होम-ऑटो लोन लेने वालों को बड़ा झटका! देश के 62% लोगों पर गिरेगी गाज, RBI बदलने जा रहा है यह नियम

CIBIL Score New Rules: एक्सपर्ट्स के अनुसार, कई मामलों में बैंक अतिरिक्त गारंटी या कोलेटरल की मांग कर सकते हैं। देश में करीब 62 फीसदी लोन लेने वाले आवेदकों का CIBIL स्कोर 730 से कम है।
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CIBIL स्कोर को लेकर RBI का नया नियम, (सोर्स- AI)
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RBI New Rules On CIBIL Score: क्या आप भी अपने CIBIL स्कोर को लेकर सिरियस नहीं थे? अगर इसका जवाब हां है तो, अब आपको इसके बारे में सोचने की जरूरत है। अगर आपका CIBIL स्कोर 730 से कम है तो भविष्य में आपको होम लोन, ऑटो लोन और एजुकेशनल लोन लेने के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

दरअसल, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नए 'ECL Direction-2026' लागू होने के बाद बैंक रिस्क वाले कस्टमर्स को लोन देने में अधिक सतर्कता बरतेंगे। बैंकिंग सेक्टर के जानकारों का मानना है कि कम क्रेडिट स्कोर वाले कस्टमर को या तो लोन मिलने में परेशानी होगी या फिर उन्हें लोन के लिए ज्यादा ब्याज चुकाना होगा।

होम और ऑटो लोन होगा महंगा!

एक्सपर्ट्स का कहना है कि कई मामलों में बैंक अतिरिक्त गारंटी या कोलेटरल की भी मांग कर सकते हैं। आंकड़ों के अनुसार, देश में करीब 62 फीसदी लोन लेने वाले आवेदकों का CIBIL स्कोर 730 से कम है, जो कि काफी चिंताजनक है। ऐसे में आरबीआई की नई नियमों के लागू होने के बाद से बड़ी संख्या में लोगों के लिए होम, ऑटो और एजुकेशन लोन लेना काफी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

कब से लागू होगा यह नया नियम?

भारतीय रिजर्व बैंक का ECL (Expected Credit Loss ) Direction-2026 एक अप्रैल 2027 से लागू होगा। वर्तमान व्यवस्था में बैंक किसी लोन के लिए एनपीए बनने के बाद उसके लिए प्रावधान करते हैं। आमतौर पर ऐसा तब होता है, जब कोई कस्टमर 90 दिनों तक लोन का ईएमआई नहीं जमा करता। नए नियम में बैंकों को संभावित जोखिम का अनुमान पहले ही लगाना होगा और उसके हिसाब से अलग से रकम रखनी होगी।

यानी लोन डूबने का इंतजार नहीं किया जाएगा और संभावित नुकसान के लिए पहले से तैयारी करनी होगी। एक्स्पर्ट्स का मानना है कि इस नए नियम से बैंकिंग सेक्टर के लाभ पर प्रेशर बढ़ सकता है और कुल मिलाकर करीब 42 हजार करोड़ रुपये तक का असर पड़ सकता है।

कम क्रेडिट स्कोर पर ज्यादा ब्याज

एक्सपर्ट्स का कहना है कि केंद्रीय बैंक के नए नियम लागू होने के बाद बैंक उन कस्टमर्स पर ज्यादा ब्याज चार्ज कर सकते हैं जिनमें डिफॉल्ट का रिस्क है। वहीं, बेहतर क्रेडिट स्कोर वाले कस्टमर्स को ब्याज दरों में छूट और बेहतर ऑफर पर लोन मिलने की संभावना बढ़ सकती है। इसी वजह से बैंक 730 से या उससे ज्यादा CIBIL स्कोर वाले ग्राहकों पर ज्यादा फोकस करेंगे। उद्योग के अनुमान के अनुसार, देश में करीब 7 करोड़ ऐसे ग्राहक हैं जिनका क्रेडिट स्कोर 730 या उससे ज्यादा है।

बैंक कैसे लगाएंगे रिस्क का अनुमान?

ECL फ्रेमवर्क के तहत बैंक मौजूदा भुगतान स्थिति देखने के साथ कई दूसरे इंडिकेटर्स का भी एनालिसिस करेंगे जिनमें शामिल हैं-

  • ग्राहक का पेमेंट रिकॉर्ड
  • CIBIL स्कोर में बदलाव
  • इनकम में कमी या अस्थिरता
  • नौकरी जाने का रिसक
  • लोन-टू-वैल्यू (LTV) रेशियो
  • मौजूदा लोन का स्टेटस

डिफॉल्ट पर कई गुना बढ़ेगा प्रावधान

नए नियमों के तहत बैंकों को डिफॉल्ट की स्थिति में पहले के मुकाबले काफी ज्यादा रकम अलग रखनी होगी। उदाहरण के लिए 25 लाख रुपये के होम लोन पर-

  • 30 दिन की EMI डिफॉल्ट होने पर अभी करीब 10 हजार रुपये का प्रावधान करना पड़ता है, जो बढ़कर 25 हजार रुपये हो जाएगा।
  • 31 से 60 दिन तक डिफॉल्ट रहने पर ये रकम 10 हजार रुपये से बढ़कर 1.25 लाख रुपये तक पहुंच सकती है।
  • 90 दिन से ज्यादा के डिफॉल्ट की स्थिति में अभी 3.75 लाख रुपये (15%) का प्रावधान करना पड़ता है, जो बढ़कर 5 लाख रुपये हो जाएगा।
  • इससे बैंकों की लागत बढ़ेगी और वे कर्ज देने के दौरान वो ज्यादा सावधानी बरतेंगे।

ग्राहकों पर नए नियम का क्या असर?

एक्सपर्ट के अनुसार, ECL फ्रेमवर्क बैंकिंग सिस्टम को मजबूत बनाने और जोखिम की पहचान पहले करने की दिशा में बड़ा कदम है। हालांकि, इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ सकता है, जिनका क्रेडिट स्कोर कमजोर है। ऐसे ग्राहकों को समय पर EMI भुगतान, क्रेडिट कार्ड बिल की रेगुलर पेमेंट और कम कर्ज देनदारी बनाए रखने पर ध्यान देना होगा।

बेहतर CIBIL स्कोर ही भविष्य में सस्ती ब्याज दर और आसान लोन मंजूरी की सबसे बड़ी कुंजी बन सकता है। 1 अप्रैल 2027 से नियम लागू होने के बाद बैंकों की लोन देने की रणनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है, जहां फोकस लोन डिस्ट्रीब्यूशन के साथ ही ग्राहक की क्रेडिट क्वालिटी और जोखिम क्षमता पर रहेगा।

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