भारत में वाहन स्टील री-साइक्लिंग के नए नियम, ऑटो कंपनियों पर क्या होगा असर?

ऑटो कंपनियों को अपने वाहनों में इस्तेमाल किए गए स्टील का एक हिस्सा री-साइक्लिंग करना होगा। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अप्रैल 2025 से यह नियम प्रभावी होगा।
Car making
कार बनाने को लेकर सरकार ने नया नियम निकाला है। (सौ. X)
Published on: 
Updated on: 

नवभारत ऑटोमोबाइल डेस्क: भारत सरकार ने वाहन निर्माताओं के लिए नए पर्यावरणीय नियम लागू करने की घोषणा की है। इन नियमों के तहत, ऑटो कंपनियों को अपने वाहनों में इस्तेमाल किए गए स्टील का एक हिस्सा री-साइक्लिंग करना होगा। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अप्रैल 2025 से यह नियम प्रभावी होगा।

क्या है नया नियम?

सरकार के ईपीआर (एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पॉन्सिबिलिटी) मानदंड के अनुसार, 2005-06 में बेचे गए वाहनों में इस्तेमाल किए गए स्टील का कम से कम 8% री-साइक्लिंग करना होगा। यह आंकड़ा धीरे-धीरे बढ़ाकर 2035-36 तक 18% तक किया जाएगा।

ऑटो कंपनियों को क्या करना होगा?

नए नियमों के तहत:

  • कंपनियों को पुरानी और उपयोग में न आने वाली गाड़ियों से स्टील निकालना होगा।
  • अधिकृत स्क्रैपिंग डीलर्स से ईपीआर सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य होगा।
  • ग्राहकों को जागरूक करने के लिए बाय-बैक प्रोग्राम चलाना होगा।
  • सभी गतिविधियों को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के पोर्टल पर पंजीकृत करना होगा।

स्क्रैपिंग फैसिलिटी और ईपीआर सर्टिफिकेट

सीपीसीबी के अनुसार, स्क्रैप वाहनों से प्राप्त स्टील के वजन के आधार पर रजिस्टर्ड व्हीकल स्क्रैपिंग फैसिलिटी ईपीआर सर्टिफिकेट जारी करेगी। कंपनियां इन प्रमाणपत्रों को खरीदकर अपने री-साइक्लिंग टारगेट पूरे करेंगी। ऑटोमोबाइल से जुड़ी अन्य खबरों के लिए यहां क्लिक करें

वाहन मालिकों पर प्रभाव

यह नियम न केवल ऑटो निर्माताओं बल्कि वाहन मालिकों, थोक उपभोक्ताओं (जिनके पास 100 से अधिक वाहन हैं), और स्क्रैपिंग फैसिलिटी संचालकों पर भी लागू होगा।

सरकार का फोकस: स्क्रैपिंग फैसिलिटी बढ़ाना

अधिकारियों का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य औपचारिक वाहन स्क्रैपिंग को बढ़ावा देना है। वर्तमान में भारत में 82 रजिस्टर्ड व्हीकल स्क्रैपिंग फैसिलिटी हैं, और सरकार अगले तीन महीनों में इसे 100 तक बढ़ाने का लक्ष्य रख रही है।

Navbharat Live
navbharatlive.com