बिहार की सियासत में ‘नंबर 2’ बने श्रवण कुमार, नीतीश कुमार ने विधायक दल की कमान सौंपकर चला बड़ा मास्टरस्ट्रोक
Shravan Kumar: बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव करते हुए नीतीश कुमार ने अपने सबसे भरोसेमंद साथी श्रवण कुमार को जेडीयू विधायक दल का नेता नियुक्त किया है।
- Written By: अमन उपाध्याय
श्रवण कुमार, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Shravan Kumar Appointed Jdu Legislative: बिहार की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री पद और विधान परिषद से इस्तीफा देने के बाद नीतीश कुमार ने भले ही अपनी भूमिका बदलने का फैसला किया हो लेकिन पार्टी और सत्ता के समीकरणों पर उनकी पकड़ आज भी उतनी ही मजबूत है। सोमवार को पटना में नीतीश कुमार के आवास पर हुई जेडीयू विधायकों की महत्वपूर्ण बैठक के बाद, नीतीश कुमार ने खुद अपने सबसे करीबी और भरोसेमंद नेता श्रवण कुमार को जेडीयू विधायक दल का नया नेता घोषित किया है।
नीतीश के सबसे भरोसेमंद ‘हनुमान’
श्रवण कुमार को जेडीयू में अब आधिकारिक तौर पर ‘नंबर दो’ की स्थिति में देखा जा रहा है। नीतीश कुमार के साथ उनका रिश्ता महज राजनीतिक नहीं बल्कि दशकों पुराना है। उन्होंने अपना राजनीतिक सफर पांच दशक पहले नीतीश कुमार के साथ ही शुरू किया था। 1974 के जयप्रकाश नारायण (JP) आंदोलन से उपजे इन दोनों नेताओं की केमिस्ट्री आज भी बरकरार है। श्रवण कुमार न केवल नीतीश के गृह जनपद नालंदा से आते हैं बल्कि वे उसी कुर्मी समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं जिससे नीतीश कुमार स्वयं आते हैं।
जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों की बिसात
नीतीश कुमार का यह फैसला बेहद सोची-समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में भाजपा नेता सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद, जेडीयू कोटे से दो उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी (भूमिहार) और बिजेंद्र यादव बनाए गए हैं। ऐसे में अपने कोर वोटबैंक ‘कुर्मी’ समाज को यह संदेश देना आवश्यक था कि सत्ता के शीर्ष पर उनकी भागीदारी कम नहीं हुई है। श्रवण कुमार को विधायक दल का नेता बनाकर नीतीश ने कुर्मी समुदाय के बीच अपनी पकड़ को और मजबूत किया है।
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पांच दशक का अनुभव
श्रवण कुमार की ताकत उनकी जमीनी पकड़ है। वे 1995 से लगातार नालंदा विधानसभा सीट से विधायक निर्वाचित होते आ रहे हैं। समता पार्टी के दिनों से ही वे संगठन को मजबूत करने में सक्रिय रहे हैं। नीतीश सरकार में वे ग्रामीण विकास और संसदीय कार्य जैसे महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री भी रह चुके हैं। उनकी कार्यक्षमता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके कार्यकाल के दौरान ग्रामीण विकास के कार्यों में बजट की पूरी राशि का सदुपयोग हुआ, जिसने नीतीश के उन पर भरोसे को और गहरा कर दिया।
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भविष्य की राजनीति का केंद्र
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बीच, श्रवण कुमार की यह नियुक्ति जेडीयू के भीतर सत्ता के संतुलन को बनाए रखने के लिए की गई है। जब 2005 में नीतीश पहली बार मुख्यमंत्री बने थे तब श्रवण कुमार मुख्य सचेतक की भूमिका में थे। आज जब बिहार की राजनीति एक मोड़ पर खड़ी है तब नीतीश ने एक बार फिर अपने सबसे पुराने ‘चट्टानी समर्थक’ पर दांव लगाकर यह साफ कर दिया है कि वे भविष्य की चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
