3 साल बाद सोमवती अमावस्या पर बन रहा ऐसा दुर्लभ संयोग, जीवन में आएगी पॉज़िटिविटी, करें ये काम

Somvati Amavasya 2026 Remedies: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस बार सोमवती अमावस्या पर लगभग 3 साल बाद एक दुर्लभ और शुभ संयोग बन रहा है। जानिए इस दिन कौन-से कार्य करना शुभ माना गया है।
Somvati Amavasya Positivity And Good Fortune
सोमवती अमावस्या ( सौ.सोशल मीडिया)
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Somvati Amavasya Positivity And Good Fortune: 15 जून को ज्येष्ठ अधिकमास की सोमवती अमावस्या का दुर्लभ संयोग बनने जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह संयोग करीब तीन साल बाद देखने को मिलता है। अधिकमास जगत के पालनहार श्री हरि भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है, वहीं अमावस्या तिथि पितरों की शांति और दान-पुण्य के लिए विशेष महत्व रखती है। चलिए जानते हैं इस दिन आपको क्या करना चाहिए और क्या नहीं।

सोमवती अमावस्या का महत्व

धर्म शास्त्रों में बताया गया है कि, सोमवती अमावस्या के दिन दुर्लभ संयोग बनने जा रहा है। इस दिन किए गए दान-पुण्य और सेवा कार्यों से पितरों की कृपा मिलती है। माना जाता है कि पितरों का आशीर्वाद मिलने पर परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।

सोमवती अमावस्या के दिन क्या करना होता है शुभ?

  • गरीब , असहाय को भोजन कराएं

हिंदू धर्म शास्त्रों में सोमवती अमावस्या के दिन गरीब , असहाय को भोजन कराना शुभ माना गया है। अगर सोमवती अमावस्या के दिन किसी भूखे व्यक्ति, साधु-संत, गरीब परिवार या जरूरतमंद को अन्न का दान कराया जाए या फिर भोजन कराया जाए, तो इसे बेहद पुण्यदायी माना जाता है। आप अपनी क्षमता के अनुसार भोजन, राशन या अनाज का दान कर सकते हैं।

  • जूते-चप्पल का करें दान

सोमवती अमावस्या के दिन गरीब , असहाय को भोजन कराने के अलावा,जूते-चप्पल का दान करना भी शुभ होता हैं। मान्यता है कि इस तरह के दान करने से पितरों को खुशी मिलती है और वह आप पर अपना आशीर्वाद बरसाते हैं। साथ ही, यह दान जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में सहायक हो सकता है।

  • तुलसी चालीसा का करें पाठ

सोमवती अमावस्या पर तुलसी चालीसा का पाठ परम कल्याणकारी माना गया है। मान्यता है कि अगर आप इस दिन ये पाठ करते हैं तो आपके जीवन में कई तरह के बदलाव होते हैं और पितरों का भी आशीर्वाद मिलता है।

  • काले तिल से करें तर्पण

अमावस्या के दिन काले तिल का विशेष महत्व माना गया है। सुबह स्नान के बाद जल में काले तिल मिलाकर पितरों का स्मरण करते हुए तर्पण किया जा सकता है। साथ ही, तिल का दान भी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे पितृ दोष से जुड़ी परेशानियों में राहत मिल सकती है।

  • दीपदान करें

सोमवती अमावस्या पर दीपदान करना भी बहुत शुभ बताया गया है। मंदिर, नदी के किनारे या पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाने की परंपरा काफी प्रचलित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीपदान अंधकार को दूर कर जीवन में सकारात्मक ऊर्जा (Positive Energy) का संचार करता है और पितरों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का माध्यम भी माना जाता है।

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