हरियाणा में हुड्डा को हाइकोर्ट से झटका! लैंड स्कैम में बढ़ीं मुश्किलें; मामला CBI कोर्ट पुहंचा

Haryana के पूर्व CM भूपेंद्र सिंह हुड्डा की मुश्किलें बहुत बढ़ गई, 1500 करोड़ के चर्चित मानेसर लैंड स्कैम में हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। अब CBI कोर्ट में ट्रायल का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया।
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1500 करोड़ का मानेसर लैंड स्कैम में भूपेंद्र हुड्डा की मुश्किलें बढ़ी (फोटो- सोशल मीडिया)
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Bhupendra Singh Hooda Manesar Land Scam Case: हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और कद्दावर नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा की मुश्किलें बहुत बढ़ गई हैं। 1500 करोड़ रुपये के चर्चित मानेसर लैंड स्कैम मामले में उन्हें पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने हुड्डा की याचिका खारिज कर दी है, जिससे उनके खिलाफ सीबीआई कोर्ट में ट्रायल का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। यह फैसला हुड्डा के राजनीतिक भविष्य के लिए एक बड़ा संकट माना जा रहा है।

हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब पंचकूला की विशेष सीबीआई कोर्ट भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर आरोप तय करेगी। आरोप तय होने के साथ ही इस हाई-प्रोफाइल केस में नियमित ट्रायल शुरू हो जाएगा। यह मामला हुड्डा के लिए नई मुसीबतें लेकर आया है, क्योंकि सीबीआई पहले ही इस मामले में अपनी तैयारी पूरी कर चुकी है। जांच एजेंसी ने हुड्डा समेत 34 आरोपियों के खिलाफ 80 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट पहले ही दायर कर दी थी।

क्या है 1500 करोड़ का ये पूरा खेल?

यह पूरा मामला साल 2005 से 2007 के बीच मानेसर इलाके में जमीन अधिग्रहण से जुड़ा है। उस वक्त हरियाणा में कांग्रेस की सरकार थी और भूपेंद्र सिंह हुड्डा मुख्यमंत्री थे। हुड्डा पर आरोप है कि उन्होंने सीएम रहते हुए 25 अगस्त 2005 को इंडस्ट्रियल मॉडल टाउनशिप (IMT) बनाने की प्रक्रिया को रद्द कर दिया और उसी दिन सेक्शन-6 का नोटिस जारी करवा दिया। इसके बाद सेक्शन-9 का नोटिस जारी हुआ, जिसमें 25 लाख रुपये प्रति एकड़ का मुआवजा तय किया गया। आरोप है कि इसी दौरान कुछ बिल्डरों ने किसानों से औने-पौने दामों पर करीब 400 एकड़ जमीन खरीद ली। बाद में, 2007 में हुड्डा सरकार ने इस जमीन को अधिग्रहण प्रक्रिया से ही मुक्त कर दिया, जिससे किसानों को सीधे तौर पर करीब 1500 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हुआ।

सुप्रीम कोर्ट ने दिया था जांच का आदेश

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जांच के आदेश दिए थे। सीबीआई ने 2015 में जांच शुरू की और सितंबर 2018 में चार्जशीट दाखिल कर दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा था कि जमीन अधिग्रहण को रद्द करने का यह फैसला दुर्भावनापूर्ण और धोखाधड़ी भरा था। शीर्ष अदालत ने सीबीआई को बिचौलियों को मिले अनुचित लाभ की गहराई से जांच करने और राज्य सरकार को इस घोटाले की एक-एक पाई वसूलने के कड़े निर्देश दिए थे। हाईकोर्ट के ताजा फैसले ने अब इस ट्रायल को हरी झंडी दे दी है।

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