
KC त्यागी, नीतीश कुमार (Image- Social Media)
KC Tyagi Expelled from JDU: जेडीयू नेता केसी त्यागी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ देने की मांग उठाई। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेटर लिख दिया। लेकिन जेडीयू आलाकमान उनके इस कदम से नाराज हो गया। अब खबर आ रही है कि केसी त्यागी को जेडीयू ने पार्टी से निकाल दिया है। इससे पहले जेडीयू ने कहा था कि- ‘केसी त्यागी से पार्टी की विचारधारा और पार्टी के आधिकारिक स्टैंड से कोई लेना नहीं होता है।’
मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के मुताबिक बताया गया कि के.सी. त्यागी और पार्टी के बीच सम्मानजनक अलगाव हो चुका है। हालांकि, पार्टी नेतृत्व ने अभी तक त्यागी के खिलाफ कोई औपचारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं करने का निर्णय लिया है। इसका कारण उनके पार्टी के साथ लंबे और पुराने संबंध बताए जा रहे हैं। जेडीयू के अंदर यह माना जा रहा है कि त्यागी ने पार्टी के साथ लंबे समय तक महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं, जिससे नेतृत्व किसी भी प्रकार के टकराव से बचना चाहता है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, के.सी. त्यागी अब जेडीयू की नीतियों, फैसलों और आधिकारिक रुख का प्रतिनिधित्व नहीं करते। भविष्य में पार्टी की ओर से जारी होने वाले बयानों और राजनीतिक रुख में उनका कोई प्रभाव नहीं होगा। जेडीयू नेतृत्व ने इस मामले में संतुलित रुख अपनाते हुए संकेत दिया है कि यह अलगाव पूरी तरह शांतिपूर्ण और आपसी सहमति से हुआ है। जेडीयू के अंदरूनी हलकों में इसे एक युग के अंत के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि पार्टी नेतृत्व अपनी आगे की रणनीति और संगठनात्मक मजबूती पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विश्वसनीय नेताओं में पूर्व सांसद केसी त्यागी का नाम प्रमुख रूप से लिया जाता है। 1984 में, जब पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद पूरे देश में कांग्रेस के प्रति सहानुभूति लहर थी, उसी चुनाव में गाजियाबाद-हापुड़ लोकसभा सीट से केसी त्यागी पहली बार चुनावी मैदान में उतरे थे। उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की पार्टी राष्ट्रीय लोकदल ने उम्मीदवार बनाया था, लेकिन त्यागी को कांग्रेस के केदारनाथ सिंह से हार का सामना करना पड़ा।
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दिल्ली और राष्ट्रीय मीडिया में जेडीयू की सबसे मुखर आवाज माने जाने वाले केसी त्यागी ने 2013 में राज्यसभा के लिए हुए उपचुनाव में सांसद के रूप में प्रवेश किया। उनका कार्यकाल फरवरी 2013 से जुलाई 2016 तक रहा। यह उपचुनाव उस समय हुआ जब जेडीयू के नेता उपेंद्र कुशवाहा ने राज्यसभा से इस्तीफा दिया था, साथ ही उन्होंने जेडीयू की प्राथमिक सदस्यता भी छोड़ दी थी।






