De De Pyaar De 2 Review: अजय देवगन पर भारी पड़े आर माधवन, कॉमेडी के चक्कर में कहानी से भटकी फिल्म
Ajay Devgn Movie Review: फर्स्ट हाफ फनी है, लेकिन सेकंड हाफ कमजोर। आर माधवन की एक्टिंग दमदार है, जबकि रकुल प्रीत निराश करती हैं। अजय देवगन ने कम डायलॉग्स बोले।
- Written By: अनिल सिंह
'दे दे प्यार दे 2' फिल्म रिव्यू: माधवन ने किया कमाल, अजय देवगन ने बोले कम डायलॉग्स, फैमिली के साथ देखें या न देखें?
De De Pyaar De 2 Movie Review: अभिनेता अजय देवगन अपनी सफल रोमांटिक-कॉमेडी फिल्म ‘दे दे प्यार दे’ के सीक्वल ‘दे दे प्यार दे 2’ के साथ सिनेमाघरों में लौट आए हैं। छह साल बाद आए इस सीक्वल में रकुल प्रीत सिंह (Rakul Preet Singh), आर माधवन (R Madhavan), और मीजान जाफरी (Meezaan Jafri) जैसे नए कलाकारों को जोड़ा गया है, जिससे फिल्म का कैनवास पहले से बड़ा हो गया है। हालांकि, क्या मेकर्स पहली फिल्म जैसा जादू फिर से चला पाए हैं, या यह सीक्वल सिर्फ खिंची हुई कहानी बनकर रह गया है?
कहानी: अब आयशा के परिवार से मिलन की बारी
फिल्म की कहानी वहीं से शुरू होती है जहां ‘दे दे प्यार दे’ खत्म हुई थी। आयशा (रकुल प्रीत सिंह) आशीष (अजय देवगन) के परिवार से मिल चुकी है, और अब बारी आशीष के आयशा के परिवार से मिलने की है। आयशा के परिवार में उसके सख्त पिता (आर माधवन), मां (गौतमी कपूर), भाई (तरुन गहलोत) और भाभी (इशिता दत्ता) शामिल हैं। आयशा अपने 28 साल और 52 साल के बॉयफ्रेंड आशीष को परिवार से मिलवाना चाहती है। आशीष की उम्र जानने के बाद आयशा की फैमिली क्या प्रतिक्रिया देती है, और क्या वे इस रिश्ते को स्वीकार करते हैं या नहीं, यही 2 घंटे 26 मिनट की इस फिल्म का सार है।
कैसी है फिल्म: फर्स्ट हाफ बेहतर, सेकंड हाफ में बिखरी कहानी
फिल्म की कहानी काफी प्रेडेक्टिबल है, क्योंकि दर्शक जानते हैं कि अंत क्या होगा। फिल्म का फर्स्ट हाफ बेहतर है। यह आपको लगातार हंसाता रहेगा और एक अच्छी रोमांटिक-कॉमेडी का एहसास कराएगा। लेकिन, जैसे ही फिल्म सेकंड हाफ में प्रवेश करती है, कहानी कमजोर पड़ने लगती है। मेकर्स ने जबरन इमोशन डालने की कोशिश में असल कहानी से भटकाव ले लिया है। जो कहानी कॉमेडी से शुरू हुई थी, वह दूसरे हाफ में थोड़ी उबाऊ हो जाती है और खिंची-खिंची सी लगती है। हालांकि, आर माधवन की दमदार एक्टिंग आपको बांधे रखती है, और आखिरी के 15 मिनट में क्लाइमेक्स में एक ट्विस्ट आता है, जो एक बार फिर आपको हंसाते हुए थिएटर से विदा करता है। अगर तुलना की जाए तो, ‘दे दे प्यार दे’ इस सीक्वल से बेहतर है।
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एक्टिंग: आर माधवन छाए, रकुल प्रीत ने किया निराश
एक्टिंग के मामले में आर माधवन अजय देवगन समेत पूरी कास्ट पर भारी पड़े हैं। कॉमेडी से लेकर सख्त पिता और भावनात्मक दृश्यों तक में वह अपनी एक्टिंग से जान डाल देते हैं। उनका पेपर सॉल्ट लुक भी काफी कूल लगा है।
अजय देवगन, जो फिल्म के लीड एक्टर हैं, उन्होंने पूरी फिल्म में काफी कम डायलॉग्स बोले हैं और ज्यादातर एक्सप्रेशन पर ही निर्भर रहे हैं। हालांकि, वह रोल में फिट बैठे हैं।
फिल्म की सबसे कमजोर कड़ी हैं रकुल प्रीत सिंह। जहां पहली फिल्म में उनकी खूबसूरती के चर्चे थे, वहीं इस बार उन्होंने निराश किया है। हल्के-फुल्के सीन में तो वह जंचती हैं, लेकिन भावनात्मक दृश्यों और भारी डायलॉग्स में वह ओवर एक्टिंग करती दिखती हैं, जिससे सीन फीके पड़ जाते हैं।
मीजान जाफरी को जितना काम मिला (हीरोइन को इंप्रेस करना, गिटार बजाना, बॉडी दिखाना), उन्होंने उसे बखूबी निभाया है और उनकी जोड़ी रकुल के साथ अच्छी लगी है। जावेद जाफरी, गौतमी कपूर और इशिता दत्ता ने अपने-अपने हिस्से का काम ईमानदारी से किया है।
खूबियां और कमियां
| खूबियां | कमियां |
| फिल्म का शानदार और फनी फर्स्ट हाफ। | रकुल प्रीत सिंह की कमजोर एक्टिंग। |
| क्लाइमेक्स में आया ट्विस्ट और बेहतर अंत। | सेकेंड हाफ का खिंचा-खिंचा और उबाऊ लगना। |
| आर माधवन का शानदार अभिनय। | कमजोर सैड सॉन्ग और औसत संगीत। |
| पूरे परिवार के साथ देखने लायक फैमिली एंटरटेनर। | निर्देशन में कुछ मौकों पर जल्दीबाजी दिखना। |
निर्देशन और संगीत
फिल्म का निर्देशन अंशुल शर्मा ने किया है, और एक नए निर्देशक के तौर पर उनका काम ठीक-ठाक है। हालांकि, सेकेंड हाफ में एडिटिंग की कैंची चल सकती थी। निर्देशन में कुछ कमियां दिखीं, जैसे चंडीगढ़ और लंदन की दूरी को बहुत जल्दी-जल्दी खत्म कर दिया गया है। संगीत की बात करें तो, इस बार सिर्फ दो गाने—’3 शौक’ और ‘झूम बराबर’ ही पार्टी सॉन्ग के तौर पर याद रहेंगे। फिल्म का सैड सॉन्ग कुछ खास प्रभावित नहीं करता।
देखें या न देखें?
‘दे दे प्यार दे 2’ एक फैमिली एंटरटेनर है जिसे आप पूरे परिवार के साथ देख सकते हैं। अगर आप वीकेंड पर खाली हैं और एक हल्की-फुल्की, फनी फिल्म देखना चाहते हैं, तो आप इसे एंजॉय कर सकते हैं।
