आरा विधानसभा: BJP का ‘दांव’ पड़ेगा उल्टा या लेफ्ट को मिलेगी जीत? क्या है आरा सीट का चुनावी समीकरण
Bihar Assembly Elections 2025: आरा विधानसभा सीट पर पिछली चार विधानसभा चुनावों के आंकड़े बताते हैं कि इस सीट पर एनडीए का पलड़ा भारी रहा है, लेकिन जीत का अंतर हमेशा छोटा रहा है।
- Written By: अमन उपाध्याय
आरा विधानसभा सीट का समीकरण, (डिजाइन फोटो )
Arrah Assembly Seat Profile: बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार आरा सीट पर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। यह सीट उन चुनिंदा सीटों में से एक है, जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने एक बड़ा और चौंकाने वाला फैसला लिया है। पार्टी ने अपने वर्तमान विधायक अमरेंद्र प्रताप सिंह का टिकट काटकर संजय सिंह टाइगर को चुनावी मैदान में उतारा है। यह फैसला अपने आप में कई सवाल खड़े करता है, क्योंकि अमरेंद्र प्रताप सिंह ने 2020 के चुनाव में जीत हासिल की थी।
दूसरी ओर, सीपीआई (एमएल) लिबरेशन (CPI(ML)) ने एक बार फिर अपने पुराने उम्मीदवार कयामुद्दीन अंसारी पर भरोसा जताया है, जो पिछली बार भाजपा को कड़ी टक्कर देकर दूसरे स्थान पर रहे थे। यह मुकाबला इस बार भी भाजपा और लेफ्ट के बीच बेहद कड़ा होने वाला है।
2020 के चुनाव में मामूली अंतर से जीत
आरा सीट पर पिछले कुछ चुनावों में जीत और हार का अंतर बेहद कम रहा है, जो इसकी राजनीतिक संवेदनशीलता को दर्शाता है। 2020 के विधानसभा चुनाव में, भाजपा उम्मीदवार अमरेंद्र प्रताप सिंह ने सीपीआई (एमएल) के कयामुद्दीन अंसारी को महज 3,002 वोटों के मामूली अंतर से हराया था। यह जीत भाजपा ने नीतीश कुमार की जदयू के साथ मिलकर चुनाव लड़ते हुए हासिल की थी। यह मुकाबला इतना कांटे का था कि दोनों उम्मीदवारों के बीच कभी भाजपा आगे निकलती दिख रही थी तो कभी सीपीआई(एमएल)।
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पिछले चार चुनावों का सियासी मिजाज
पिछले चार विधानसभा चुनावों के समीकरणों पर गौर करें तो इस सीट पर एनडीए (NDA) गठबंधन का पलड़ा भारी रहा है, लेकिन जीत का अंतर हमेशा चिंताजनक रहा है। 2010 के चुनाव में नीतीश कुमार एनडीए के साथ थे और भाजपा ने इस सीट पर जीत हासिल की थी। इसके बाद 2015 के चुनाव में नीतीश कुमार एनडीए से अलग होकर राजद के साथ आए थे। इस सीट पर राजद के उम्मीदवार ने जीत हासिल की, लेकिन भाजपा के उम्मीदवार को 1000 वोटों से भी कम के अंतर से हार का सामना करना पड़ा था।
2005 (फरवरी/अक्टूबर): दोनों ही चुनावों में इस सीट पर भाजपा ने जीत हासिल की थी। इस तरह से कुल मिलाकर, पिछले चार चुनावों में तीन बार एनडीए उम्मीदवार ने जीत हासिल की है, जिससे इस बार भी एनडीए को उम्मीद है कि वह इस सीट को निकालने में कामयाब होगी।
जैन, हिंदू और इस्लामी विरासत का संगम
राजनीतिक महत्व के अलावा, आरा शहर का अपना सांस्कृतिक और भौगोलिक महत्व भी है। पटना से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर बसा यह शहर गंगा और सोन नदियों के किनारे स्थित है। आरा शहर जैन, हिंदू और इस्लामी विरासत का एक अद्भुत संगम है। यहाँ कई प्राचीन मंदिर हैं, जहाँ साल भर भक्तों का आना-जाना लगा रहता है। इतिहासकार मानते हैं कि आरा धार्मिक शांति और इतिहास प्रेमियों के लिए एक परफेक्ट वीकेंड गेटअवे है। उनका कहना है कि अगर किसी को बिहार की राजनीति को नजदीक से समझना है, तो आरा विधानसभा सीट एक सटीक जगह साबित हो सकती है।
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मतदाताओं का ऐसा है आंकड़ा
आरा विधानसभा सीट पर मतदाताओं और आबादी का विवरण इस प्रकार है। आरा विधानसभा क्षेत्र की कुल जनसंख्या 5 लाख 73 हजार 472 है, जिसमें पुरुष जनसंख्या 3,05,776 और महिला जनसंख्या 2,67,696 है। अगर क्षेत्र के कुल मतदाताओं को देखा जाए तो चुनाव आयोग के अनुसार यहां पर 3 लाख 34 हजार 622 मतदाता हैं, जिनमें से पुरुष मतदाताओं की संख्या 1,80,180 और महिला मतदाताओं की संख्या 1,54,438 है। वहीं थर्ड जेंडर मतदाताओं की कुल संख्या 4 है।
भाजपा के लिए यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या मौजूदा विधायक का टिकट काटने का फैसला सही साबित होता है, या फिर यह फैसला लेफ्ट को इस सीट पर जीत का मौका दे देगा। चुनावी नतीजे इस बार भी मामूली अंतर से तय होने की पूरी संभावना है।
