रुझानों ने उड़ाई महागठबंधन की नींद, कांग्रेस नेताओं में हताशा... आखिर किससे हुई भारी गलती?

Bihar Election Result: बिहार चुनाव 2025 में वोटों की गिनती के बीच एनडीए की मजबूत बढ़त ने कांग्रेस नेताओं की चिंता बढ़ा दी है। भाजपा, जदयू और लोजपा (रामविलास) लगातार आगे चल रही हैं।
Trends have disturbed the Grand Alliance's sleep! Congress leaders are frustrated... Who made the biggest mistake?
कांग्रेस नेताओं में हताशा, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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Bihar Election Result Congress Reaction: बिहार में 2025 विधानसभा चुनाव की वोटों की गिनती के शुरुआती दौर में ही एनडीए गठबंधन ने मजबूत स्थिति बना ली है। शुक्रवार दोपहर 1 बजे तक भारतीय जनता पार्टी 90 सीटों पर, जदयू 79 सीटों पर और लोजपा (रामविलास) 20 सीटों पर आगे चल रही थी।

भारतीय चुनाव आयोग के ताजा आंकड़ों के अनुसार एनडीए को स्पष्ट बहुमत मिलता दिखाई दे रहा है, जिससे महागठबंधन और कांग्रेस खेमे में निराशा बढ़ती जा रही है।

संगठन चुनाव प्रबंधन में असफल रहा

पटना में आईएएनएस से बातचीत के दौरान कांग्रेस नेता एवं वरिष्ठ राजनीतिज्ञ निखिल कुमार ने अपनी पार्टी की स्थिति को लेकर स्पष्ट और कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्वीकार किया कि कांग्रेस का संगठन बेहद कमजोर साबित हुआ है और यही खराब प्रदर्शन का प्रमुख कारण है। उनके अनुसार,  'जिन उम्मीदवारों को टिकट दिया गया, वे अच्छे थे, लेकिन और बेहतर विकल्प उपलब्ध थे। हमने उम्मीदवार चयन में होशियारी नहीं दिखाई और पूरा संगठन चुनाव प्रबंधन में असफल रहा।

कांग्रेस के भीतर की खामियां

अपने बयान में निखिल कुमार ने यह भी कहा कि संगठन किसी भी चुनाव की रीढ़ होता है और अगर वह मजबूत न हो, तो चुनावी लड़ाई लड़ना मुश्किल होता है। उन्होंने आगे कहा कि जिन सीटों पर कांग्रेस को मौका मिला था, वहां बेहतर रणनीति बनाकर काम किया जाना चाहिए था।

दूसरी ओर, कांग्रेस नेता और प्रवक्ता पवन खेड़ा का बयान पूरी तरह राजनीतिक तेवर से भरा हुआ रहा। खेड़ा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह चुनाव परिणाम की शुरुआत भर है और अभी अंतिम फैसला आना बाकी है। उन्होंने रुझानों पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाए। उनके अनुसार, रुझानों से ऐसा प्रतीत होता है कि चुनाव आयोग की कार्यशैली बिहार की जनता को प्रभावित कर रही है।

आयोग पर जनता का भरोसा

खेड़ा ने आरोप लगाया कि एसआईआर और 'वोट चोरी' जैसे मुद्दों के बावजूद जनता ने साहस दिखाया है, लेकिन आयोग पर जनता का भरोसा कितना कायम रहेगा, यह देखना बाकी है। उनका कहना था कि यह मुकाबला केवल राजनीतिक दलों का नहीं, बल्कि बिहार की जनता और चुनाव आयोग के बीच का बन गया है।

कुल मिलाकर, एनडीए की बढ़त ने कांग्रेस की अंदरूनी कमजोरियों और राजनीतिक रणनीति दोनों को खुले तौर पर उजागर कर दिया है। अंतिम परिणाम चाहे जो भी हो, लेकिन रुझानों ने कांग्रेस खेमे में चिंता और आत्ममंथन की जरूरत को फिर से सामने ला दिया है।

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