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सावधान! रेंट की जगह लोन पर घर लेने की है प्लानिंग? तो जान लें एक्सपर्ट की ये चेतावनी
Home Loan: मीडिल क्लास किराए पर घर लेने की जगह लोन पर घर खरीदने को ही सही फैसला मानता है। हालांकि, फाइनेंशियल इन्फ्लुएंसर ने इस अवधारणा को गलत करार देते हुए खरीदारों को चेतावनी दी है।
- Written By: मनोज आर्या

(कॉन्सेप्ट फोटो)
EMI Trap: मिडिल क्लास को हमेशा ये सुझाव दिया जाता है कि किराए की मकान से अच्छा है कि खुद का घर खरीद लो। इस वर्ग के ज्यादातर लोग किराए पर घर लेने की जगह लोन पर घर खरीदने को प्राथमिकता भी देते हैं। हालांकि, फाइनेंशियल इन्फ्लुएंसर अक्षत श्रीवास्तव ने मिडिल क्लास की इस अवधारणा को गलत बताते हुए उन्हें अलर्ट किया है। उन्होंने लोगों को जल्दबाजी में घर खरीदने से मना किया है। इसके साथ ही वह ‘किराया चुकाना EMI चुकाने जैसे’ आइडिया को गलत बताया है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए अक्षत ने तर्क दिया कि यह दिखने में बेहद आसान लगने वाला आइडिया लोगों को कई सालों तक कर्ज के बंधन में फंसा सकता है, जबकि वे लंबे समय के नतीजों पर पूरी तरह से विचार नहीं करते।
EMI पर घर खरीदना कितना रिस्की?
श्रीवास्तव ने समझाया कि जहां बहुत से लोग मानते हैं कि किराए के बजाय EMI देना एक समझदारी भरा वित्तीय कदम है, वहीं हकीकत इससे कहीं ज्यादा पेचीदा और जटिल है। अपने सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने लिखा कि- “आप कई सालों तक EMI चुकाने के बंधन में बंध जाते हैं। यह आपकी वित्तीय आर्थिक स्वतंत्रता को खत्म कर देता है। उन्होंने यह भी बताया कि जिंदगी में आने वाले बदलाव जैसे नौकरी छूटना, शहर बदलना, या निजी जरूरतों का बदलना लंबे होम लोन को जोखिम भरा बना सकते हैं।
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समय के साथ घट रही फ्लैट्स की कीमतें
फाइनेंशियल इन्फ्लुएंसर ने कुछ और चुनौतियां भी बताईं, उन्होंने कहा कि अंडर-कंस्ट्रक्शन घरों में प्रोजेक्ट में देरी हो सकती है, जो आपके समय को खराब कर सकती है, और यह भी संभव है कि रियल एस्टेट एक बढ़ती हुई नहीं, बल्कि घटती हुईसंपत्ति बन जाए। दिल्ली के द्वारका और रोहिणी जैसे इलाकों का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि वहां कई फ्लैट्स की कीमत समय के साथ कम हुई है।
श्रीवास्तव ने लिखा कि सिर्फ 15-20 साल के लोन में खुद को बांधने की बाध्यता ही पागलपन है। उन्होंने आगे जोड़ा कि जैसे-जैसे व्यक्ति की उम्र बढ़ती है, लंबी अवधि की वित्तीय प्रतिबद्धताओं से होने वाले तनाव को कोई भी स्प्रेडशीट सही मायने में नहीं माप सकता। जो लोग 30 की उम्र में घर खरीदने के बारे में सोच रहे हैं, श्रीवास्तव ने उन्हें सलाह दी कि वे यह सुनिश्चित करें कि प्रॉपर्टी वास्तव में एक मजबूत निवेश हो, जिसकी कीमत मुद्रास्फीति को समायोजित करने के बाद भी बढ़ सके।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा कि घर खरीदने की सबसे बड़ी छिपी हुई लागत पैसा नहीं है, बल्कि यह विकल्प चुनने की स्वतंत्रता है। 20 साल की EMI आपके करियर के चुनाव, कहीं भी जाने की आजादी और वित्तीय स्वतंत्रता को बदल देती है। वहीं, एक अन्य यूजर ने लिखा कि आपका ‘फ्लैट’ सिर्फ एक ‘फ्लैट’ है, यह ‘घर’ नहीं है। अगर आप जमीन का एक टुकड़ा नहीं खरीद सकते, तो किराए पर रहें। वहीं एक यूजर ने लिखा- “जब तक ऐसा होता रहेगा, तब तक NRI और पैसा डालेंगे और कुछ ही सालों में 1 करोड़ रुपये के फ्लैट की कीमत बढ़ाकर 2 करोड़ रुपये कर देंगे।
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‘लंबे समय तक कर्ज में फंस सकते हैं’
एक और यूजर ने कमेंट में लिखा कि किराया= EMI। यह फॉर्मूला जोखिम को नजरअंदाज करता है। एक EMI आपको दशकों के लिए बांध देती है, जबकि आपकी नौकरी, शहर और प्रॉपर्टी की कीमत सब बदल सकते हैं। अगर आप पूरी तरह से निश्चित नहीं हैं, तो किराए पर रहना ज्यादा सुरक्षित और तर्कसंगत विकल्प है।
Emi will take away your freedom expert warns middle class trapped in debt
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