
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (सोर्स-सोशल मीडिया)
Economic Review 2025-26 Education India: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में आर्थिक समीक्षा 2025-26 पेश करते हुए बताया कि भारत की स्कूली शिक्षा प्रणाली अब दुनिया की सबसे बड़ी प्रणालियों में से एक बन गई है। उच्च शिक्षण संस्थानों की संख्या और छात्रों के नामांकन में पिछले एक दशक के दौरान रिकॉर्ड तोड़ वृद्धि दर्ज की गई है। सरकार का मुख्य लक्ष्य अब राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के माध्यम से 2030 तक सभी स्कूली स्तरों पर शत-प्रतिशत नामांकन हासिल करना है। इस समीक्षा के अनुसार शिक्षा को रोजगारपरक बनाने के लिए कौशल विकास और व्यावसायिक शिक्षा के निर्बाध एकीकरण पर भविष्य में सबसे अधिक जोर दिया जाएगा।
भारत वर्तमान में 14.71 लाख विद्यालयों के साथ दुनिया की सबसे बड़ी स्कूली शिक्षा प्रणालियों में से एक का सफल संचालन कर रहा है जिसमें 24.69 करोड़ विद्यार्थी शिक्षा पा रहे हैं। इस विशाल और जटिल व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए देश के 1.01 करोड़ से अधिक शिक्षक अपना निरंतर सहयोग प्रदान कर रहे हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लक्ष्यों के अनुरूप वर्ष 2030 तक प्री-प्राइमरी से माध्यमिक शिक्षा तक शत-प्रतिशत सकल नामांकन अनुपात (GER) हासिल करने की दिशा में स्थिर प्रगति जारी है।
देश में उच्च शिक्षण संस्थानों (HEI) की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है जो वर्ष 2014-15 में 51,534 थी और जून 2025 तक बढ़कर 70,018 हो गई है। विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के बढ़ते नेटवर्क के कारण उच्च शिक्षा में विद्यार्थियों का नामांकन भी वर्ष 2021-22 के 4.33 करोड़ से बढ़कर 2022-23 में 4.46 करोड़ तक पहुंच गया है। वर्तमान में प्राथमिक स्तर पर सकल नामांकन अनुपात 90.9 है, जबकि उच्च प्राथमिक में यह 90.3 और माध्यमिक स्तर पर 78.7 दर्ज किया गया है।
भारत के पास अब 23 IIT, 21 IIM और 20 एम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थान हैं जिन्होंने देश की शैक्षणिक साख को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी ऊंचा किया है। जंजीबार और अबू धाबी में IIT के दो अंतरराष्ट्रीय परिसरों की शुरुआत करके भारत ने अपनी उच्च शिक्षा प्रणाली का वैश्विक विस्तार करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। इसके अलावा एकेडेमिक बैंक ऑफ क्रेडिट के दायरे में 2660 संस्थानों को लाया गया है और छात्रों के लिए 4 करोड़ 60 लाख से अधिक डिजिटल पहचान पत्र जारी किए गए हैं।
आर्थिक समीक्षा के अनुसार विशाल मानव संसाधन को उच्च गुणवत्ता वाली मानव पूंजी में बदलने के लिए स्कूली शिक्षा के वर्षों को बढ़ाकर पंद्रह वर्ष करने की आवश्यकता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के 5+3+3+4 ढांचे के माध्यम से बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा, आधारभूत साक्षरता और संख्याज्ञान को व्यावसायिक कौशल के साथ जोड़ने पर काम किया जा रहा है। माध्यमिक स्कूलों में व्यवस्थित कौशल निर्माण की सुविधा प्रदान करने का उद्देश्य छात्रों को पढ़ाई के दौरान ही भविष्य के रोजगार के लिए पूरी तरह सक्षम बनाना है।
देश के 33 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 13,076 पीएमश्री स्कूलों की स्थापना ने उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा तक सार्वभौमिक पहुंच को और अधिक आसान और सुलभ बना दिया है। जादुई पिटारा और भारतीय भाषा पुस्तक जैसी योजनाओं के माध्यम से बच्चों को उनकी स्थानीय भाषाओं में आकर्षक शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराकर सीखने की प्रक्रिया को रोचक बनाया जा रहा है। समग्र शिक्षा अभियान और पोषण शक्ति निर्माण जैसी योजनाएं न केवल नामांकन बढ़ा रही हैं बल्कि समाज में शिक्षा की समानता को भी बढ़ावा दे रही हैं।
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पीएलएफएस 2023-24 के अनुसार 14-18 वर्ष के केवल 0.97 प्रतिशत युवाओं को ही अब तक संस्थागत प्रशिक्षण मिला है जबकि लगभग 92 प्रतिशत को कोई प्रशिक्षण नहीं मिला है। भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश का लाभ उठाने के लिए इस भारी अंतर को दूर करना अत्यंत महत्वपूर्ण है ताकि युवाओं को बाजार की मांग के अनुरूप तैयार किया जा सके। यूजीसी और एआईसीटीई द्वारा ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ श्रेणी की शुरुआत से संस्थानों में अनुभवी विशेषज्ञों के माध्यम से संकाय संसाधनों को बढ़ाने का नया मार्ग प्रशस्त हुआ है।






