

Bihar Election First Phase Voting Analysis: बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में हुए रिकॉर्ड मतदान ने दूसरे चरण के लिए सियासी पारे को चढ़ा दिया है। हर कोई यह जानना चाहता है कि यह बढ़ा हुआ वोटिंग प्रतिशत किस गठबंधन को फायदा और किसे नुकसान पहुंचाएगा? क्या यह सत्ता परिवर्तन का संकेत है? इन सभी कयासों के बीच, जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने आंकड़ों का हवाला देकर न सिर्फ विपक्ष के दावों की हवा निकाल दी है, बल्कि एनडीए की प्रचंड वापसी की भविष्यवाणी भी कर दी है।
संजय झा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक विस्तृत विश्लेषण पेश करते हुए यह दावा किया है। उन्होंने लिखा कि पहले चरण के मतदान के बाद विभिन्न जिलों से मिले फीडबैक से यह विश्वास पक्का हो गया है कि एनडीए को 2010 से भी अधिक सीटें आएंगी। झा ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि पहले वे 'स्लो मतदान' का मनगढ़ंत आरोप लगा रहे थे, लेकिन जब शाम को ऐतिहासिक मतदान का आंकड़ा सामने आया तो उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया।
संजय झा ने अपने दावे को मजबूत करने के लिए बिहार के चुनावी इतिहास के आंकड़े पेश किए। उन्होंने लिखा कि 2000 के विधानसभा चुनाव में 62.57 प्रतिशत मतदान हुआ था, तब भी तत्कालीन सरकार की वापसी हुई थी। लेकिन, असली 'टर्निंग पॉइंट' 2005 था। फरवरी 2005 में सिर्फ 46.5 और अक्टूबर 2005 में 45.85% मतदान हुआ। यानी 2000 की तुलना में 2005 में करीब 17% कम मतदान हुआ और उस वर्ष सत्ता परिवर्तन हो गया। झा ने कहा कि 2005 की तुलना में 2010, 2015 और 2020, हर बार जब भी ज्यादा वोट पड़े, जनता ने नीतीश कुमार को ही मुख्यमंत्री बनाया।
जेडीयू नेता ने लिखा कि अब 2025 में सबसे ज्यादा वोट पड़े थे, क्योंकि नीतीश कुमार को फिर से मुख्यमंत्री बनाने के प्रति इस बार लोगों में सबसे ज्यादा उत्साह था। उन्होंने राष्ट्रीय आंकड़ों का भी जिक्र किया, कि 2014 की तुलना में 2019 में ज्यादा वोट पड़े तो एनडीए की सीटें बढ़ीं, लेकिन 2024 में कम वोट पड़े तो सीटें कम हुईं। झा के मुताबिक, कल सभी बूथों पर सुबह से ही महिलाओं की लंबी कतारें देखी गईं और माताओं-बहनों ने जाति-धर्म से ऊपर उठकर प्रदेश में शांति, सुरक्षा, समृद्धि तथा सुशासन के लिए उत्साह के साथ मतदान किया है। उन्होंने दावा किया कि 11 नवंबर को दूसरे चरण में भी एनडीए के पक्ष में लहर के स्पष्ट संकेत हैं।