दिल्ली की नई ईवी नीति: प्रदूषण कम करने और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम

दिल्ली सरकार राजधानी में प्रदूषण को कम करने के लिए और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए नई 'दिल्ली ईवी पॉलिसी' लाने की तैयारी में है। जो आने वाले समय में राज्य के लिए फायदा बन सकता है।
दिल्ली की नई ईवी नीति: प्रदूषण कम करने और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम
Delhi EV policy में क्या कुछ होगा खास। (सौ. Design)
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नई दिल्ली: दिल्ली सरकार राजधानी में प्रदूषण स्तर घटाने और इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक नई 'दिल्ली ईवी पॉलिसी' लाने की तैयारी में है। हालांकि पहले आए ड्राफ्ट को लेकर खासा विवाद खड़ा हुआ था, खासकर सीएनजी ऑटोरिक्शा पर प्रतिबंध लगाने और उनकी जगह इलेक्ट्रिक ऑटो को प्रमोट करने के प्रावधान को लेकर।

अब नई कमेटी बनाएगी संशोधित पॉलिसी

सरकार ने इस विवाद के बाद ईवी पॉलिसी को नए सिरे से तैयार करने के लिए 10 सदस्यीय कमेटी गठित की है। इसमें सरकारी अधिकारियों के साथ-साथ विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया है। यह कमेटी 12 बिंदुओं पर विचार कर एक संतुलित और व्यवहारिक ईवी नीति का मसौदा तैयार करेगी।

किन बिंदुओं पर होगा विचार?

नई ईवी नीति में निम्नलिखित अहम विषयों पर निर्णय लिया जाएगा:

  • सीएनजी से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर संक्रमण का खाका
  • फ्लाईओवर के नीचे चार्जिंग स्टेशन विकसित करने की योजना
  • बैटरी वेस्ट का प्रबंधन
  • लास्ट माइल कनेक्टिविटी को मजबूत बनाना
  • ईवी सब्सिडी के वितरण की प्रक्रिया

सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, कमेटी ईवी ट्रांजिशन पर साइंटिफिक स्टडी के आधार पर योजना तैयार करेगी और एक वर्ष में कैसे सीएनजी वाहनों को इलेक्ट्रिक में बदला जा सकता है, इसका विस्तृत खाका पेश करेगी।

पॉलिसी की समय-सीमा और खास योजनाएं

नई नीति को 1 अप्रैल 2026 से लागू करने की योजना है। इसके तहत हर वर्ष फ्लाईओवर के नीचे कितने सरकारी और निजी चार्जिंग स्टेशन विकसित किए जा सकते हैं, उस पर विस्तृत रिपोर्ट भी तैयार की जाएगी।

जानिए कौन-कौन है इस कमेटी में शामिल

इस कमेटी में IIT दिल्ली के प्रोफेसर के. रामचंद्र राव को शामिल किया गया है, जो ट्रांसपोर्ट रिसर्च एंड इंजरी प्रिवेंशन सेंटर के प्रमुख हैं। साथ ही, नीति आयोग के सलाहकार और डीटीसी के एमडी शुद्धेंदु ज्योति सिन्हा भी इस कमेटी का हिस्सा हैं। दोनों विशेषज्ञों की भूमिका दिल्ली की परिवहन व्यवस्था को पर्यावरण के अनुकूल बनाने में महत्वपूर्ण होगी।

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