
नीतीश कुमार व तेजस्वी यादव AI Image
Bihar AI Exit Poll: बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर एग्जिट पोल सामने आ चुके हैं। लेकिन सवाल यह है कि बिहार की जनता ने नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले एनडीए को चुना है या फिर तेजस्वी यादव की लीडरशिप वाले महागठबंधन को सत्ता सौंपी है? तो हमने हमने सोचा क्यों न टेक्नोलॉजी के दौर में AI से बिहार का एग्जिट पोल लिया जाए।
जिसके लिए हमने तीन पापुलर प्लेटफार्म्स का इस्तेमाल किया है। जिसमें ग्रोक, परप्लेक्सिटी और चैटजीपीटी शामिल है। इन AI प्लेटफार्म्स के विश्वलेषणों में बिहार में इस बार किसकी सरकार बनती हुई दिखाई दे रही है। चलिए जानते हैं…
ग्रोक के अनुसार, बिहार की जनता ने एक बार फिर नीतीश कुमार और भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए पर अपना भरोसा जताया है। ग्रोक के विश्लेषण का अनुमान है कि एनडीए 130 से 160 सीटें जीतेगा, जबकि विपक्षी महागठबंधन 85 से 100 सीटों तक सीमित रह सकता है।
ग्रोक का कहना है कि इस बार महिलाओं ने मतदान प्रक्रिया को आकार दिया है, उनकी भागीदारी दर 71.6% रही—जो पुरुषों की तुलना में लगभग 9% अधिक है। “मुख्यमंत्री नारी शक्ति योजना” जैसी योजनाओं का सीधा असर पड़ा, जिससे महिलाओं ने एनडीए के लिए पूरे विश्वास के साथ मतदान किया।
ओबीसी और एससी मतदाता भी बड़ी संख्या में एनडीए का समर्थन करते दिखाई दिए। जहां युवा जिन्हें पहले तेजस्वी यादव के साथ माना जाता था, इस बार “विकास बनाम जाति” की मानसिकता से प्रेरित होकर सरकार की योजनाओं से प्रभावित दिखे। ग्रोक स्पष्ट रूप से संकेत देते हैं कि अगर रुझान जारी रहे, तो नीतीश कुमार मुख्यमंत्री की कुर्सी पर वापस आ जाएंगे।
परप्लेक्सिटी का विश्लेषण आगे बताता है कि इस चुनाव में महिला मतदाता ही असली खेल-परिवर्तक बन गई हैं। उनके विश्लेषण के अनुसार, एनडीए को 140 से 167 सीटें मिलने की संभावना है, जबकि महागठबंधन को 70 से 102 सीटें मिलने की संभावना है। पर्प्लेक्सिटी का कहना है कि नीतीश कुमार की सामाजिक कल्याणकारी योजनाओं- 10 हजार रुपये की नकद सहायता, साइकिल योजना, महिला समूह ऋण योजना, मुफ़्त बिजली और सुरक्षा में सुधार के साथ महिला मतदाताओं का दिल जीत लिया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन क्षेत्रों में महिलाओं की संख्या पुरुषों से ज़्यादा है, वहां एनडीए के 60% से ज़्यादा सीटें जीतने की संभावना है। इसके अलावा, तेजस्वी यादव की 2, 500 प्रति माह योजना को विश्वसनीय नहीं माना जा रहा है। क्योंकि नीतीश पहले ही “तत्काल लाभ” वाली योजनाएं पेश कर चुके हैं।
परप्लेक्सिटी क्सिटी के अनुसार, जनसुराज पार्टी (प्रशांत किशोर) भी उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी, उसे 0 से 5 सीटें जीतने का अनुमान है। परप्लेक्सिटी का निष्कर्ष स्पष्ट है। एनडीए सरकार वापसी की ओर है, और नीतीश कुमार फिर से मुख्यमंत्री बन सकते हैं।
चैटजीपीटी के अनुसार, बिहार की जनता ने “स्थिरता बनाम अस्थिरता” के लिए वोट दिया है। इस रिपोर्ट के अनुसार, एनडीए को लगभग 147 सीटें मिलने की उम्मीद है, जबकि महागठबंधन लगभग 90 सीटों पर सिमट जाएगा। चैटजीपीटी का कहना है कि इस बार भारी मतदान, खासकर महिलाओं की सक्रिय भागीदारी ने सत्ता विरोधी लहर को कमज़ोर कर दिया है।
पिछले पांच वर्षों में बिजली, सड़क, पानी और कानून-व्यवस्था में हुए सुधारों ने ग्रामीण मतदाताओं का रुझान सरकार की ओर बनाए रखा है। रिपोर्ट के अनुसार, नीतीश कुमार और भाजपा का गठबंधन 243 सीटों में से लगभग 60% सीटें जीत सकता है। चैटजीपीटी का निष्कर्ष है कि अगर मौजूदा रुझान जारी रहे, तो नीतीश कुमार 2025 में भी बिहार के मुख्यमंत्री बने रहेंगे।
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ग्रोक, परप्लेक्सिटी और चैटजीपीटी का विश्लेषण एक ही ओर इशारा करता है। एनडीए को 140-160 सीटें मिलने की संभावना है। महागठबंधन को 80-100 सीटें और जन सुराज व अन्य को 5-8 सीटें। इस एआई भविष्यवाणी की सटीकता 14 नवंबर को मतगणना के बाद स्पष्ट हो जाएगी।






