राहुल गांधी का जर्मनी में दावा व सरकारी आंकड़े: क्या सच में डूब रहा है भारत का Manufacturing Sector?

India PMI Data: जर्मनी में राहुल गांधी ने भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में गिरावट का दावा किया। हालांकि, ताजा PMI और IIP के आंकड़े इस दावे के विपरीत सेक्टर में मजबूती और विस्तार की कहानी कह रहे हैं।
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जर्मनी में राहुल गांधी ने भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में गिरावट का दावा किया (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Manufacturing IIP Growth Rate: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपने जर्मनी दौरे के दौरान भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की हालत पर चिंता जताई है। म्यूनिख में बीएमडब्ल्यू (BMW) फैक्ट्री के दौरे पर उन्होंने कहा कि देश के विनिर्माण क्षेत्र में लगातार गिरावट आ रही है। राहुल गांधी के इस बयान ने देश की राजनीति और आर्थिक गलियारों में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। आइए जानते हैं कि सरकारी आंकड़े और इंडेक्स क्या वास्तव में इस गिरावट की पुष्टि करते हैं या सच्चाई कुछ और है।

मैन्युफैक्चरिंग PMI: क्या कहते हैं विस्तार के संकेत?

किसी भी देश के विनिर्माण क्षेत्र की सेहत नापने का सबसे सटीक पैमाना 'परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स' यानी PMI होता है। आर्थिक नियमों के अनुसार, अगर PMI 50 से ऊपर है, तो इसका मतलब है कि सेक्टर विस्तार कर रहा है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, भारत का मैन्युफैक्चरिंग PMI 55.7 दर्ज किया गया है, जो 50 के स्तर से काफी ऊपर है। इतना ही नहीं, अगस्त 2025 में यह आंकड़ा 59.8 के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था। यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि देश में नए ऑर्डर, उत्पादन और रोजगार के अवसरों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

IIP और उत्पादन के आंकड़ों की हकीकत

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) के आंकड़े भी राहुल गांधी के दावों को चुनौती देते नजर आते हैं। हालांकि अक्टूबर में IIP ग्रोथ 0.4% रही, जिसे धीमा कहा जा सकता है, लेकिन सितंबर 2025 में यही ग्रोथ 4.8% के करीब थी। जुलाई के आंकड़ों पर नजर डालें तो मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने 5.4% की सालाना ग्रोथ दर्ज की थी। ये उतार-चढ़ाव किसी सेक्टर की गिरावट नहीं बल्कि बाजार की सामान्य हलचल माने जाते हैं। कुल मिलाकर उत्पादन का ग्राफ सकारात्मक बना हुआ है और गिरावट के कोई ठोस प्रमाण नहीं मिलते।

GDP में योगदान और सरकारी नीतियों का असर

वर्तमान में भारतीय अर्थव्यवस्था (GDP) में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का सीधा योगदान लगभग 17% है। भले ही सरकार ने इसे 25% तक ले जाने का लक्ष्य रखा है और अभी वहां तक पहुंचना बाकी है, लेकिन 17% पर स्थिरता को गिरावट नहीं कहा जा सकता।

केंद्र सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) जैसी योजनाओं ने विदेशी निवेश को आकर्षित किया है। इससे न केवल घरेलू उत्पादन बढ़ा है बल्कि भारत अब दुनिया के लिए एक बड़े एक्सपोर्ट हब के रूप में भी उभर रहा है, जो सेक्टर की मजबूती का प्रमाण है।

दावों और आंकड़ों के बीच का अंतर

तमाम वैश्विक रेटिंग एजेंसियां और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) भारत की विकास दर के अनुमान को बढ़ा रहे हैं। ऐसे में राहुल गांधी का यह कहना कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर संकुचित हो रहा है, तथ्यों से परे नजर आता है।

बीजेपी ने भी आंकड़ों के आधार पर उनके दावों को भ्रामक बताया है। जमीनी हकीकत यह है कि भारतीय मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर एक स्थिर और ग्रोथ वाले ट्रेंड पर है। तकनीकी इंडेक्स और सरकारी डेटा स्पष्ट संकेत देते हैं कि देश की विनिर्माण अर्थव्यवस्था एक मजबूत आधार पर आगे बढ़ रही है।

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