

Election Commission Complaint PM Modi: पूर्व नौकरशाहों, शिक्षाविदों, कार्यकर्ताओं और पत्रकारों समेत 700 से अधिक लोगों ने Election Commission of India को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 18 अप्रैल को राष्ट्र के नाम संबोधन आदर्श आचार संहिता (MCC) का उल्लंघन है। उन्होंने आयोग से इस मामले की जांच कर कार्रवाई करने और सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की है।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) को भेजी गई शिकायत में कहा गया है कि दूरदर्शन, संसद TV और ऑल इंडिया रेडियो जैसे सरकारी प्लेटफॉर्म पर प्रसारित यह संबोधन, आचार संहिता लागू होने के दौरान “चुनाव प्रचार” के समान था।
वर्तमान में असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में आदर्श आचार संहिता लागू है। इनमें से असम, केरल और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को मतदान हो चुका है, जबकि तमिलनाडु में 23 अप्रैल और पश्चिम बंगाल में 23 व 29 अप्रैल को मतदान होना है। मतगणना 4 मई को निर्धारित है। शिकायत में कहा गया है कि सरकारी वित्तपोषित मीडिया का इस तरह उपयोग सत्तारूढ़ दल को “अनुचित लाभ” देता है और स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव के लिए जरूरी समान अवसर को प्रभावित करता है।
शिकायतकर्ताओं ने चुनाव आयोग के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि मंत्रियों को आधिकारिक कार्यों को चुनाव प्रचार से जोड़ने या सरकारी मशीनरी का उपयोग पक्षपातपूर्ण तरीके से करने की अनुमति नहीं है। उन्होंने आयोग से अपील की है कि वह मामले का संज्ञान लेकर संबोधन की सामग्री और प्रसारण प्रक्रिया की जांच करे और आवश्यक कार्रवाई शुरू करे। साथ ही, यदि इस प्रसारण के लिए पूर्व अनुमति दी गई थी, तो अन्य राजनीतिक दलों को भी समान समय उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
इस पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में निर्मला सीतारमण के पति और राजनीतिक अर्थशास्त्री पी. प्रभाकर, दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग, सामाजिक कार्यकर्ता योगेन्द्र यादव, अर्थशास्त्री जयति घोष, संगीतकार टी. एम. कृष्णा, पूर्व केंद्रीय सचिव ई. ए. एस. शर्मा, कार्यकर्ता हर्ष मंदर, पत्रकार पी. गुहा ठाकुरता, शिक्षाविद जोया हसन और पूर्व राजदूत मधु भादुड़ी शामिल हैं।
अन्य हस्ताक्षरकर्ताओं में पारदर्शिता कार्यकर्ता अंजली भारद्वाज, पूर्व सिविल सेवक आशीष जोशी, अमिताभ पांडे और ए. शुक्ला, पत्रकार जॉन दयाल और विद्या सुब्रमण्यम, तथा CPI की नेता एनी राजा समेत कई शिक्षाविद, वकील और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं। हस्ताक्षरकर्ताओं ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए आयोग को इस मामले में तुरंत और प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए।