
Car के ब्रैक फेल होने से पहले क्या होता है। (सौ. Freepik)
Brake Pad Problem: कार चलाते समय ब्रेक सबसे अहम सेफ्टी फीचर होता है। अगर ब्रेक फेल हो जाएं, तो वाहन को नियंत्रित करना लगभग नामुमकिन हो जाता है और हादसा निश्चित रूप से जानलेवा साबित हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ब्रेक कभी अचानक फेल नहीं होते, बल्कि कार पहले से ही कई संकेत देने लगती है। दुर्भाग्य से ज़्यादातर ड्राइवर इन संकेतों को नजरअंदाज़ कर देते हैं, जिससे बड़ा नुकसान, महंगा रिपेयर और जान का खतरा बढ़ जाता है। यदि इन चेतावनियों को समय रहते पहचान लिया जाए, तो हादसा टाला जा सकता है।
अगर ब्रेक लगाते समय चीं-चीं जैसी तीखी आवाज़ सुनाई दे, तो यह साफ संकेत है कि ब्रेक पैड घिस चुके हैं। कई पैड में लगा मेटल इंडिकेटर डिस्क से रगड़कर यह आवाज़ पैदा करता है। ऐसे में तुरंत ब्रेक पैड बदलवाना ज़रूरी हो जाता है।
जब ब्रेक पैड पूरी तरह खत्म हो जाते हैं, तब मेटल-टू-मेटल घर्षण होने लगता है। यह न सिर्फ ब्रेकिंग क्षमता बेहद घटा देता है, बल्कि डिस्क को भी गंभीर नुकसान पहुंचाता है। यह स्थिति हादसे की सबसे बड़ी वजह बन सकती है।
यदि ब्रेक दबाते समय पैडल बहुत नीचे तक चला जाता है या स्पंजी महसूस होता है, तो यह सिस्टम में हवा प्रवेश करने या ब्रेक फ्लूइड लीक होने का संकेत है। फ्लूइड लीक होने से ब्रेक का दबाव घट जाता है और कार को रुकने में अधिक दूरी लगती है। आपात स्थिति में यह “जान और मौत” का फासला साबित हो सकता है।
अगर ब्रेक लगाने पर कार बाएं या दाएं खिंच जाती है, तो इसका मतलब है कि एक ओर के ब्रेक पैड या कैलिपर में खराबी है। ऐसी स्थिति में दोनों पहियों पर समान ब्रेकिंग फोर्स नहीं लगता, जो ड्राइविंग को बेहद खतरनाक बना देता है।
ये भी पढ़े: Air Filter क्यों है इंजन का असली रक्षक? खराब फ़िल्टर से होगी परेशानी
पैडल में थरथराहट का अनुभव अक्सर ब्रेक डिस्क के मुड़ने या असमान घिसने के कारण होता है। तकनीकी भाषा में इसे “ब्रेक रोटर वार्पिंग” कहा जाता है। इससे ब्रेकिंग परफॉर्मेंस कम हो जाती है और वाहन पर नियंत्रण कमजोर पड़ जाता है।
यदि हैंडब्रेक नीचे करने के बाद भी लाल ब्रेक वार्निंग लाइट जलती रहती है, तो यह ब्रेक फ्लूइड लेवल कम होने या सिस्टम में किसी गंभीर इलेक्ट्रिकल फॉल्ट का संकेत है। इस लाइट को नजरअंदाज़ करना सीधा जीवन जोखिम में डालने जैसा है।






