Big Breaking: माओवादियों को लगा बड़ा झटका, सचिव तिप्परी तिरुपति उर्फ देव जी और अन्य ने किया आत्मसमर्पण

Operation Kagar: ऑपरेशन कगार के तहत माओवादी नेता तिप्परी तिरुपति, मल्ला राजिरेड्डी और 16 अन्य ने आत्मसमर्पण किया। 31 मार्च तक माओवादी आंदोलन खत्म करने का लक्ष्य है।
thippiri tirupathi Surrender
माओवादी तिप्परी तिरुपति ने किया आत्मसमर्पण (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Thippiri Tirupathi Surrender: तेलंगाना में चल रहे ‘ऑपरेशन कगार’ के तहत माओवादी संगठन को बड़ा झटका लगा है। माओवादी पार्टी के प्रमुख नेता तिप्परी तिरुपति उर्फ देवजी, पोलित ब्यूरो सदस्य मल्ला राजिरेड्डी उर्फ संग्राम और नरसिम्हा रेड्डी उर्फ गंगन्ना समेत कुल 16 माओवादियों ने 22 फरवरी को तेलंगाना की स्पेशल इंटेलिजेंस ब्रांच (SIB) के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इन सभी नेताओं को अगले दो दिनों में सार्वजनिक रूप से पेश किया जा सकता है और इस संबंध में आधिकारिक घोषणा जल्द होने की संभावना है।

राज्य सरकार ने ‘ऑपरेशन कगार’ के तहत 31 मार्च तक माओवादी आंदोलन को पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य रखा है। ऐसे में शीर्ष स्तर के नेताओं का आत्मसमर्पण सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी रणनीतिक सफलता माना जा रहा है। लगातार सुरक्षा बलों के दबाव, मुठभेड़ों और संगठन के अंदर बढ़ती अस्थिरता के कारण माओवादी ढांचा कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है।

लगातार मुठभेड़ों से मची खलबली

साल 2021 में रामकृष्णा के एनकाउंटर के बाद से माओवादी आंदोलन में भारी हलचल शुरू हो गई थी। इसके बाद हिडमा और संबाला केशव राव जैसे वरिष्ठ नेताओं के मारे जाने की घटनाओं ने संगठन की कमर तोड़ दी। कई अन्य महत्वपूर्ण नेता जैसे आशन्ना और मल्लोजुला वेणुगोपाल ने भी बाद में आत्मसमर्पण कर दिया। गणपति के विदेश भागने की खबरों ने भी संगठन की स्थिति को लेकर कई सवाल खड़े किए। वर्तमान में बड़े चोक्काराव की तलाश जारी बताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, अब जंगलों में सक्रिय माओवादियों की संख्या बेहद सीमित रह गई है।

कौन है तिप्परी तिरुपति?

आत्मसमर्पण करने वाले तिप्परी तिरुपति उर्फ देवजी मूल रूप से जगतियाल जिले के कोरुतला के निवासी हैं और नंबाला केशव राव के एनकाउंटर के बाद केंद्रीय माओवादी पार्टी के सचिव के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे थे। वहीं पेड्डापल्ली जिले के मल्ला राजिरेड्डी पोलित ब्यूरो के सक्रिय सदस्य थे और संगठन की रणनीतिक गतिविधियों में उनकी अहम भूमिका मानी जाती थी।

विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ने कराई मध्यस्था?

बताया जा रहा है कि इस आत्मसमर्पण प्रक्रिया में तेलंगाना के एक विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और कुछ सिविल राइट्स कार्यकर्ताओं ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई। यह भी चर्चा है कि राज्य का एक वरिष्ठ राजनीतिक नेता इस पूरी प्रक्रिया के संपर्क में था। लगातार मिल रही इन सफलताओं से संकेत मिल रहे हैं कि माओवादी आंदोलन अपने अंतिम चरण में पहुंच सकता है, हालांकि आधिकारिक पुष्टि और आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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