
सीएम नीतीश कुमार। इमेज-सोशल मीडिया
JDU News: जदयू ने विधानसभा चुनाव के दौरान दलीय और एनडीए के प्रत्याशियों के खिलाफ गतिविधियों के आरोप में अपने एक दर्जन नेताओं को पार्टी से छह वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया है। इन नेताओं पर लगे आरोपों की जांच के लिए जदयू ने एक कमेटी बनाई थी। उसी कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर एक दर्जन जदयू नेताओं पर कार्रवाई की गई है।
जिन लोगों को पार्टी से निष्कासित किया गया है, उनमें पूर्व विधायक अशोक सिंह, औरंगाबाद के जदयू नेता संजीव कुमार सिंह, सहरसा के जदयू नेता प्रमोद सदा, सीवान के संजय कुशवाहा, कमला कुशवाहा, जहानाबाद के पूर्व जिलाध्यक्ष गोपाल शर्मा उर्फ शशिभूषण कुमार, जहानाबाद के नेता महेंद्र सिंह, गुलाम मुर्तजा अंसारी, अमित कुमार पम्मू, दरभंगा के नेता अवधेश लाल देव, गयाजी में कोच प्रखंड अध्यक्ष जमीलउर रहमान शामिल हैं।
बिहार जदयू अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने शुक्रवार को कहा कि जदयू और एनडीए के खिलाफ काम करने के लिए सभी नेताओं को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। निष्कासन पत्र पर उमेश कुशवाहा के हस्ताक्षर भी हैं। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार के निर्देश पर कार्रवाई की गई है।
इधर, जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने मुख्यमंत्री और जदयू नेता नीतीश कुमार की कार्यप्रणाली को लेकर कहा कि उनकी पहचान ऐसे जन नेता के रूप में है, जिनकी राजनीति का केंद्र आम जनता और लोकतांत्रिक संवाद रहा है। बिहार भर की यात्रा और लोगों से सीधा संवाद उनकी विशिष्ट कार्यशैली का अभिन्न अंग है। वे लोकतंत्र में जनता को सबसे आगे रखते हुए न केवल उनकी बात सुनते हैं, बल्कि उस फीडबैक को अपने शासन और नीति निर्माण का आधार भी बनाते हैं।
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जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि मुख्यमंत्री की यात्राओं से यह साफ झलकता है कि वह पुरानी योजनाओं की समीक्षा को लेकर कितने गंभीर हैं। साथ ही जहां-जहां विकास कार्य चल रहे, उनकी वास्तविक स्थिति का भी उन्हें प्रत्यक्ष आकलन होता है। यह प्रक्रिया केवल वर्तमान कार्यों की निगरानी तक सीमित नहीं रहती, बल्कि राज्य के पुनर्निर्माण और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आगे की ठोस योजना की नींव भी रखती है।






