अनीता हसनंदानी बनीं ‘छोरियां चली गांव’ की विनर, जीत के बाद बोलीं- मुझे सभी कामों की कद्र करना सिखाया
Anita Hassanandani Interview: रियलिटी शो ‘छोरियां चली गांव’ में शानदार परफॉर्मेंस देकर अनीता हसनंदानी विनर बन चुकी हैं। ऐसे में इस जीत के बाद उन्होंने एक इंटरव्यू में अपने सफर और संघर्ष पर बात की।
- Written By: स्नेहा मौर्या
अनीता हसनंदानी (फोटो-सोर्स,सोशल मीडिया)
Chhoriyan Chali Gaon Winner Anita Hassanandani: टेलीविजन की मशहूर अभिनेत्री अनीता हसनंदानी ने अपने टैलेंट और जुझारूपन से एक बार फिर दर्शकों का दिल जीत लिया है। रियलिटी शो ‘छोरियां चली गांव’ में शानदार परफॉर्मेंस देने के बाद अनीता ने खिताब अपने नाम कर लिया है। जीत के बाद उन्होंने अपने इस सफर, संघर्ष और भावनाओं पर खुलकर बात की।
अनीता ने अपनी यात्रा को याद करते हुए कहा कि “यह अनुभव मेरे लिए बेहद खास रहा। शो के दौरान कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन हर पल ने मुझे कुछ नया सिखाया। मैंने खुद को एक नए नजरिए से जाना। इस सफर ने मुझे न सिर्फ मजबूत बनाया बल्कि मेरे बेटे आरव की परवरिश में भी कई सीख दी। जब आप कड़ी मेहनत के बाद जीत हासिल करते हैं, तो वह पल जिंदगीभर याद रहता है।”
अनीता हसनंदानी ने जीत पर की खुलकर बात
उन्होंने आगे बताया कि शो के दौरान कई शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण टास्क का सामना करना पड़ा। “मुझे कूड़ा उठाने जैसे काम करने पड़े जो मेरे लिए बिल्कुल नया अनुभव था। उस वक्त एहसास हुआ कि कुछ लोग हर दिन ऐसे ही मेहनत करते हैं ताकि अपने परिवार का पेट पाल सकें। ‘छोरियां चली गांव’ ने मुझे उन लोगों के प्रति सम्मान और संवेदना सिखाई।”
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जब उनसे पूछा गया कि वह गुस्सा कैसे संभालती हैं, तो उन्होंने मुस्कराते हुए जवाब दिया, “मैं गुस्सा जरूर होती हूं, लेकिन उसे चिल्लाकर नहीं जताती। मैं अपनी बात प्यार और तर्क के साथ रखती हूं। अगर किसी अपने से झगड़ा हो जाए, तो मैं बहुत इमोशनल हो जाती हूं और रो पड़ती हूं यही मेरा स्वभाव है।”
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‘छोरियां चली गांव’ का शेयर किया एक्सपीरियंस
अनीता हसनंदानी ने बताया कि शो के दौरान उनका भावनात्मक पक्ष भी दर्शकों को देखने को मिला। “जब मेरा बेटा आरव शो में आया, तो मैं खुद को रोक नहीं पाई और रो पड़ी। गांव के लोगों के साथ जो रिश्ते बने, वो मेरे दिल के बहुत करीब हैं।” अनीता ने आगे कहा कि वह गांव के बच्चों की पढ़ाई में मदद करने का वादा निभाना चाहती हैं। “वहां कई समस्याएं हैं पानी की कमी, खराब सड़कें और अस्पतालों की दिक्कतें। मैं अपनी क्षमता के अनुसार मदद करना चाहती हूं।”
अंत में अनीता ने बताया कि “मेरे पति रोहित और बेटा आरव दोनों मुझ पर गर्व महसूस कर रहे हैं। जब आरव ट्रॉफी लेकर सबको दिखाता है, तो वह मेरे लिए सबसे बड़ी जीत होती है। एक मां के लिए इससे बड़ी खुशी कुछ नहीं।”
(एजेंसी इनपुट के साथ)
