संसद में पैसे लेकर सवाल पूछने के आरोप में महुआ को राहत, CBI की चार्जशीट पर रोक; लोकपाल का फैसला रद्द

कैश फॉर क्वेरी केस में TMC की सांसद Mahua Moitra को अदालत ने बड़ी राहत दी, दिल्ली हाईकोर्ट ने CBI को चार्जशीट दायर करने की मंजूरी वाले लोकपाल के फैसले पर रोक लगा दी है।
Mahua Moitra Cash for Query Case Delhi High Court Relief on CBI Chargesheet
महुआ मोइत्रा को कैश फॉर क्वेरी मामले में बड़ी राहत (फोटो- सोशल मीडिया)
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TMC MP Mahua Moitra Cash for Query Case News: कैश फॉर क्वेरी मामले में पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने सीबीआई को महुआ के खिलाफ चार्जशीट दायर करने की मंजूरी देने वाले लोकपाल के फैसले को रद्द कर दिया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि लोकपाल ने कानून के प्रावधानों को सही ढंग से नहीं समझा और महुआ की दलीलों पर बिना गौर किए ही फैसला सुना दिया। यह फैसला महुआ मोइत्रा और उनकी पार्टी के लिए एक बड़ी जीत मानी जा रही है।

दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की बेंच ने इस मामले में लोकपाल के आदेश पर रोक लगाते हुए कड़े निर्देश दिए हैं। अदालत ने लोकपाल को आदेश दिया है कि वह महुआ मोइत्रा की दलीलों पर ठीक से विचार करें और कानून के मुताबिक एक महीने के भीतर नया फैसला लें। इससे पहले लोकपाल ने सीबीआई को सीधे आरोप पत्र दायर करने की मंजूरी दे दी थी, जिसे महुआ ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। कोर्ट ने माना कि मंजूरी देने की प्रक्रिया में खामियां थीं।

दलीलों में क्या कहा गया?

सुनवाई के दौरान महुआ मोइत्रा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता निधेश गुप्ता ने तर्क दिया कि लोकपाल का फैसला प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का घोर उल्लंघन है। उन्होंने लोकपाल अधिनियम की धारा 20(7) का हवाला देते हुए कहा कि अभियोजन की मंजूरी देने से पहले आरोपी की बात सुनी जानी चाहिए, लेकिन लोकपाल ने रबर स्टैम्प की तरह काम किया। दूसरी तरफ सीबीआई के वकील एस.वी. राजू ने दलील दी कि आरोपी को केवल लिखित टिप्पणी देने का अधिकार है, मौखिक सुनवाई का नहीं। शिकायतकर्ता निशिकांत दुबे के वकील जीवेश नागरथ ने भी दावा किया कि कानून की पूरी प्रक्रिया का पालन किया गया था।

संसद का पासवर्ड और विवाद

यह पूरा विवाद तब सुर्खियों में आया जब बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष से शिकायत करते हुए आरोप लगाया कि महुआ ने संसद में सवाल पूछने के बदले उद्योगपति दर्शन हीरानंदानी से रिश्वत ली। महुआ मोइत्रा ने बाद में स्वीकार किया था कि उन्होंने अपना संसदीय लॉग-इन और पासवर्ड हीरानंदानी को दिया था, लेकिन उन्होंने नकद पैसे लेने के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद लोकपाल को इस मामले पर नए सिरे से विचार करना होगा, जिससे सीबीआई की कार्रवाई फिलहाल थम गई है।

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