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नई दिल्ली: आज यानी 9 अक्टूबर को RBI की तीन दिवसीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) की समीक्षा बैठक RBI गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता में खत्म होगी। इस बैठक के फैसले की जानकारी गवर्नर शक्तिकांत आज अब से कुछ देर बाद देंगे। इस समिति में तीन नए बाहरी सदस्यों, राम सिंह, सौगत भट्टाचार्य और नागेश कुमार की नियुक्ति के बाद यह पहली बैठक रही है।
विशेषज्ञों की मानें तो RBI की इस द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक में प्रमुख ब्याज दर रेपो में कटौती की संभावना नहीं है। ऐसा भी कहना है कि खुदरा मुद्रास्फीति अब भी चिंता का विषय बनी हुई है, तथा पश्चिम एशिया संकट के और बिगड़ने की संभावना है, जिसका असर कच्चे तेल और जिंस कीमतों पर पड़ेगा। इस महीने की शुरुआत में सरकार ने RBI की दर-निर्धारण समिति – मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) का पुनर्गठन किया। इसमें तीन नए नियुक्त बाहरी सदस्यों के साथ पुनर्गठित समिति सोमवार को अपनी पहली बैठक शुरू की थी।
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वहीं आज MPC के चेयरमैन RBI गवर्नर शक्तिकान्त दास इस बैठक के नतीजों की घोषणा करेंगे। भारतीय रिजर्व बैंक ने फरवरी, 2023 से रेपो दर को 6.5 प्रतिशत पर यथावत रखा है। विशेषज्ञों का मानना है कि दिसंबर में ही इसमें कुछ ढील की गुंजाइश है। सरकार ने केंद्रीय बैंक को यह सुनिश्चित करने का काम सौंपा है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित खुदरा मुद्रास्फीति चार प्रतिशत (दो प्रतिशत ऊपर या नीचे) पर बनी रहे।
वर्तमान परिप्रेक्ष्य में देखें तो, विशेषज्ञों का मानना है कि RBI संभवतः अमेरिकी फेडरल रिजर्व का अनुसरण नहीं करेगा, जिसने बेंचमार्क दरों में 0.5 प्रतिशत की कमी की है। आरबीआई कुछ अन्य विकसित देशों के केंद्रीय बैंकों का भी अनुसरण नहीं करेगा, जिन्होंने ब्याज दरों में कमी की है।
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इसका कारण यह माना जा रहा है कि सितंबर और अक्टूबर में मुद्रास्फीति 5% से ऊपर रहेगी और मौजूदा कम मुद्रास्फीति आधार प्रभाव के कारण है। इसके अलावा, मुख्य मुद्रास्फीति धीरे-धीरे बढ़ रही है। इसके अलावा, हाल ही में ईरान-इजराइल संघर्ष और भी गहरा सकता है, और यहां अनिश्चितता है।ऐसे में, नए सदस्यों के लिए भी यथास्थिति सबसे संभावित विकल्प है।
हालांकि मुद्रास्फीति के पूर्वानुमान को 0.1-0.2 % तक कम किया जा सकता है और सकल घरेलू उत्पाद (GDP) अनुमान में किसी बदलाव की संभावना नहीं है। केंद्रीय बैंक ने पिछली बार फरवरी, 2023 में रेपो दर को बढ़ाकर 6.5 प्रतिशत किया था और तब से, उसने दर को उसी स्तर पर बनाए रखा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती पहली तिमाही में जीडीपी वृद्धि MPC के अनुमान से कम रहने और दूसरी तिमाही में खुदरा मुद्रास्फीति के कम रहने के अनुमान को देखते हुए यह कहना है कि अक्टूबर, 2024 की नीतिगत समीक्षा में रुख को बदलकर ‘तटस्थ’ करना उचित हो सकता है। इसके बाद रेपो दर में दिसंबर, 2024 और फरवरी, 2025 में 0.25 % की कटौती हो सकती है। वहीं रियल एस्टेट उद्योग और डेवलपर समुदाय के साथ घर खरीदार ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन केंद्रीय बैंक संभवत: लगातार दसवीं बार ब्याज दरों को इस बार भी यथावत ही रखेगा। (एजेंसी इनपुट के साथ)






