भारतीय राजनीति में वामपंथ का अंत! 50 साल में पहली बार किसी भी राज्य में नहीं होगी लेफ्ट सरकार

No Left Government In India: केरल चुनाव 2026 के वामपंथी राजनीति के लिए एक ऐतिहासिक अंत साबित हुआ। 50 सालों में यह पहली बार होगा कि अब भारत के किसी भी राज्य में वामपंथी सरकार नहीं होगी।
The End of the Left in Indian Politics! For the First Time in 50 Years, No State Will Have a Left-Led Government
CPI का झंडा, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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No Left Government In India After 50 Years: भारतीय राजनीति में अपनी खास विचारधारा और मजबूत पकड़ के लिए मशहूर वामपंथी दल आज अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहे हैं। ताजा चुनावी रुझान बताते हैं कि पिछले 50 सालों में यह पहली बार होगा कि जब देश के किसी भी राज्य में वामपंथियों की सरकार नहीं होगी। केरल, जो इनका सबसे मजबूत गढ़ माना जाता था लेकिन 2026 के चुनावी नतीजे अब इस ओर इशारा कर रहे हैं कि अब उनके हाथ से यह आखिरी किला भी खिसक रहा है।

कैसे हुई पतन की शुरुआत?

वामपंथ के इस पतन के पीछे कई ऐतिहासिक कारणों को जिम्मेदार माना जाता है। 1996 में, जब सीपीआई-एम के दिग्गज नेता ज्योति बसु प्रधानमंत्री बनने के बेहद करीब थे तब उनकी पार्टी के पोलित ब्यूरो ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था जिसे बसु ने खुद ही उसे ऐतिहासिक भूल करार दिया था। साल 2008 तक वामपंथी दल राष्ट्रीय राजनीति में इतने प्रभावशाली थे कि मनमोहन सिंह सरकार उनकी मर्जी पर टिकी थी लेकिन परमाणु समझौते के मुद्दे पर समर्थन वापस लेना उनके प्रभाव को कम करने की शुरुआत साबित हुई।

स्वर्णकाल से शून्य की ओर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की शुरुआत बहुत शानदार रही थी। 1952 के पहले चुनाव में यह देश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी बनी और 1957 में केरल में दुनिया की पहली ऐसी कम्युनिस्ट सरकार बनाई जिसे जनता ने वोट देकर चुना था। 1970 के दशक में इनका सबसे अच्छा समय शुरू हुआ, जब पश्चिम बंगाल में ज्योति बसु के नेतृत्व में वामपंथियों ने लगातार 34 साल तक राज किया। लेकिन 2011 में नंदीग्राम और सिंगूर जैसे विवादों के बाद बंगाल में उनकी जड़ें पूरी तरह से हिल गईं।

किले दर किले ढहने का सिलसिला

बता दें कि त्रिपुरा कभी माणिक सरकार के नेतृत्व में वामपंथियों (Left) का सबसे मजबूत गढ़ था। लेकिन वहां भी 2018 में बीजेपी ने उन्हें हरा दिया। इसके बाद उनकी सरकार सिर्फ केरल में बची थी। हालांकि मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने 2016 और 2021 में लगातार दो बार चुनाव जीतकर पार्टी को बड़ी मजबूती दी थी लेकिन 2026 के नए रुझानों ने एक बार फिर वामपंथियों की चिंता बढ़ा दी है।

केरल में बदलाव की लहर

वर्तमान में, कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) ज्यादातर सीटों पर बढ़त बनाए हुए है जिससे केरल में सत्ता परिवर्तन की संभावना लगभग तय मानी जा रही है। अब 1970 के बाद यह पहली बार होगा जब भारत के किसी भी राज्य में वाम दलों की सरकार नहीं होगी। तिरुवनंतपुरम में कांग्रेस कार्यकर्ताओं का जश्न इस बात का गवाह है कि वामपंथ का यह 'स्वर्ण युग' अब समाप्ति की ओर बढ़ रहा है।

अभी तक के रिपोर्ट के अनुसार,  कांग्रेस का गठबंधन (UDF) ज़्यादातर सीटों पर आगे चल रहा है जिससे केरल में अब Left की सरकार का जाना पूरी तरह से तय हो गया है। इस नतीजे के आने से 1970 के बाद यह पहली बार होगा जब पूरे भारत के किसी भी राज्य में वामपंथियों (Left) की सरकार नहीं बचेगी।

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