना पड़ा। कुछ सालों बाद उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो में काम करना शुरू कर दिया। एक दिन वह अपने दोस्त की शादी में गए। वहां वह हंसी-मजाक कर रहे थे, तभी प्रोड्यूसर दलसुख पंचोली की नजर उन पर पड़ी। ओम प्रकाश के घर पर कुछ दिन बाद एक टेलीग्राम पहुंचा, जिस पर लिखा था, 'तुरंत आओ' - पंचोली।

ओम प्रकाश जब दलसुख पंचोली से मिलने पहुंचे तो उन्हें 1944 में पहली फिल्म 'दासी' मिली। इस फिल्म में काम करने के लिए ओम प्रकाश को केवल 80 रुपये मिले और यह फिल्म रिलीज हुई और हर जगह ओम प्रकाश के अभिनय की चर्चा होने लगी। देश के बंटवारे के बाद ओम प्रकाश दिल्ली पहुंचे और फिर वहां से मुंबई आ गए। फिल्म 'लखपति' में उन्हें विलेन का रोल मिला। इसके बाद वह फिल्म 'लाहौर', 'रात की रानी' और 'चार दिन' में नजर आए। इसके अलावा ओम प्रकाश ने दिलीप कुमार, राज कपूर, अशोक कुमार जैसे कलाकारों के साथ भी फिल्में की थीं।

ओमप्रकाश ने अमिताभ बच्चन के साथ फिल्म 'नमक हलाल' में काम किया था। इस फिल्म में ओम प्रकाश का किरदार 'दद्दू' लोगों को काफी पसंद आया और वो इसी नाम से मशहूर हो गए। उन्होंने बॉलीवुड में विलेन से लेकर कॉमेडियन और फैमिली मैन तक के किरदार निभाए। अपने बॉलीवुड करियर के दौरान ओम प्रकाश ने 307 फिल्मों में काम किया।

ओम प्रकाश ने अपने फिल्मी करियर में दिल-दौलत-दुनिया, दस लाख, अन्नदाता, चरणदास, साधु और शैतान, अपना देश, चुपके-चुपके, जूली, जोरू का गुलाम, आ गले लग जा, प्यार किए जा, पड़ोसन, बुड्ढा मिल गया, शराबी, भरोसा, तेरे घर के सामने, मेरे हमदम मेरे दोस्त, लोफर, दिल तेरा दीवाना जैसी फिल्मों में काम किया। इसके अलावा उन्होंने ‘गेटवे ऑफ इंडिया’ (1957), ‘संजोग’ (1961) और ‘जहान आरा’ (1964) जैसी फिल्में प्रोड्यूस भी की हैं।

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