RBI की एमपीसी बैठक में तय होगा रेपो रेट, जानें क्या है विशेषज्ञों की राय

इस महीने की शुरुआत में सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई की दर-निर्धारण समिति - मौद्रिक नीति समिति यानी एमपीसी का पुनर्गठन किया। इसमें तीन नए नियुक्त बाहरी सदस्यों के साथ पुनर्गठित समिति सोमवार को अपनी पहली बैठक शुरू करेगी।
The Reserve Bank may once again keep the repo rate unchanged
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (सौजन्य : सोशल मीडिया)
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मुंबई : भारत का केंद्रीय बैंक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी आरबीआई इस हफ्ते होने वाली द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक में कुछ अहम फैसला लिया है। इस मीटिंग में बैंक ब्याज रेपो रेट में बदलाव ना करने का निर्णय ले सकता है। विशेषज्ञों ने इस विषय पर अपनी राय दी है।

उनका कहना है कि खुदरा मुद्रास्फीति अब भी चिंता का विषय बनी हुई है, तथा पश्चिम एशिया संकट के और बिगड़ने की संभावना है, जिसका असर कच्चे तेल और जिंस कीमतों पर पड़ेगा। इस महीने की शुरुआत में सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई की दर-निर्धारण समिति - मौद्रिक नीति समिति यानी एमपीसी का पुनर्गठन किया। इसमें तीन नए नियुक्त बाहरी सदस्यों के साथ पुनर्गठित समिति सोमवार को अपनी पहली बैठक शुरू करेगी।

रिटेल मुद्रास्फीति 4 प्रतिशत

एमपीसी के चेयरमैन आरबीआई गवर्नर शक्तिकान्त दास बुधवार 9 अक्टूबर को 3 दिन की बैठक के नतीजों की घोषणा करेंगे। भारतीय रिजर्व बैंक ने फरवरी, 2023 से रेपो दर को 6.5 प्रतिशत पर स्थिर रखा है। विशेषज्ञों का मानना ​​है कि दिसंबर में ही इसमें कुछ ढील की गुंजाइश है। सरकार ने सेंट्रल बैंक को यह सुनिश्चित करने का काम सौंपा है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई आधारित रिटेल मुद्रास्फीति 4 प्रतिशत (दो प्रतिशत ऊपर या नीचे) पर बनी रहे।

ब्याज दरों में कमी

वर्तमान परिप्रेक्ष्य में, विशेषज्ञों का मानना ​​है कि आरबीआई संभवतः अमेरिकी फेडरल रिजर्व का अनुसरण नहीं करेगा, जिसने बेंचमार्क दरों में 0.5 प्रतिशत की कमी की है। आरबीआई कुछ अन्य विकसित देशों के सेंट्रल बैंकों का भी अनुसरण नहीं करेगा, जिन्होंने ब्याज दरों में कमी की है।

मुद्रास्फीति धीरे-धीरे बढ़ रही

बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा, “हमें रेपो दर या एमपीसी के रुख में किसी बदलाव की उम्मीद नहीं है। इसका कारण यह है कि सितंबर और अक्टूबर में मुद्रास्फीति 5 प्रतिशत से ऊपर रहेगी और मौजूदा कम मुद्रास्फीति आधार प्रभाव के कारण है। इसके अलावा, मुख्य मुद्रास्फीति धीरे-धीरे बढ़ रही है।”

बदलाव की संभावना नहीं

सबनवीस ने कहा कि इसके अलावा, हाल ही में ईरान-इजराइल संकट और भी गहरा सकता है, और यहां अनिश्चितता है। “इसलिए, नए सदस्यों के लिए भी पहले की ही तरह संभावित विकल्प है। मुद्रास्फीति के पूर्वानुमान को 0.1-0.2 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है और सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी अनुमान में किसी बदलाव की संभावना नहीं है। सेंट्रल बैंक ने पिछली बार फरवरी, 2023 में रेपो दर को बढ़ाकर 6.5 प्रतिशत किया था और तब से, उसने दर को उसी स्तर पर बनाए रखा है।

न्यूट्रल करना उचित

इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि शुरुआती पहली तिमाही में जीडीपी वृद्धि एमपीसी के अनुमान से कम रहने और दूसरी तिमाही में रिटेल मुद्रास्फीति के कम रहने के अनुमान को देखते हुए हमारा मानना ​​है कि अक्टूबर, 2024 की नीतिगत समीक्षा में रुख को बदलकर न्यूट्रल करना उचित हो सकता है। उन्होंने कहा कि इसके बाद रेपो दर में दिसंबर, 2024 और फरवरी, 2025 में 0.25 प्रतिशत की कटौती हो सकती है।

10वीं बार स्थिर रह सकती है दर

सिग्नेचर ग्लोबल (इंडिया) लि. के संस्थापक एवं चेयरमैन प्रदीप अग्रवाल ने कहा कि रियल एस्टेट उद्योग और डेवलपर समुदाय के साथ घर खरीदारों को दी जाने वाली ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन सेंट्रल बैंक संभवत: लगातार 10वीं बार ब्याज दरों को यथावत रखेगा।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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