India Forex Reserves: विदेशी मुद्रा भंडार में आई बड़ी गिरावट! जानिए अब कितना बचा है भारत का फॉरेक्स रिजर्व

India Forex Reserves: फॉरेक्स रिजर्व किसी भी देश की आर्थिक स्थिति का महत्वपूर्ण संकेतक होता है। यह केंद्रीय बैंक को जरूरत पड़ने पर बाजार में हस्तक्षेप करने और रुपये स्थिर बनाए रखने में मदद करता है।
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(प्रतीकात्मक तस्वीर)
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India Forex Reserves: देश का विदेशी मुद्रा भंडार 15 मई को समाप्त सप्ताह में 8.09 अरब डॉलर घटकर 688.89 अरब डॉलर रहा। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। इससे पिछले सप्ताह विदेशी मुद्रा भंडार 6.29 अरब डॉलर बढ़कर 696.99 अरब डॉलर पर पहुंच गया था। पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने से पहले 27 फरवरी को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 728.49 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया था।

इसके बाद रुपये पर दबाव बढ़ने और विदेशी मुद्रा बाजार में आरबीआई द्वारा डॉलर की बिक्री के जरिए हस्तक्षेप किए जाने से मुद्रा भंडार में कई सप्ताह तक गिरावट दर्ज की गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 मई को देशवासियों से विदेशी यात्राएं कम करने, ईंधन की खपत घटाने और एक वर्ष तक सोने की खरीद से बचने की अपील भी की है, ताकि विदेशी मुद्रा की बचत की जा सके।

आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, 15 मई को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार का प्रमुख घटक विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां 6.48 अरब डॉलर घटकर 545.90 अरब डॉलर रह गईं। डॉलर के संदर्भ में व्यक्त विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में विदेशी मुद्रा भंडार में शामिल यूरो, पाउंड और येन जैसी गैर-अमेरिकी मुद्राओं के मूल्य में उतार-चढ़ाव का प्रभाव भी शामिल होता है।

सप्ताह के दौरान सोने के भंडार का मूल्य भी 1.54 अरब डॉलर घटकर 119.32 अरब डॉलर रह गया। आरबीआई ने कहा कि विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) 4.9 करोड़ डॉलर घटकर 18.82 अरब डॉलर रहा। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) में भारत की आरक्षित स्थिति भी 2.5 करोड़ डॉलर घटकर 4.85 अरब डॉलर रह गई।

आर्थिक मजबूती का अहम संकेतक

फॉरेक्स रिजर्व किसी भी देश की आर्थिक स्थिति का महत्वपूर्ण संकेतक होता है। यह केंद्रीय बैंक को जरूरत पड़ने पर बाजार में हस्तक्षेप करने और रुपए को स्थिर बनाए रखने की क्षमता देता है, साथ ही यह विदेशी निवेश के प्रवाह को भी दर्शाता है।

भारत के पास कैसे आती है विदेशी मुद्रा?

भारत को विदेशी मुद्रा कई प्रमुख स्रोतों से प्राप्त होती है, जिनमें निर्यात, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI), विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) और विदेशों में रहने वाले भारतीयों द्वारा भेजी जाने वाली रकम (Remittances) शामिल हैं। जब भारत दूसरे देशों को वस्तुएं और सेवाएं निर्यात करता है, तो उसके बदले विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है।

वहीं, विदेशों में कार्यरत भारतीय अपने परिवारों को जो धन भेजते हैं, वह भी देश के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) इन सभी माध्यमों से आने वाली विदेशी मुद्रा का प्रबंधन करता है और इसे देश के विदेशी मुद्रा भंडार के रूप में सुरक्षित रखता है।

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