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Delhi-NCR में प्रदूषण के खिलाफ मेगा स्ट्राइक, उद्योगों के लिए सख्त हुए पीएम उत्सर्जन मानक, क्या है नई सीमा?
Delhi NCR Pollution: दिल्ली-एनसीआर में औद्योगिक प्रदूषण कम करने के लिए CAQM ने पीएम उत्सर्जन के नए मानक तय कर दिए हैं। बड़े उद्योगों को अगस्त 2026 तक इन कड़े नियमों का पालन करना होगा।
- Written By: प्रतीक पांडेय

प्रतीकात्मक फोटो, सोर्स- सोशल मीडिया
CAQM New Statutory Directive: दिल्ली-एनसीआर की जहरीली हवा को साफ करने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने एक निर्णायक कदम उठाया है। आयोग ने उद्योगों से निकलने वाले प्रदूषक कणों (PM) पर लगाम कसते हुए उत्सर्जन मानकों को और अधिक सख्त कर दिया है। अब फैक्ट्रियों के लिए 50 मिलीग्राम की नई सीमा अनिवार्य कर दी गई है।
दिल्ली-एनसीआर के आसमान में छाई धुंध और जहरीले पार्टिकुलेट मैटर (PM) को कम करने के लिए प्रशासन ने अब औद्योगिक इकाइयों पर अपनी सख्ती और बढ़ा दी है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने शनिवार को एक नया वैधानिक निर्देश जारी किया है, जिसके तहत उद्योगों के लिए पीएम उत्सर्जन मानक को घटा औक कम कर दिया गया है। यह कदम क्षेत्र की हवा को सांस लेने लायक बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल माना जा रहा है।
प्रदूषण के खिलाफ बड़ी स्ट्राइक: क्या है नया मानक?
अधिकारियों का मानना है कि संशोधित मानकों से वायु प्रदूषण को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। आईआईटी कानपुर और सीपीसीबी की सिफारिशों पर मुहर यह फैसला किसी जल्दबाजी का नतीजा नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहन वैज्ञानिक अध्ययन और विशेषज्ञों की राय शामिल है। आयोग ने स्पष्ट किया कि ये संशोधित मानक केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की सिफारिशों पर आधारित हैं, जिन्हें आईआईटी कानपुर द्वारा किए गए विस्तृत अध्ययनों के बाद तैयार किया गया था। सीपीसीबी द्वारा गठित एक तकनीकी समिति ने भी इन मानकों का पूर्ण समर्थन किया है। आयोग का मानना है कि 50 मिलीग्राम का यह पीएम उत्सर्जन मानक न केवल तकनीकी रूप से उद्योगों के लिए प्राप्त करने योग्य है, बल्कि वर्तमान पर्यावरणीय स्थितियों को देखते हुए यह अत्यंत आवश्यक भी है।
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इन उद्योगों पर रहेगी खास नजर
सीएक्यूएम का यह नया निर्देश दिल्ली-एनसीआर में संचालित उन सभी उद्योगों पर लागू होगा जो प्रदूषण के मुख्य स्रोत माने जाते हैं। इसमें सीपीसीबी द्वारा चिह्नित 17 अत्यधिक प्रदूषणकारी उद्योग श्रेणियां शामिल हैं। इसके अलावा, लाल श्रेणी के मध्यम और बड़े वायु-प्रदूषणकारी उद्योग भी सीधे तौर पर इसके दायरे में आएंगे। विशेष रूप से खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां, बॉयलर या थर्मल फ्लूइड हीटर का उपयोग करने वाले कपड़ा उद्योग और भट्टियों वाले धातु उद्योगों को इन मानकों का कड़ाई से पालन करना होगा।
अगस्त 2026 तक का मिला अल्टीमेटम
आयोग ने इन कड़े मानकों को जमीन पर उतारने के लिए उद्योगों को एक निश्चित समयसीमा भी प्रदान की है। निर्देशों के अनुसार, दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के एनसीआर क्षेत्रों में स्थित बड़े और मध्यम उद्योगों को 1 अगस्त 2026 तक नए नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करना होगा। वहीं, अन्य श्रेणियों के उद्योगों के लिए यह समयसीमा 1 अक्टूबर 2026 तय की गई है। संबंधित राज्यों के प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने अधिकार क्षेत्रों में इस तय समयसीमा के भीतर सख्त अनुपालन सुनिश्चित करें और लापरवाही बरतने वाली इकाइयों पर कार्रवाई करें।
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हवा सुधारने की दिशा में बड़ा कदम
दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की एक बड़ी वजह उद्योगों की चिमनियों से निकलने वाले प्रदूषक कण माने जाते हैं। ये उत्सर्जन न केवल सीधे तौर पर पीएम स्तर को बढ़ाते हैं, बल्कि हवा में मिलकर द्वितीयक प्रदूषक कणों के निर्माण में भी बड़ी भूमिका निभाते हैं, जिससे पूरे क्षेत्र की हवा खराब होती है। आयोग ने इससे पहले स्वच्छ ईंधन के अनिवार्य उपयोग और जैव ईंधन आधारित बॉयलरों के लिए भी मानक तय किए थे, लेकिन ताजा निर्देश सीधे उत्सर्जन की मात्रा को नियंत्रित करने पर केंद्रित है ताकि भविष्य में स्मॉग जैसी स्थितियों से निपटा जा सके।
Delhi ncr industrial pollution caqm tightens pm emission standards august 2026
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