
लाल आतंक को बड़ा झटका, 37 नक्सलियों ने डाले हथियार (फोटो- सोशल मीडिया)
Chhattisgarh Dantewada 37 Maoists Surrender: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में सुरक्षा बलों को लाल आतंक के खिलाफ एक ऐतिहासिक और बड़ी कामयाबी मिली है। शनिवार को एक साथ 37 खूंखार नक्सलियों ने हिंसा और बारूदी सुरंगों का रास्ता छोड़कर पुलिस के सामने हथियार डाल दिए। इन माओवादियों पर कुल मिलाकर 65 लाख रुपये का भारी-भरकम इनाम घोषित था और सरेंडर करने वालों में 12 महिलाएं भी शामिल हैं। जंगलों की खाक छानने वाले इन नक्सलियों ने अब खून-खराबा छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने और शांतिपूर्ण जीवन जीने का फैसला किया है, जो बस्तर में शांति की ओर बढ़ता एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
इस बड़े सरेंडर को अंजाम तक पहुंचाने में डीआरजी, बस्तर फाइटर्स, विशेष आसूचना शाखा और सीआरपीएफ की 111वीं व 230वीं वाहिनी की संयुक्त रणनीति ने अहम भूमिका निभाई। महीनों की निगरानी और सटीक ग्राउंड इंटेलिजेंस के बाद दंतेवाड़ा डीआरजी कार्यालय में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में इन्हें सरेंडर कराया गया। सरकार की पुनर्वास नीति के तहत इन सभी को तत्काल 50 हजार रुपये की सहायता राशि दी गई है। इसके साथ ही इनके लिए स्किल डेवलपमेंट ट्रेनिंग, खेती के लिए जमीन और सुरक्षित सामाजिक जीवन की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जा रही है ताकि ये सम्मान के साथ जीवन जी सकें।
सरेंडर करने वालों में कई ऐसे खूंखार चेहरे शामिल हैं जो पुलिस और सुरक्षा बलों के लिए लंबे समय से चुनौती बने हुए थे। इनमें कंपनी नंबर 2 का सदस्य भीमा उर्फ जहाज सबसे प्रमुख है। भीमा साल 2020 में हुए उस भयानक मिनपा हमले में शामिल था, जिसमें हमारे 26 जवान शहीद हुए थे और नक्सली उनके हथियार लूटकर ले गए थे। भीमा के अलावा 8-8 लाख रुपये के इनामी कुमली उर्फ अनिता मंडावी, गीता उर्फ लख्मी और रंजन मंडावी जैसे बड़े नाम भी शामिल हैं। ये सभी बड़ी मुठभेड़ों का हिस्सा रहे हैं और संगठन में इनकी गहरी पैठ थी। इनके साथ ही 5 लाख और 2 लाख के इनामी नक्सली भी कतार में हैं जो रोड काटने से लेकर पोस्टर लगाने तक का काम करते थे।
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यह कामयाबी पुलिस द्वारा चलाए जा रहे ‘लोन वर्राटू’ यानी घर वापस आइए अभियान का सीधा नतीजा है। पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 20 महीनों में दंतेवाड़ा में अब तक 165 इनामी नक्सलियों समेत कुल 508 माओवादी सरेंडर कर चुके हैं। इस बार सरेंडर करने वालों में क्रांति उर्फ पोदिये और हुंगी जैसी महिला नक्सली भी हैं, जो 2024 में गोबेल और थुलथुली के जंगलों में हुई पुलिस मुठभेड़ों में शामिल थीं। अब तक कुल 1160 माओवादी इस अभियान से जुड़कर हथियार डाल चुके हैं। सरकार का संदेश साफ है कि जंगलों में छिपे बाकी माओवादी भी हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज का हिस्सा बनें।






